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साहित्य लोगों से दूर हो रहा है: पातर
Updated Wed, 05 Oct 2016 03:27 PM IST
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पटियाला की पंजाबी यूनिवर्सिटी में पब्लिकेशन ब्यूरो की गोल्डन जुबली के कार्यक्रम मौके सजी पुस्तकें देखते वीसी डा. जसपाल सिंह।
- फोटो : अमर उजाला
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साहित्यकार डा. सुरजीत पातर ने कहा कि लोग साहित्य से दूर नहीं हो रहे हैं बल्कि साहित्य लोगों से दूर हो रहा है। हमें अपनी रचनाओं को मानवता के प्रसंग में लिखने की जरूरत है। वह पंजाबी यूनिवर्सिटी की ओर से पब्लिकेशन ब्यूरो की गोल्डन जुबली के मौके पर आयोजित तीन दिवसीय साहित्य और सभ्याचारक उत्सव के उद्घाटन पर बोल रहे थे।
सन्नी ओबराय आर्ट ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम विशेष तौर पर पहुंचे पर्यावरण प्रेमी संत सीचेवाल ने कहा कि इंसान प्राकृतिक स्रोतों को नष्ट करके अपने आसपास को प्रदूषित करता जा रहा है। आने वाली नस्लों को बचाने के लिए वातावरण से प्रेम करने की जरूरत है। वीसी डा. जसपाल सिंह ने कहा कि पंजाबी विरासत साहित्य और सभ्याचारक संपन्नता से भरपूर है।
यूनिवर्सिटी को अब भाषाई विकास के परिप्रेक्ष्य में रोल माडल के तौर पर जाना जाने लगा है। मौके पर डा. दलीप कौर टिवाना, डा. इंद्रजीत कौर, डा. राजेंद्र प्रसाद मिश्र, डा. चंद्र प्रकाश देवल, डा. रीटा चौधरी भी उपस्थित थे। इससे पहले पीयू के डीन भाषा और पब्लिकेशन ब्यूरो के प्रोफेसर इंचार्ज डा. धनवंत कौर ने आए मेहमानों का स्वागत किया। मौके पर डा. दलीप कौर टिवाना की ओर से लिखित पुस्तक रिलीज की गई।
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सन्नी ओबराय आर्ट ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम विशेष तौर पर पहुंचे पर्यावरण प्रेमी संत सीचेवाल ने कहा कि इंसान प्राकृतिक स्रोतों को नष्ट करके अपने आसपास को प्रदूषित करता जा रहा है। आने वाली नस्लों को बचाने के लिए वातावरण से प्रेम करने की जरूरत है। वीसी डा. जसपाल सिंह ने कहा कि पंजाबी विरासत साहित्य और सभ्याचारक संपन्नता से भरपूर है।
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यूनिवर्सिटी को अब भाषाई विकास के परिप्रेक्ष्य में रोल माडल के तौर पर जाना जाने लगा है। मौके पर डा. दलीप कौर टिवाना, डा. इंद्रजीत कौर, डा. राजेंद्र प्रसाद मिश्र, डा. चंद्र प्रकाश देवल, डा. रीटा चौधरी भी उपस्थित थे। इससे पहले पीयू के डीन भाषा और पब्लिकेशन ब्यूरो के प्रोफेसर इंचार्ज डा. धनवंत कौर ने आए मेहमानों का स्वागत किया। मौके पर डा. दलीप कौर टिवाना की ओर से लिखित पुस्तक रिलीज की गई।
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