Rajasthan News: अजमेर शरीफ दरगाह मामले में सुप्रीम कोर्ट में हस्ताक्षर याचिका वापस, जिला अदालत में सुनवाई जारी
Ajmer Sharif Dargah Case Update: अजमेर दरगाह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने हस्ताक्षर याचिका को मेंटेनेबल न मानते हुए वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने कहा कि मामला वर्शिप एक्ट के दायरे में नहीं है और जिला अदालत में सुनवाई जारी रहेगी। हिंदू सेना ने प्रतिक्रिया दी।
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विस्तार
अजमेर दरगाह से जुड़े मामले में रोक लगाने की मांग को लेकर दायर हस्ताक्षर याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान माननीय मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता इस मामले में पक्षकार नहीं है, इसलिए उसकी इंटरवेंशन एप्लीकेशन मेंटेनेबल नहीं है और उसे पार्टी भी नहीं बनाया जा सकता। अदालत ने याचिकाकर्ता को आवेदन वापस लेने का विकल्प दिया, जिसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी एप्लीकेशन वापस ले ली।
वर्शिप एक्ट के दायरे पर स्पष्टीकरण
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यह मामला प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट के दायरे में नहीं आता। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि जिला अदालत में इस केस की सुनवाई जारी रहेगी। संबंधित हस्ताक्षर याचिका कर्नाटक के एक मुस्लिम समुदाय के व्यक्ति द्वारा दायर की गई थी।
हिंदू सेना की प्रतिक्रिया
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता ने कहा कि अजमेर दरगाह से जुड़े मामले में सत्य सामने आने से रोकने के प्रयास किए जा रहे हैं। उनका कहना था कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन सत्य को दबाया नहीं जा सकता।
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विष्णु गुप्ता ने यह भी कहा कि अजमेर दरगाह भगवान शिव का मंदिर है और इस ऐतिहासिक तथ्य को सामने आने से रोकने के लिए विभिन्न स्तरों पर बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी को न्यायिक प्रक्रिया की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
जिला अदालत की सुनवाई पर नजर
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब यह मामला जिला अदालत में आगे बढ़ेगा। संबंधित पक्षों का कहना है कि जिला अदालत में निष्पक्ष और तथ्यात्मक सुनवाई से मामले से जुड़े ऐतिहासिक और कानूनी पहलुओं की विस्तृत जांच होगी। आने वाली सुनवाई पर सभी पक्षों की निगाहें टिकी हुई हैं।
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