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रेल डिवीजन फिरोजपुर में 6.09 करोड़ रुपये का घोटाला
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर
Updated Sun, 28 Jun 2015 09:51 PM IST
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रेल डिवीजन फिरोजपुर में विज्ञापन के लिए जालंधर, लुधियाना व अमृतसर रेलवे स्टेशनों के नजदीक जगह अलाट कराने में हुए 6.09 करोड़ रुपये के घोटाले में संलिप्त एक विज्ञापन एजेंसी ने 84 लाख रुपये का चेक रेल मंडल कार्यालय फिरोजपुर को दिया है।
घोटाले में तत्कालीन डीसीएम पीसी डूडी समेत पांच अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई ने मामला दर्ज किया था। इस मामले की सीबीआई जांच चल रही है। इस घोटाले में संलिप्त एक कर्मी पिछले कई दिनों से ड्यूटी से गैरहाजिर चल रहा है।
विभागीय सूत्रों के मुताबिक उक्त घोटाले में फंसी एक विज्ञापन एजेंसी ने रेलवे को 84 लाख रुपये का चेक दिया है। लेकिन उक्त एजेंसी धनराशि देने से सजा से नहीं बच सकेगी, ऐसा कानून के माहिरों का कहना है। सीबीआई इस मामले की गहनता से जांच-पड़ताल कर रही है कि इस घोटाले को अंजाम देने वाले और कितने लोग थे।
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सीबीआई ने अपनी जांच-पड़ताल में रेल मंडल कार्यालय की लेखा विभाग के एक अधिकारी की भी संलिप्तता पाई है, क्योंकि उसने दस्तावेज देखे बिना सिक्योरिटी आरोपी एजेंसियों को जारी की थी। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई इस मामले में और भी रेल अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ मामले दर्ज करेगी।
उक्त घोटाले में फंसे कामर्शियल विभाग के कई ऐसे अधिकारी व मुलाजिम हैं जिन्होंने अपनी आय से अधिक संपत्ति बनाई है। जानकारों का कहना है कि सीबीआई अपनी जांच में कई जाली मुहरें और दस्तावेज बरामद कर चुकी है। सीबीआई ने सौ से अधिक रेलकर्मियों की सूची तैयार की है जिनके माध्यम से ये घोटाला हुआ है।
रेल मंडल कार्यालय के डिस्पैच विभाग से एक रजिस्टर भी गायब है, जो अभी तक नहीं मिला है। सीबीआई ने डिस्पैच विभाग के मुलाजिमों को चंडीगढ़ बुलाकर उनसे गहन पूछताछ भी की थी। रजिस्टर नहीं मिलने पर उनकी नौकरी को भी खतरा हो सकता है।
विज्ञापन एजेंसियों को जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, जम्मू तवी-कश्मीर रेलवे स्टेशन पर विज्ञापन एजेंसियों को विज्ञापन के लिए जगह अलाट की थी और कुछेक ट्रेनें भी विज्ञापन के लिए अलाट की थी।
आरोपियों ने एजेंसियों से मिलकर 6.09 करोड़ रुपये का घोटाला किया था। एजेंसियों का समय पूरा होने के बाद भी कई महीनों तक उन्हें विज्ञापन लगाने की अनुमति दी लेकिन उनसे पैसा नहीं वसूला और अपनी जेब गर्म करते रहे।
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घोटाले में तत्कालीन डीसीएम पीसी डूडी समेत पांच अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई ने मामला दर्ज किया था। इस मामले की सीबीआई जांच चल रही है। इस घोटाले में संलिप्त एक कर्मी पिछले कई दिनों से ड्यूटी से गैरहाजिर चल रहा है।
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विभागीय सूत्रों के मुताबिक उक्त घोटाले में फंसी एक विज्ञापन एजेंसी ने रेलवे को 84 लाख रुपये का चेक दिया है। लेकिन उक्त एजेंसी धनराशि देने से सजा से नहीं बच सकेगी, ऐसा कानून के माहिरों का कहना है। सीबीआई इस मामले की गहनता से जांच-पड़ताल कर रही है कि इस घोटाले को अंजाम देने वाले और कितने लोग थे।
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सीबीआई ने अपनी जांच-पड़ताल में रेल मंडल कार्यालय की लेखा विभाग के एक अधिकारी की भी संलिप्तता पाई है, क्योंकि उसने दस्तावेज देखे बिना सिक्योरिटी आरोपी एजेंसियों को जारी की थी। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई इस मामले में और भी रेल अधिकारियों व कर्मियों के खिलाफ मामले दर्ज करेगी।
उक्त घोटाले में फंसे कामर्शियल विभाग के कई ऐसे अधिकारी व मुलाजिम हैं जिन्होंने अपनी आय से अधिक संपत्ति बनाई है। जानकारों का कहना है कि सीबीआई अपनी जांच में कई जाली मुहरें और दस्तावेज बरामद कर चुकी है। सीबीआई ने सौ से अधिक रेलकर्मियों की सूची तैयार की है जिनके माध्यम से ये घोटाला हुआ है।
रेल मंडल कार्यालय के डिस्पैच विभाग से एक रजिस्टर भी गायब है, जो अभी तक नहीं मिला है। सीबीआई ने डिस्पैच विभाग के मुलाजिमों को चंडीगढ़ बुलाकर उनसे गहन पूछताछ भी की थी। रजिस्टर नहीं मिलने पर उनकी नौकरी को भी खतरा हो सकता है।
विज्ञापन एजेंसियों को जालंधर, लुधियाना, अमृतसर, जम्मू तवी-कश्मीर रेलवे स्टेशन पर विज्ञापन एजेंसियों को विज्ञापन के लिए जगह अलाट की थी और कुछेक ट्रेनें भी विज्ञापन के लिए अलाट की थी।
आरोपियों ने एजेंसियों से मिलकर 6.09 करोड़ रुपये का घोटाला किया था। एजेंसियों का समय पूरा होने के बाद भी कई महीनों तक उन्हें विज्ञापन लगाने की अनुमति दी लेकिन उनसे पैसा नहीं वसूला और अपनी जेब गर्म करते रहे।