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जीवन संध्या प्रोग्राम में बच्चों मन मोहा
ब्यूरो, अमर उजाला, पटियाला
Updated Sat, 24 Dec 2016 03:09 PM IST
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पटियाला के डीएवी पब्लिक स्कूल में आयोजित जीवन संध्या कार्यक्रम में कोरियोग्राफी पेश करते छोटे बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला
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दादा-दादी, नाना-नानी एक बड़े विशाल बरगद के पेड की तरह होते हैं, जिनकी ममता की छांव में उनके बच्चे जिंदगियों की सभी चिंताओं और दुखों से राहत महसूस करते हैं। यह विचार डीएवी पब्लिक स्कूल के प्रिंसिपल एसआर प्रभाकर ने स्कूल की ओर से हरपाल टिवाना सेंटर में जीवन संध्या शीर्षक के अंर्तगत आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। इस मौके पर नर्सरी, एलकेजी और यूकेजी के होनहार स्टूडेंट्स को मेडल देकर सम्मानित किया गया।
इस समारोह का मुख्य आकर्षण का केंद्र बच्चों की ओर से पेश कार्यक्रम रहे। इनको सभी ने काफी पसंद किया। कार्यक्रम के मुख्य मेहमान जाने-माने लेखक कुलवंत सिंह रहे। उनके साथ सरोज प्रभाकर, डा. रमेश पुरी विशेष तौर से मौजूद रहे। सबसे पहले यूकेजी के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने ईश्वर स्तुति की। इसके बाद नर्सरी के बच्चों ने सुनो बच्चो उठाओ बस्ता गीत पर कोरियोग्राफी की।
एलकेजी के बच्चों ने जग घुम्या, थारे जैसा न कोई गीत पर कोरियोग्राफी करके दादा-दादी, नाना-नानी को याद किया। इस मौके पर यूकेजी के बच्चों द्वारा पेश नाटक कहानी घर-घर की सभी की आंखें नम कर दी।
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स्कूल के बच्चों के दादा-दादी, नाना-नानी ने अंताक्षरी में भाग लेकर गायन के क्षेत्र में अपनी कला दिखाई। दादा-दादी और नाना-नानी के लिए फन गेम्स रखे गए जिनमें उन्होंने अपनी उम्र भुलाकर बड़े जोशो-खरोश से इसमें भाग लिया।
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इस समारोह का मुख्य आकर्षण का केंद्र बच्चों की ओर से पेश कार्यक्रम रहे। इनको सभी ने काफी पसंद किया। कार्यक्रम के मुख्य मेहमान जाने-माने लेखक कुलवंत सिंह रहे। उनके साथ सरोज प्रभाकर, डा. रमेश पुरी विशेष तौर से मौजूद रहे। सबसे पहले यूकेजी के नन्हे-मुन्ने बच्चों ने ईश्वर स्तुति की। इसके बाद नर्सरी के बच्चों ने सुनो बच्चो उठाओ बस्ता गीत पर कोरियोग्राफी की।
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एलकेजी के बच्चों ने जग घुम्या, थारे जैसा न कोई गीत पर कोरियोग्राफी करके दादा-दादी, नाना-नानी को याद किया। इस मौके पर यूकेजी के बच्चों द्वारा पेश नाटक कहानी घर-घर की सभी की आंखें नम कर दी।
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स्कूल के बच्चों के दादा-दादी, नाना-नानी ने अंताक्षरी में भाग लेकर गायन के क्षेत्र में अपनी कला दिखाई। दादा-दादी और नाना-नानी के लिए फन गेम्स रखे गए जिनमें उन्होंने अपनी उम्र भुलाकर बड़े जोशो-खरोश से इसमें भाग लिया।