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जलूर कमेटी ने संगरूर-लुधियाना मार्ग पर जाम लगाया
ब्यूरो,अमर उजाला/संगरूर
Updated Thu, 24 Nov 2016 10:10 PM IST
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संगरूर में वीरवार को लुधियाना मुख्यमार्ग पर जाम लगाए बैठै मजदूर किसान।
- फोटो : अमर उजाला
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पिछले पांच दिनों से वित्त मंत्री की कोठी के सामने धरना लगाए बैठे मजदूर-किसानों ने जलूर जबर विरोधी एक्शन कमेटी के नेतृत्व में वीरवार को शहर में जबरदस्त रोष प्रदर्शन करते हुए संगरूर-लुधियाना मुख्य मार्ग पर जाम लगाकर जोरदार नारेबाजी की।
धरनाकारी मांग कर रहे थे कि माता गुरदेव कौर के कातिलों और दलितों पर अत्याचार करने वाले गांव के चौधरियों को गिरफ्तार किया जाए, दलितों को आरक्षित हिस्से की पंचायती जमीन दी जाए, दलितों पर डाले मामले रद्द किए जाएं, झगड़े के दौरान दलितों के घरों तथा सामान की तोड़फोड़ और घायलों को मुआवजा दिया जाए।
धरने को संबोधित करते जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी के बलविंदर जलूर, भाकियू उग्राहां के जोगिंदर सिंह उग्राहां ने कहा कि प्रदेश सरकार और प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा। माता गुरदेव कौर के कातिलों के खिलाफ बनती कानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही जिससे सरकार व प्रशासन का मजदूर विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है। प्रशासन स्वीकार की मांगों को लागू करने से भाग रहा है जिससे संघर्षशील लोगों में रोष है।
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उधर, मजदूर-किसानों के संघर्ष में साहित्यकार, रंगकर्मी, कलाकार, बुद्धिजीवियों ने खुलकर समर्थन करते हुए शहर में रोष मार्च निकालते हुए उनकी मांगों को जल्द लागू करने की मांग की। यदि ऐसा न हुआ तो प्रदेश के गांव-गांव और शहर-शहर, हर गली मुहल्ले में इस संघर्ष को लेकर जाने की बात कही। इस मौके पर पीपल्स थिएटर लहरागागा के सैमुअल जोहन, अदाकार मंच (मोहाली) के डा. साहिब सिंह, चंडीगढ़ स्कूल आफ ड्रामा के इकत्र सिंह मौजूद थे।
किसानी बचाओ संघर्ष कमेटी का डीसी दफ्तर के सामने धरना
संगरूर। गांव जलूर के किसानों की तरफ से बनाई किसानी बचाओ संघर्ष कमेटी ने डीसी दफ्तर के सामने रोष प्रदर्शन करते हुए धरना लगाया। धरनाकारियों ने मांग की कि जेल में बंद किए किसानों की रिहाई की जाए। संघर्ष कमेटी के नेता गुरचरण सिंह ने कहा कि भाकियू उग्राहां के नेता मजदूर लोगों को गुमराह कर रहे हैं जो अपनी हरकतों से बाज आएं। उन्होंने कहा कि वह गांव-गांव जाकर भाकियू उग्राहां के अखौती नेताओं का बहिष्कार करने के लिए लोगों से अपील करेंगे।
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धरनाकारी मांग कर रहे थे कि माता गुरदेव कौर के कातिलों और दलितों पर अत्याचार करने वाले गांव के चौधरियों को गिरफ्तार किया जाए, दलितों को आरक्षित हिस्से की पंचायती जमीन दी जाए, दलितों पर डाले मामले रद्द किए जाएं, झगड़े के दौरान दलितों के घरों तथा सामान की तोड़फोड़ और घायलों को मुआवजा दिया जाए।
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धरने को संबोधित करते जमीन प्राप्ति संघर्ष कमेटी के बलविंदर जलूर, भाकियू उग्राहां के जोगिंदर सिंह उग्राहां ने कहा कि प्रदेश सरकार और प्रशासन इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा। माता गुरदेव कौर के कातिलों के खिलाफ बनती कानूनी कार्रवाई नहीं की जा रही जिससे सरकार व प्रशासन का मजदूर विरोधी चेहरा बेनकाब हो गया है। प्रशासन स्वीकार की मांगों को लागू करने से भाग रहा है जिससे संघर्षशील लोगों में रोष है।
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उधर, मजदूर-किसानों के संघर्ष में साहित्यकार, रंगकर्मी, कलाकार, बुद्धिजीवियों ने खुलकर समर्थन करते हुए शहर में रोष मार्च निकालते हुए उनकी मांगों को जल्द लागू करने की मांग की। यदि ऐसा न हुआ तो प्रदेश के गांव-गांव और शहर-शहर, हर गली मुहल्ले में इस संघर्ष को लेकर जाने की बात कही। इस मौके पर पीपल्स थिएटर लहरागागा के सैमुअल जोहन, अदाकार मंच (मोहाली) के डा. साहिब सिंह, चंडीगढ़ स्कूल आफ ड्रामा के इकत्र सिंह मौजूद थे।
किसानी बचाओ संघर्ष कमेटी का डीसी दफ्तर के सामने धरना
संगरूर। गांव जलूर के किसानों की तरफ से बनाई किसानी बचाओ संघर्ष कमेटी ने डीसी दफ्तर के सामने रोष प्रदर्शन करते हुए धरना लगाया। धरनाकारियों ने मांग की कि जेल में बंद किए किसानों की रिहाई की जाए। संघर्ष कमेटी के नेता गुरचरण सिंह ने कहा कि भाकियू उग्राहां के नेता मजदूर लोगों को गुमराह कर रहे हैं जो अपनी हरकतों से बाज आएं। उन्होंने कहा कि वह गांव-गांव जाकर भाकियू उग्राहां के अखौती नेताओं का बहिष्कार करने के लिए लोगों से अपील करेंगे।