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Hindi News ›   Rajasthan ›   Banswara: The main fair will be held on Magh Purnima in the Maha Kumbh of tribals

Banswara: माघ पूर्णिमा पर भरेगा मुख्य मेला, मध्यप्रदेश-राजस्थान-गुजरात से जुटेंगे तीन लाख से अधिक श्रद्धालु

Mon, 10 Feb 2025 09:59 PM IST
अर्पित याज्ञनिक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बांसवाड़ा Published by: अर्पित याज्ञनिक Updated Mon, 10 Feb 2025 09:59 PM IST
सार

राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के लाखों आदिवासियों की आस्था के केंद्र बेणेश्वर धाम पर वार्षिक मेले की शुरुआत हो गई है। आठ फरवरी को सप्तरंगी ध्वजा फहराने के साथ विधिवत मेले का आरंभ हुआ। मुख्य मेला 12 फरवरी माघ पूर्णिमा को भरेगा, जिसमें तीन लाख से अधिक श्रद्धालु शामिल होंगे।

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Banswara: The main fair will be held on Magh Purnima in the Maha Kumbh of tribals
आदिवासियों का महाकुम्भ आरंभ। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के लाखों आदिवासियों की आस्था के केंद्र और वागड़ का प्रयाग के नाम से विख्यात माही, सोम और जाखम नदियों के जलसंगम तीर्थ बेणेश्वर धाम पर वार्षिक मेला आरंभ हो गया है। आठ फरवरी को एकादशी पर सप्तरंगी ध्वजा फहराने के साथ विधिवत मेले की शुरुआत हो गई है। मुख्य मेला माघ पूर्णिमा 12 फरवरी को भरेगा, जिसमें तीनों राज्यों से लगभग तीन लाख से अधिक आदिवासी और संत मावजी के भक्त सम्मिलित होंगे। मेले की तैयारियां बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिला प्रशासन की ओर से की गई है। हालांकि वार्षिक मेले का उद्घाटन राजनीतिक विवाद में भी फंस गया।

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वार्षिक मेले के उद्घाटन अवसर पर उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने आदिवासी संस्कृति और परंपरा के साथ ही हिन्दू होने की बात कहते हुए अपने विचार व्यक्त किए। मंच पर भारत आदिवासी पार्टी से आसपुर विधायक उमेश डामोर भी मौजूद रहे। मिशनरीज के एजेंडे को वागड़ में थोपने के सांसद रावत के आरोपों के बाद कार्यक्रम में विवाद भी हुआ। जैसे-तैसे शांत हुए मामले के बाद अब सांसद राजकुमार रोत ने उदयपुर सांसद पर बेणेश्वर को राजनीतिक मंच बनाने का आरोप लगाया है।
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छवि धूमिल करने का काम
सांसद रोत ने कहा कि बेणेश्वर धाम को भाजपा सांसद रावत ने राजनीतिक मंच बनाकर इसकी आस्था और महत्व पर कलंक लगाने का काम किया है। भाजपा के नेताओं ने छलकपट किया। विकास के बजाय झारखंड और धर्म की बात करने के साथ भगवान बिरसा मुंडा और अन्य प्रमुख स्थानों के संबंध में गलत तथ्य देकर इन स्थानों की छवि धूमिल करने का काम किया है।
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दो निमंत्रण पत्र, बाप नेता दरकिनार
दरअसल मामले में विवाद की जड़ दो निमंत्रण पत्र बताए जा रहे हैं। सांसद रोत का आरोप है कि भाजपा नेताओं ने अलग से हिन्दी में निमंत्रण पत्र छपवाया, जबकि जिला प्रशासन ने अंग्रेजी में निमंत्रण पत्र छपवाया है। हिन्दी में छपवाए निमंत्रण पत्र में भारत आदिवासी पार्टी से आसपुर विधायक का ही नाम है, जबकि इसमें डूंगरपुर जिला प्रमुख सूर्या अहारी, जिलाध्यक्ष हरीश पाटीदार व पूंजीलाल गायरी, पूर्व विधायक गोपीचंद मीणा, पूर्व सांसद कनकमल कटारा, पूर्व मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीया, धन सिंह रावत के अलावा तीन अन्य पदाधिकारियों के नाम हैं। यह सभी भाजपा से जुड़े हैं। इस तरह बाप पार्टी के प्रतिनिधियों को दरकिनार करने की बात कही जा रही है।


प्रशासन कराएगा जांच
इधर, डूंगरपुर के जिला कलेक्टर अंकित कुमार सिंह ने अमर उजाला को बताया कि प्रशासन की ओर से प्रतिवर्ष की भांति आधिकारिक निमंत्रण पत्र छपवाया गया है, जबकि एक अन्य निमंत्रण पत्र हिन्दी में प्रिंट कराया है, जिसमें जिला प्रशासन, मेला मजिस्ट्रेट, साबला प्रधान आदि के नाम हैं। हिन्दी में प्रिंट निमंत्रण पत्र प्रशासन ने नहीं छपवाया है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को इस संबंध में जांच के निर्देश दिए गए हैं।

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