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SC के फैसले से निराशा, हौसला नहीं हारे: किसान नेता बोले- बॉर्डरों पर डटे रहेंगे, एक अगस्त को करेंगे प्रदर्शन

Wed, 24 Jul 2024 08:06 PM IST
अंकेश ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटियाला Published by: अंकेश ठाकुर Updated Wed, 24 Jul 2024 08:06 PM IST
सार

मांगों को लेकर पंजाब-हरियाणा की सीमा पर डटे किसानों के लिए सुप्रीम कोर्ट का फैसला निराशाजनक रहा है, लेकिन किसान अभी भी बॉर्डर से हटने को तैयार नहीं हैं। किसान बॉर्डर खुलने तक डटे रहने की बात कह रहे हैं। 

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Farmer leader said disappointed with SC decision but stand firm on borders protest on 1st august
शंभू बॉर्डर पर किसान। - फोटो : फाइल

विस्तार

हरियाणा सरकार की ओर से दायर पटीशन पर सुप्रीम कोर्ट के बुधवार को दिए फैसले से बॉर्डरों पर डटे किसानों में मायूसी है। किसान नेताओं का कहना है कि आंदोलन करना मजबूरी है। ऐसा इसलिए कि केंद्र सरकार पहले किसान मोर्चे में मांगे मानने के बाद भी इन्हें लागू नहीं कर रही है। किसान जत्थेबंदियों का फैसला है कि पहले की तरह ही बॉर्डरों पर बैठे रहेंगे। बॉर्डर खुलने के बाद ही किसान दिल्ली के लिए कूच करेंगे। जत्थेबंदियां नहीं चाहती हैं कि आपसी टकराव में किसी का कोई नुकसान हो। 

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किसान नेताओं का कहना है कि एक अगस्त को देश भर में जिला हेडक्वार्टरों पर मार्च करके केंद्र सरकार के पुतले फूंके जाएंगे। किसानों पर हमले करने वाले पुलिस अधिकारियों को सम्मानित करने का विरोध किया जाएगा। साथ ही बजट के खिलाफ भी लोगों को जागरूक किया जाएगा। यह बजट किसान व मजदूर विरोधी है।
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भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी के प्रधान रणजीत सिंह सवाजपुर ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से एक स्वतंत्र कमेटी गठित करने की बात कही गई है। लेकिन यहां सवाल उठता है कि पहले किसान आंदोलन के वक्त भी एमएसपी व किसानों की अन्य मांगों संबंधी जरूरी बातें तय करने को एक कमेटी बनाई गई थी। बाद में यह मात्र औपचारिकता साबित हुई थी। ऐसे में अब नई समिति बनाए जाने वाली कमेटी किस तरह से काम करेगी, इस पर संशय है। जिस सरकार की ओर से किसानों पर हमले करने वाले पुलिस अधिकारियों को सम्मानित किया जा रहा है। उसके नुमाइंदे से किसानों के हित में फैसले लेने की उम्मीद कम ही है।            
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भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी के प्रदेश चेयरमैन सुरजीत सिंह फूल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से निराशा जरूर हुई है, लेकिन किसान हौसला नहीं हारे हैं। किसान पहले की तरह ही बॉर्डरों पर डटे रहेंगे और बॉर्डर खुलते ही दिल्ली के लिए कूच करेंगे। जत्थेबंदियों का रूख साफ है कि मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। फिर चाहे इसमें कितना ही समय क्यों न लग जाए। 


फूल ने कहा कि किसान दिल्ली कूच के लिए फरवरी में चले थे, लेकिन केंद्र की शह पर हरियाणा ने सात लेयर की बैरिकेडिंग करके उन्हें रोक लिया। इसके बाद किसानों के खिलाफ ही गलत प्रचार किया गया कि उनकी वजह से अंबाला व पंजाब के व्यापारियों का नुकसान हो रहा है। आम लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। हरियाणा सरकार की ओर से हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में डाली पटीशन से साफ हो गया है कि रास्ते किसानों ने नहीं रोके हैं। 

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