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भरतपुर में तीन साल बाद मिला बिछड़ा परिवार: आश्रम में बच्चों को देख फूट-फूटकर रो पड़े बुजुर्ग, अब घर वापसी

Fri, 25 Sep 2026 11:06 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Fri, 25 Sep 2026 11:06 PM IST
सार

तीन साल से परिवार से बिछड़े रामबाबू की आखिरकार अपनों से मुलाकात हो गई। इलाज के लिए अलीगढ़ गए रामबाबू लापता होने के बाद भरतपुर के अपना घर आश्रम पहुंचे थे। आश्रम की कोशिशों से परिजनों का पता चला तो बेटा-बेटियां उन्हें लेने आश्रम पहुंचे।

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Bharatpur: Missing Father Reunites with Family After 3 Years, Apna Ghar Ashram Helps Bring Them Together
बच्चों से मिलकर फूट फूटकर रोए पिता - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भरतपुर के अपना घर आश्रम में करीब तीन साल से रह रहे एक वृद्ध की अपने परिवार से भावुक मुलाकात हुई। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ से इलाज कराने निकले रामबाबू अचानक लापता हो गए थे। परिजनों ने उन्हें काफी तलाशा और पुलिस में गुमशुदगी भी दर्ज कराई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। अब आश्रम प्रबंधन की कोशिशों से करीब तीन साल बाद रामबाबू अपने बेटे, बहू और दोनों बेटियों से मिले और परिवार के साथ घर लौट गए।

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इलाज कराने गए थे, फिर हो गए लापता
आश्रम के सचिव नरेंद्र तिवारी के अनुसार रामबाबू करीब तीन साल पहले अपने गांव जलालपुर से इलाज कराने अलीगढ़ गए थे। इसके बाद वे संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गए और वापस घर नहीं लौटे। परिजनों ने उन्हें रिश्तेदारों और संभावित स्थानों पर काफी तलाशा। जब कोई जानकारी नहीं मिली तो अलीगढ़ पुलिस में गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई गई। रामबाबू के बेटे राजू ने भी पिता को खोजने की काफी कोशिश की लेकिन सफलता नहीं मिली।
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भरतपुर पुलिस ने किया था रेस्क्यू
भरतपुर की अटलबंद थाना पुलिस ने 15 जून 2023 को रामबाबू को हीरादास इलाके से रेस्क्यू किया था। पुलिस ने उनकी देखभाल और इलाज के लिए उन्हें अपना घर आश्रम में भर्ती कराया। आश्रम में नियमित देखभाल और उपचार के बाद रामबाबू की सेहत में सुधार हुआ। उनकी शारीरिक और मानसिक स्थिति बेहतर होने पर उन्होंने आश्रम प्रबंधन को अपने गांव और परिवार के बारे में जानकारी दी।
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तीन साल बाद परिवार तक पहुंची खबर
रामबाबू से मिली जानकारी के आधार पर आश्रम प्रबंधन ने उनके परिजनों से संपर्क करने की कोशिश शुरू की। आखिरकार परिवार से संपर्क हो गया और उन्हें बताया गया कि रामबाबू जीवित हैं और भरतपुर के अपना घर आश्रम में रह रहे हैं। पिता के मिलने की खबर सुनते ही परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। रामबाबू की बेटियां सुशीला और शीतल, बेटा राजू और बहू रिकेश उन्हें लेने के लिए भरतपुर पहुंचे।

बच्चों को देखकर फूट-फूटकर रोए रामबाबू
आश्रम में करीब तीन साल बाद जब रामबाबू अपने परिवार के सामने आए तो माहौल भावुक हो गया। रामबाबू अपनी बेटियों से लिपटकर रो पड़े। बेटा राजू और दोनों बेटियों की आंखों से भी खुशी के आंसू छलक पड़े। बहू ने रामबाबू के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। तीन साल के इंतजार के बाद परिवार को अपना बिछड़ा सदस्य वापस मिल गया। इसके बाद रामबाबू अपने बेटे राजू और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ खुशी-खुशी अपने घर के लिए रवाना हो गए।

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