{"_id":"69286b418dc73161b203a1fd","slug":"improvement-in-canada-india-relations-is-a-blow-to-alleged-khalistan-supporters-patiala-news-c-46-1-spkl1013-109104-2025-11-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Patiala News: कनाडा–भारत संबंधों में सुधार से कथित खालिस्तान समर्थकों को झटका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Patiala News: कनाडा–भारत संबंधों में सुधार से कथित खालिस्तान समर्थकों को झटका
विज्ञापन
-खालिस्तान समर्थक होने का हवाला देकर शरण मांगने वाले पंजाबी युवक की याचिका खारिज
-- -
सुरिंदर पाल, जालंधर।
कनाडा और भारत के रिश्तों में हाल के दिनों में बने सकारात्मक माहौल का सीधा असर अब जमीनी स्तर पर भी दिखने लगा है। खासकर उन लोगों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है जो खालिस्तान समर्थक होने का हवाला देकर कनाडा में शरण लेने की कोशिश करते रहे हैं। ताजा मामले में कनाडा की एक संघीय अदालत ने पंजाब के गुरदासपुर जिले के जैतो सरजा निवासी गगनदीप सिंह की शरण याचिका सख्त शब्दों में खारिज कर दी। न्यायमूर्ति डेनिस गैसकॉन ने शरणार्थी अपील प्रभाग (आरपीडी) के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि यदि आवेदक को पंजाब में खतरा महसूस होता भी है तो वह मुंबई या नई दिल्ली जैसे शहरों में सुरक्षित रह सकता है। अदालत ने माना कि गगनदीप अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश करने में असफल रहा।
हमले और यौन रुझान का हवाला भी बेअसर
गगनदीप ने दावा किया था कि 2017 में कुछ कट्टरपंथियों ने समलैंगिक होने के कारण उस पर हमला किया और सिख धर्म को कलंकित करने का आरोप लगाया। उसने यह भी बताया कि वह पहले जालंधर और फिर चंडीगढ़ भागा। बाद में कनाडा पहुंचकर उसने खालिस्तान जनमत संग्रह का समर्थन किया और कहा कि भारत लौटने पर उसे खालिस्तान समर्थक बताकर निशाना बनाया जा सकता है लेकिन आरपीडी ने उसकी गवाही को अस्पष्ट और अविश्वसनीय करार दिया। न कोई प्राथमिकी, न जांच का रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। अदालत ने यह भी नोट किया कि वह बिना किसी दिक्कत के भारत से निकल गया था और उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई लंबित नहीं थी।
खालिस्तान समर्थक की प्रोफाइल भी झूठी निकली
गगनदीप ने कनाडा में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों का हवाला देकर अपने दावे को मजबूत करने की कोशिश की लेकिन उल्टा असर पड़ गया। उसके मूल दस्तावेजों में ऐसी कोई जानकारी नहीं थी। आरपीडी ने यह भी कहा कि खालिस्तान आंदोलन को लेकर उसकी समझ सतही थी इसलिए उसे असली समर्थक नहीं माना जा सकता। गगनदीप छात्र वीजा पर कनाडा गया था लेकिन न तो उसने पढ़ाई की और न ही 2018 के बाद किसी कोर्स में दाखिला लिया। शरण आवेदन में 4.5 साल की देरी ने उसके दावे को और कमजोर कर दिया।
विज्ञापन
विदेशी शरण में खालिस्तान कार्ड का दुरुपयोग
