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मशीनों के घर्षण को ठीक करेगा सब्जियों का तेल
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पटियाला। खुश्की के कारण मशीनों के अंदर के घर्षण को घटाने और उनकी अंदरूनी तरलता और चिकनाहट कायम रखने के लिए सब्जियों के तेल पर आधारित लुब्रीकेंट्स काम दे सकते हैं। पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी की इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाजी से संबंधित फैकेल्टी में मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ता अमृतपाल की ओर से की गई शोध के कुछ ऐसे ही नतीजे सामने आए हैं। अमर उजाला से बात करते अमृतपाल ने कहा कि ऐसा होने से उद्योगों में खनिज तेल आधारित लुब्रीकेंट्स का इस्तेमाल घटाया जा सकता है, जो मानव सेहत व वातावरण के साथ जुड़े मसलों के पक्ष से बहुत फायदेमंद कदम होगा।
पीयू से पीएचडी करने वाले अमृतपाल का कहना है कि उसकी इस खोज में स्टेनलेस स्टील की ड्रिलिंग करने में कम से कम मात्रा में लुब्रीकेशन तकनीक मतलब एमक्यूएल (मिनीमन क्वांटिटी लुब्रीकेशन) को अपनाया गया। अमृतपाल ने बताया कि आजकल मशीनी कामों में खणिज तेल आधारित लुब्रीकेंट्स का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है। जिस कारण मानव सेहत एवं वातावरण संबंधी अनेक किस्म की समस्याएं पैदा हो रही हैं। इनको हल करने के लिए सेहत व वातावरण पक्षीय तकनीकों व लुब्रीकेंट्स की खोज करना अधिक जरूरी हो गया है।
इसलिए उनके शोधकार्य में स्टेनलेस स्टील में ड्रिलिंग के काम को शुद्ध एमक्यूएल और नैनो फ्लुइड एमक्यूएल के तहत सब्जियों के तेल को बेस आयल के तौर पर इस्तेमाल करके जांच की गई है। प्राप्त नतीजों से यह सामने आया कि बेस आयल के रूप में सब्जियों के तेल के साथ नैनोफ्लुइड एमक्यूएल प्रणाली रिवायती लुब्रीकेंट्स की तुलना में महत्वपूर्ण व बढ़िया नतीजे दे सकती है। यह भी सामने आया कि इसका इस्तेमाल उद्योगों में हो सकता है। यह महंगे तरल की बर्बादी को घटाने के योग्य है। जिससे मानव सेहत व वातावरण के अनुकूल मशीनिंग हो सकती है। वाइस चांसलर प्रोफेसर अरविंद ने शोधकर्ता अमृतपाल को बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है। वीसी ने कहा कि आगे भी इसी तरह से पीयू शोध के क्षेत्र में सराहनीय काम करता रहेगा।
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पीयू से पीएचडी करने वाले अमृतपाल का कहना है कि उसकी इस खोज में स्टेनलेस स्टील की ड्रिलिंग करने में कम से कम मात्रा में लुब्रीकेशन तकनीक मतलब एमक्यूएल (मिनीमन क्वांटिटी लुब्रीकेशन) को अपनाया गया। अमृतपाल ने बताया कि आजकल मशीनी कामों में खणिज तेल आधारित लुब्रीकेंट्स का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है। जिस कारण मानव सेहत एवं वातावरण संबंधी अनेक किस्म की समस्याएं पैदा हो रही हैं। इनको हल करने के लिए सेहत व वातावरण पक्षीय तकनीकों व लुब्रीकेंट्स की खोज करना अधिक जरूरी हो गया है।
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इसलिए उनके शोधकार्य में स्टेनलेस स्टील में ड्रिलिंग के काम को शुद्ध एमक्यूएल और नैनो फ्लुइड एमक्यूएल के तहत सब्जियों के तेल को बेस आयल के तौर पर इस्तेमाल करके जांच की गई है। प्राप्त नतीजों से यह सामने आया कि बेस आयल के रूप में सब्जियों के तेल के साथ नैनोफ्लुइड एमक्यूएल प्रणाली रिवायती लुब्रीकेंट्स की तुलना में महत्वपूर्ण व बढ़िया नतीजे दे सकती है। यह भी सामने आया कि इसका इस्तेमाल उद्योगों में हो सकता है। यह महंगे तरल की बर्बादी को घटाने के योग्य है। जिससे मानव सेहत व वातावरण के अनुकूल मशीनिंग हो सकती है। वाइस चांसलर प्रोफेसर अरविंद ने शोधकर्ता अमृतपाल को बधाई दी और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की है। वीसी ने कहा कि आगे भी इसी तरह से पीयू शोध के क्षेत्र में सराहनीय काम करता रहेगा।
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