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राजस्थान: चिश्ती रंग में रंगा अजमेर, महफिल खाने में सजी कुल की महफिल, जन्नती दरवाजा बंद
Tue, 08 Feb 2022 08:06 PM IST
उदित दीक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अजमेर
Published by: उदित दीक्षित
Updated Tue, 08 Feb 2022 08:06 PM IST
सार
810वें उर्स मौके पर दरगाह शरीफ के कदीमी रस्मों को मौरूसी अमले की जानिब से पूरा किया गया। बड़े पीर की पहाड़ी से तोपों की सलामी दी गई और नक्कारखाने से शादियाने बजाए गए।
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अजमेर दरगाह शरीफ पर मौजूद लोगों की भीड़।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
810वें उर्स मौके पर दरगाह शरीफ स्थित महफिल खाने में कुल की महफिल संपन्न हुई। सज्जादानशीन दीवान सैयद जैनुअल आबेदीन अली खान की सदारत में आयोजित महफिले कुल में दरगाह शरीफ के शाही कव्वाल ने हजरत अमीर खुसरो के कलाम को पढ़ा। जैसे ही हारमोनियम और तबले की थाप पर 'आज रंग है रि मां रंग है रि..' गूंजा तो पूरी दरगाह शरीफ का माहौल चिश्तियां रंग में सराबोर हो गया।
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कुल की महफिल के साथ ही सुराही में गुलाब जल और केवड़े का पानी छिड़का गया। कुल के छींटे पाने की हसरत सभी में दिखी। दरगाह शरीफ में देर रात से धुलाई का सिलसिला शुरू हो गया था जिससे की पूरी दरगाह के अहाते में एक रूहानी फिजा फैली हुई महसूस हुई।
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तोपों की सलामी दी गई
दरगाह शरीफ के कदीमी रस्मों को मौरूसी अमले की जानिब से पूरा किया गया। बड़े पीर की पहाड़ी से तोपों की सलामी दी गई और नक्कारखाने से शादियाने बजाए गए। कुल की महफिल समाप्त होने के साथ ही सज्जादानशीन दरगाह ख्वाजा साहब आस्ताना शरीफ में हाजरी के लिए पहुंचे। इसी बाद जन्नती दरवाजा बंद हो गया।
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