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Bharatpur: तिरंगा न्याय यात्रा को महुआ पुलिस ने रोका, 15 अगस्त को हुई थी रवाना, सीएम से मिलने जयपुर जा रहे थे

Fri, 16 Aug 2024 08:14 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर/दौसा
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, भरतपुर/दौसा Published by: अरविंद कुमार Updated Fri, 16 Aug 2024 08:14 PM IST
सार

राजस्थान के भरतपुर नगर निगम से नाराज और मकानों के पट्टे जारी करने की मांग को लेकर हजारों की संख्या में लोगों ने 15 अगस्त को जयपुर की तरफ कूच किया था। महुआ पर पुलिस ने लोगों को रास्ते में ही रोक दिया है।

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Bharatpur Mahua police stopped Tiranga Nyay Yatra it had left on 15th August was going to Jaipur to meet CM
महुआ पुलिस और लोग - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भरतपुर नगर निगम से नाराज और मकानों के पट्टे जारी करने की मांग को लेकर हजारों की संख्या में लोगों ने 15 अगस्त को जयपुर की तरफ कूच किया था। शुक्रवार को महुआ पर पुलिस ने लोगों को रास्ते में ही रोक दिया है। लोग तिरंगा न्याय यात्रा निकालते हुए जयपुर की तरफ कूच कर रहे थे।

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नगर निगम के पूर्व पार्षद इंद्रजीत भारद्वाज ने बताया कि कल कच्चा परकोटा संघर्ष समिति की प्रस्तावित तिरंगा न्याय यात्रा भरतपुर से रवाना होकर आज महुआ पहुंची है। जैसे ही दौसा में तिरंगा न्याय यात्रा पहुंची तो महुआ पुलिस ने हमें रोक दिया। पुलिस ने हमसे कहा कि हम आगे नहीं बढ़ने देंगे। हम लोकतांत्रिक तरीके से प्रशासन की शिकायत करने जा रहे हैं तो पुलिस प्रशासन हमें क्यों रोक रहा है। हमने पांच अगस्त को जयपुर कूच का अल्टीमेटम दे दिया था। लेकिन भरतपुर प्रशासन ने हमसे बात करने की कोशिश नहीं की और न ही हमारी समस्याओं के ऊपर कोई ध्यान दिया गया।
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हम मुख्यमंत्री से यह बताना चाहते हैं कि भरतपुर प्रशासन जिस तरह गरीबों और मजदूरों के साथ अन्याय कर रहा है। प्रशासन के बारे में सीएम को अवगत करवाना चाहते थे। आज हमारी पदयात्रा को सरकार के आदेश से महुआ में रोक दिया गया है। हमारी सरकार से यही गुहार है या तो सरकार हमारी समस्या का समाधान करे या फिर हमारी समस्या को सुने। लेकिन कच्चे परकोटे के लोगों की समस्या सुनने के लिए मुख्यमंत्री से लेकर जिला प्रशासन तक कोई तैयार नहीं है।
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हमने कई बार सीएम कार्यालय में सीएम से मिलने के लिए समय मांगा गया। जब हमें मिलने का समय नहीं दिया गया, तब हम भरतपुर से तिरंगा न्याय यात्रा के रूप में 15 अगस्त को भरतपुर से रवाना हुए थे। अब हमें जब महुआ पर रोक दिया गया है तो हमने यह निर्णय लिया है कि या तो हमें आगे बढ़ने दिया जाए नहीं तो प्रशासन का कोई व्यक्ति आकर हमारी बात सुनें।

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