यह कोई पहला मामला नहीं है। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में वर्षों से खालिस्तान कार्ड का इस्तेमाल कर शरण पाने की कोशिश की जाती रही है। हाल ही में 73 वर्षीय हरजीत कौर को अमेरिका से तीन दशक बाद भारत प्रत्यर्पित किया गया। वे भी खालिस्तान का हवाला देकर शरण लेना चाहती थीं लेकिन कानूनी विकल्प खत्म होने के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया। कई बार ऐसे दावे पूरी तरह मनगढ़ंत होते हैं। स्वयं पूर्व सांसद सिमरनजीत सिंह मान भी पैसे लेकर करीब 50 हजार शरण समर्थक पत्र जारी करने का दावा कर चुके हैं।
विज्ञापन
सुरिंदर पाल, जालंधर।
कनाडा और भारत के रिश्तों में हाल के दिनों में बने सकारात्मक माहौल का सीधा असर अब जमीनी स्तर पर भी दिखने लगा है। खासकर उन लोगों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है जो खालिस्तान समर्थक होने का हवाला देकर कनाडा में शरण लेने की कोशिश करते रहे हैं। ताजा मामले में कनाडा की एक संघीय अदालत ने पंजाब के गुरदासपुर जिले के जैतो सरजा निवासी गगनदीप सिंह की शरण याचिका सख्त शब्दों में खारिज कर दी। न्यायमूर्ति डेनिस गैसकॉन ने शरणार्थी अपील प्रभाग (आरपीडी) के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि यदि आवेदक को पंजाब में खतरा महसूस होता भी है तो वह मुंबई या नई दिल्ली जैसे शहरों में सुरक्षित रह सकता है। अदालत ने माना कि गगनदीप अपने दावों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश करने में असफल रहा।
हमले और यौन रुझान का हवाला भी बेअसर
गगनदीप ने दावा किया था कि 2017 में कुछ कट्टरपंथियों ने समलैंगिक होने के कारण उस पर हमला किया और सिख धर्म को कलंकित करने का आरोप लगाया। उसने यह भी बताया कि वह पहले जालंधर और फिर चंडीगढ़ भागा। बाद में कनाडा पहुंचकर उसने खालिस्तान जनमत संग्रह का समर्थन किया और कहा कि भारत लौटने पर उसे खालिस्तान समर्थक बताकर निशाना बनाया जा सकता है लेकिन आरपीडी ने उसकी गवाही को अस्पष्ट और अविश्वसनीय करार दिया। न कोई प्राथमिकी, न जांच का रिकॉर्ड पेश नहीं किया गया। अदालत ने यह भी नोट किया कि वह बिना किसी दिक्कत के भारत से निकल गया था और उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई लंबित नहीं थी।
विज्ञापन
खालिस्तान समर्थक की प्रोफाइल भी झूठी निकली
गगनदीप ने कनाडा में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों का हवाला देकर अपने दावे को मजबूत करने की कोशिश की लेकिन उल्टा असर पड़ गया। उसके मूल दस्तावेजों में ऐसी कोई जानकारी नहीं थी। आरपीडी ने यह भी कहा कि खालिस्तान आंदोलन को लेकर उसकी समझ सतही थी इसलिए उसे असली समर्थक नहीं माना जा सकता। गगनदीप छात्र वीजा पर कनाडा गया था लेकिन न तो उसने पढ़ाई की और न ही 2018 के बाद किसी कोर्स में दाखिला लिया। शरण आवेदन में 4.5 साल की देरी ने उसके दावे को और कमजोर कर दिया।
विज्ञापन
विदेशी शरण में खालिस्तान कार्ड का दुरुपयोग
यह कोई पहला मामला नहीं है। अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में वर्षों से खालिस्तान कार्ड का इस्तेमाल कर शरण पाने की कोशिश की जाती रही है। हाल ही में 73 वर्षीय हरजीत कौर को अमेरिका से तीन दशक बाद भारत प्रत्यर्पित किया गया। वे भी खालिस्तान का हवाला देकर शरण लेना चाहती थीं लेकिन कानूनी विकल्प खत्म होने के बाद उन्हें वापस भेज दिया गया। कई बार ऐसे दावे पूरी तरह मनगढ़ंत होते हैं। स्वयं पूर्व सांसद सिमरनजीत सिंह मान भी पैसे लेकर करीब 50 हजार शरण समर्थक पत्र जारी करने का दावा कर चुके हैं।