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Rajasthan: अजमेर दरगाह में हिंदू मंदिर होने का दावा, ASI सर्वेक्षण कराने की मांग
Wed, 21 Feb 2024 04:15 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Wed, 21 Feb 2024 04:15 PM IST
सार
अजमेर दरगाह में हिंदू मंदिर होने का फिर दावा किया गया है। वीर हिंदू आर्मी ने इसको लेकर ज्ञापन सौंपा। साथ ही एएसआई सर्वेक्षण कराने की मांग की।
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ज्ञापन सौंपते हुए वीर हिंदू आर्मी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
अजमेर में स्थित विश्व प्रसिद्ध सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में बीते महीने जहां महाराणा प्रताप सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजवर्धन सिंह परमार ने दरगाह में हिंदू मंदिर होने का दावा किया था। वहीं, अब ऐसा ही एक दावा फिर से किया जा रहा है। इस बार यह दावा वीर हिंदू आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सिमरन गुप्ता और संस्थापक प्रदेश उपाध्यक्ष पंकज वर्मा के द्वारा किया जा रहा है।
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बता दें कि इसको लेकर वह बुधवार को अजमेर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। जहां पर उन्होंने अतिरिक्त जिला कलेक्टर लोकेश कुमार गौतम को ज्ञापन सौंपकर अजमेर स्थित गरीब नवाज की दरगाह और तारागढ़ के किले का एएसआई सर्वेक्षण करने की मांग की। ज्ञापन देने आए सिमरन गुप्ता ने बताया कि ख्वाजा गरीब नवाज की दरगाह परिसर में तारागढ़ के किले का एएसआई सर्वेक्षण होना चाहिए। क्योंकि वहां महादेव शिव का मंदिर है, जिसे आज जन्नती दरवाजे के नाम से जाना जाता है तो वहीं, अढ़ाई दिन का झोपड़ा एक सरस्वती माता का मंदिर था। उन्होंने पत्र में लिखा कि अजमेर में चिश्ती की दरगाह का पूरा परिसर मुस्लिम आक्रमणकारियों द्वारा ध्वस्त किए गए हिंदू और जैन मंदिरों की मंदिर सामग्री का उपयोग करके बनाया गया है।
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ऐसे साक्ष्य हैं कि मकबरे की वर्तमान संरचना एक नष्ट हुए प्राचीन महादेव मंदिर के ऊपर बनाई गई है। प्राथमिक साक्ष्यों में से एक वर्तमान में मकबरे में सबसे पुरानी संरचना है संदल खाना, जहां ख्वाजा की कब्र के लिए प्रतिदिन संदल तैयार किया जाता है। इसमें एक द्वार है, जो एक भूमिगत मार्ग से तहखाना तक जाता है। जहां ख्वाजा के शारीरिक अवशेष दफन हैं। यहीं पर मूल महादेव देवता स्थापित हैं।
उन्होंने अपने पत्र में कहा कि एक समर्पित कार्यवाहक ब्राह्मण परिवार द्वारा महादेव को प्रतिदिन इसी स्थान पर चंदन अर्पित किया जाता था। परिवार के वंशज द्वारा अभी भी दरगाह की देखभाल की जाती है और उन्हें घड़ियाली (घंटी बजाने वाला) कहा जाता है। जो दर्शाता है कि उस स्थान पर एक बड़ी मंदिर की घंटी भी थी। इस्लामी आक्रमणकारियों से सदियों पहले अजमेर मंदिरों देवता और जलाशयों के शहर के रूप में प्रदर्शित था। इसी तरह का अपमान और दुरुपयोग अढ़ाई दिन का झोपड़ा मस्जिद में दिखाई देता है, जो सीधे एक बड़े हिंदू संस्कृत व महाविद्यालय और भगवान विष्णु के मंदिर के शीश पर बनाया गया था।
सूफी संत चिश्ती हिंदू पर युद्ध छेड़ने के लिए गौरी की सेना के साथ भारत आए थे। उन्होंने कई हिंदू मंदिरों को नष्ट किया। पृथ्वीराज चौहान के पकड़े जाने का जश्न मनाया गया। तलवार के बल पर हजारों लोगों का जबरन धर्म परिवर्तन कराया और गौमांस कबाब खाने और हिंदूओं का अपमान करने के लिए अजमेर में प्रतिदिन गाय की हत्या की गई। उन्होंने कहा कि तारागढ़ का किला प्राचीन किला है, जिसमें एक प्राचीन शिव मंदिर भी था। इससे मुस्लिम आक्रमणकारियों ने धवस्त कर मस्जिद बना दी थी।
पूरे तारागढ़ के किले पर मुसलमान अवैध रूप से कब्जा कर रहे हैं, जो तारागढ़ एक प्राचीन धरोहर है। उपरोक्त प्राचीन किले से सभी अवैध कब्जा को हटाया जाए। साथ ही किले का सौंदर्यीकरण कराया जाए। उन्होंने कहा कि दरगाह के आसपास रहने वाले कुछ सामाजिक तत्व व भूमाफियाओं ने वन विभाग की सरकारी जमीन पर कब्जा किया हुआ है, जिसे जल्द से ज्यादा मुक्त कराया जाए।