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पटियाला : पंजाबी यूनिवर्सिटी में पर्यावरण संरक्षण के लिए दो कमेटियों का गठन, हार्वेस्टिंग सिस्टम के साथ लगेंगे सोलर प्लांट
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पटियाला। पंजाबी यूनिवर्सिटी (पीयू) परिसर को प्रदूषण रहित बनाने के लिए दो कमेटियों का गठन किया गया है। इनमें कमेटी फॉर टेकिंग इनीशिएटिव टू प्रमोट ग्रीन एक्टिविटीज और कमेटी फॉर ग्रीन एंड एनर्जी ऑडिट शामिल है। इन कमेटियों के कनवीनर क्रमवार डॉ. ओंकार सिंह और डॉ. सुखजिंदर सिंह होंगे।
डा. ओंकार ने बताया कि योजना के मुताबिक यूनिवर्सिटी परिसर में पंजाब के वातावरण के अनुकूल ही पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही धरती से ज्यादा पानी सोखने वाले पौधों को धीरे-धीरे खत्म किया जाएगा, ताकि भू-जल की बचत हो सके। इसके अलावा यूनिवर्सिटी में रोजाना पैदा होने वाले गीले कूड़े की संभाल और इसके सही उपयोग के लिए वर्मी कंपोस्ट विधि का सहारा लिया जाएगा। साथ ही जिला प्रशासन की मदद से पीयू परिसर में बड़ी इमारतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इसके अलावा यूनिवर्सिटी में सोलर प्लांट लगाने की भी योजना है।
कई पक्षी पहुंचते हैं परिसर
डॉ. ओंकार ने बताया कि पीयू में बहुत ज्यादा पेड़ होने के कारण अलग-अलग किस्मों के पक्षी परिसर की तरफ आकर्षित होते हैं। इन पक्षियों का यह पेड़ रैन बसेरा हैं। इसलिए आने वाले समय में इन पक्षियों को और बेहतर निवास स्थान मुहैया कराने के लिए झाड़ियां व पौधरोपण किया जाएगा।
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पानी की बर्बादी पर लगाएंगे रोक
डॉ. सुखजिंदर सिंह ने बताया कि यूनिवर्सिटी में ई-वेस्ट और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के भी उचित प्रबंध हैं। इनमें और किस तरह से सुधार लाया जा सकता है, इस पर कमेटी विचार कर ठोस कदम उठाएगी। इसके अलावा पीयू में जहां भी पानी की बर्बादी हो रही है, उसके बारे में पता कर इस पर रोक लगाई जाएगी।
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डा. ओंकार ने बताया कि योजना के मुताबिक यूनिवर्सिटी परिसर में पंजाब के वातावरण के अनुकूल ही पौधे लगाए जाएंगे। साथ ही धरती से ज्यादा पानी सोखने वाले पौधों को धीरे-धीरे खत्म किया जाएगा, ताकि भू-जल की बचत हो सके। इसके अलावा यूनिवर्सिटी में रोजाना पैदा होने वाले गीले कूड़े की संभाल और इसके सही उपयोग के लिए वर्मी कंपोस्ट विधि का सहारा लिया जाएगा। साथ ही जिला प्रशासन की मदद से पीयू परिसर में बड़ी इमारतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इसके अलावा यूनिवर्सिटी में सोलर प्लांट लगाने की भी योजना है।
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कई पक्षी पहुंचते हैं परिसर
डॉ. ओंकार ने बताया कि पीयू में बहुत ज्यादा पेड़ होने के कारण अलग-अलग किस्मों के पक्षी परिसर की तरफ आकर्षित होते हैं। इन पक्षियों का यह पेड़ रैन बसेरा हैं। इसलिए आने वाले समय में इन पक्षियों को और बेहतर निवास स्थान मुहैया कराने के लिए झाड़ियां व पौधरोपण किया जाएगा।
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पानी की बर्बादी पर लगाएंगे रोक
डॉ. सुखजिंदर सिंह ने बताया कि यूनिवर्सिटी में ई-वेस्ट और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के भी उचित प्रबंध हैं। इनमें और किस तरह से सुधार लाया जा सकता है, इस पर कमेटी विचार कर ठोस कदम उठाएगी। इसके अलावा पीयू में जहां भी पानी की बर्बादी हो रही है, उसके बारे में पता कर इस पर रोक लगाई जाएगी।