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Rajasthan: भाजपा नेताओं को सरकार बनाने की कम और मुख्यमंत्री बनने की चिंता ज्यादा, क्यों कही जा रही यह बात?
सार
भाजपा कोर कमेटी की बैठक में भाजपा आलाकमान ने प्रदेश के नेताओं को साफ शब्दों में एकजुट रहने की बात कही है। भाजपा में चल रही गुजबाजी को लेकर कहा जा रहा है कि नेताओं को प्रदेश में सरकार बनाने की कम और मुख्यमंत्री पद को लेकर ज्यादा चर्चा है।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : PTI
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विस्तार
राजस्थान भाजपा में बढ़ते आपसी गतिरोध और गुटबाजी ने आलाकमान की चिंता बड़ा दी है। शुक्रवार को भाजपा कोर कमेटी की बैठक में राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया, पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, केंद्रीय गजेंद्र सिंह, अर्जुन मेघवाल, सीपी जोशी, गुलाब चंद कटारिया, राजेंद्र राठौर, कैलाश चौधरी और संगठन मंत्री चंद्रशेखर शामिल हुए।
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इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद थे। इस बैठक में राजस्थान की चुनावी रणनीति को लेकर रूप रेखा तय होनी थी, लेकिन यह बैठक आलाकमान की क्लास रूम बन गई। बैठक में भाजपा आलाकमान ने प्रदेश के नेताओं को साफ शब्दों में एकजुट रहने की बात कही है।
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दरअसल, आलाकमान का लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि सभी नेता एक साथ मिलकर पार्टी के लिए काम करें, लेकिन राजस्थान में ऐसा कुछ नहीं हो रहा है। प्रदेश के नेता अपने-अपने तरीके और कार्यप्रणाली के साथ काम कर रहे हैं। प्रदेश भाजपा में सबसे ज्यादा खींचतान मुख्यमंत्री पद के दावेदार को लेकर हो रही है।
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यही कारण है कि पार्टी नेताओं के कार्यक्रमों की भाजपा नेता ही अनदेखी की जा रही है। जिस कारण भाजपा कांग्रेस के खिलाफ कोई जन मुद्दा बनाने में सफल नहीं हो पाई है।
प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने सरकार को घेरने के लिए आंदोलन सहित कई अन्य प्रयास किए, लेकिन आपसी गतिरोध ने किसी भी मुद्दे को पनपने नहीं दिया। गतिरोध के कारण सतीश पूनिया के इन आंदोलन और कार्यक्रमों में ज्यादा भीड़ नहीं जुट पाई। जिसका खामियाजा भाजपा को उठाना पड़ रहा है।
राजस्थान में पिछले 20 साल से एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा की सरकार बनती रही है। कहा जाता है कि विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही विपक्षी नेताओ में चर्चा शुरू हो जाती है कि अब हमारी सरकार आने वाली है। कहा जा रहा है कि इस मानसिकता के कारण भाजपा नेताओं को प्रदेश में सरकार बनाने की कम और मुख्यमंत्री पद को लेकर ज्यादा चिंता है।
हालांकि, इस बार भाजपा आलाकमान को इस बात का अंदेशा है कि इस बार लड़ाई आसान नहीं होगी। कांग्रेस भी 2023 के विधानसभा चुनाव की लड़ाई में दम भर रही हैं। सीएम अशोक गहलोत लगातार राजस्थान मॉडल की चर्चा कर रहे हैं। वह पीएम मोदी के गुजरात मॉडल को भी चुनौती दे रहे हैं। ऐसे में अगर भाजपा आपसी गुटबाजी में लगी रही तो इसका असर चुनाव परिणाम पर भी दिखाई दे सकता है।
इधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक नवंबर को राजस्थान दौरे पर आने वाले हैं। पीएम मोदी का दौरा मेवाड़ के लिए अहम माना जा रहा है। जहां भाजपा अपनी खोती हुई लोकप्रियता को बचाने और एक बार फिर अपना परचम लहारे का प्रयास कर रही है। इसकी शुरुआत करने के लिए पीएम मोदी यहां आ रहे हैं।