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Ajmer News: सांसारिक जीवन की मोहमाया त्याग कर हर्षाली साध्वी बनेंगी, आज अजमेर में निकाला वरघोड़ा

Tue, 19 Nov 2024 04:59 PM IST
अजमेर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर Published by: अजमेर ब्यूरो Updated Tue, 19 Nov 2024 04:59 PM IST
सार

32 लाख का सालाना पैकेज छोड़कर सॉफ्टवेयर इंजीनियर 28 वर्षीय हर्षाली कोठारी साध्वी बनेंगी। दीक्षा लेने से पूर्व उन्होंने कहा कि पैसों की मोहमाया से दूर निकलकर अब मानव जीवन जीना है।

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Ajmer News: Harshali will become a Sadhvi by renouncing the worldly life, Varghoda taken out in Ajmer today
सॉफ्टवेयर इंजीनियर हर्षाली कोठारी बनेगी साध्वी

विस्तार

ब्यावर की रहने वाली 28 वर्षीय हर्षाली कोठारी सांसारिक जीवन की मोहमाया त्याग कर दीक्षा ग्रहण करने जा रही हैं। हर्षाली ने 32 लाख रुपये का सालाना पैकेज छोड़कर ब्यावर स्थित आचार्य रामलालजी महाराज के सान्निध्य में दीक्षा ग्रहण करेंगी। दीक्षा लेने से पहले अजमेर की महावीर कॉलोनी में हर्षाली की बुआ के घर से उनका वरघोड़ा निकला गया। इस दौरान लोगों ने उनका अभिनंदन करते हुए उनका आशीर्वाद भी लिया। 
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मीडिया से बातचीत करते हुए हर्षाली ने कहा कि 4 साल पहले वे कोविड के दौरान ब्यावर स्थित जैन गुरु आचार्य रामलालजी महाराज के चातुर्मास में शिरकत करने पहुंची थीं। यहां उन्होंने जैन समाज की सभी परंपराओं का परिचय ध्यान किया और इससे उन्हें प्रेरणा मिली कि वे भी सांसारिक मोहमाया को त्याग कर जैन साध्वी बनेंगी।
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3 दिसंबर को उनकी दीक्षा ब्यावर में होगी और इसके बाद वे अपना बाकी का संपूर्ण जीवन साध्वी बनकर ही गुजारेंगी। उन्होंने कहा कि अब उन्हें पैसों की मोहमाया से दूर निकलकर मानव जीवन जीना है। सुख-दुख क्या है और जीवन क्यों मिला है। इसका उत्तर संयम मार्ग है और इसीलिए वह इस मार्ग पर चलना चाहती हैं। 
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उनकी माता उषा कोठारी ने बताया कि उनकी बेटी की यह इच्छा उनके लिए काफी मुश्किल है लेकिन गुरुजनों की प्रेरणा से उसने यह निर्णय लिया है, ऐसे में दीक्षा से पहले उनका वरघोड़ा निकाला गया। जहां समाज के सभी लोगों ने हर्षाली का अभिनंदन करते हुए उनसे आशीर्वाद लिया। इस दौरान बड़ी संख्या में जैन समाज के लोग मौजूद रहे।


हर्षाली के माता-पिता ने बताया कि वह एडोबी बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर थी और उसका 32 लाख रुपये का पैकेज था, जिसे छोड़कर उसने साध्वी बनने का निर्णय लिया है। तीन भाइयों में वह एक ही बेटी थी और इसी कारण माता-पिता और भी ज्यादा दुखी हैं लेकिन बेटी संयम मार्ग में आगे बढ़े यह भी सभी के लिए जरूरी है इसीलिए इसके सुख की कामना करते हुए उन्होंने उसे दीक्षा की अनुमति दी। 
 

सॉफ्टवेयर इंजीनियर हर्षाली कोठारी बनेगी साध्वी

सॉफ्टवेयर इंजीनियर हर्षाली कोठारी बनेगी साध्वी

 

सॉफ्टवेयर इंजीनियर हर्षाली कोठारी बनेगी साध्वी

सॉफ्टवेयर इंजीनियर हर्षाली कोठारी बनेगी साध्वी

 

सॉफ्टवेयर इंजीनियर हर्षाली कोठारी बनेगी साध्वी

सॉफ्टवेयर इंजीनियर हर्षाली कोठारी बनेगी साध्वी

 

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