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पता नहीं था इस बार नए साल की बधाई आखिरी होगी : मधु
ब्यूरो/अमर उजाला, पठानकोट
Updated Mon, 11 Jan 2016 09:50 PM IST
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पठानकोट एयरबेस पर हुए आतंकी हमले को हुए बेशक एक सप्ताह से अधिक समय हो चुका है, लेकिन इस हमले का दर्द व भयानक मंजर आज भी उस हमले में शहादत का जाम पीने वाले गांव झंडा गुज्जरां निवासी कैप्टन फतेह सिंह की बेटी मधुराधा ठाकुर की आंखों में साफ देखने को मिला।
वह तारागढ़ के सरकारी स्कूल में 1996 में पुलवामा में शहीद हुए लेफ्टिनेंट गुरदीप सलारिया के श्रद्धांजलि समारोह में भाग लेने आई थीं। उस हमले को याद कर मधु आज भी सिहर उठती हैं। मधु ने नम आंखों से कहा कि जहां हमें पापा के जाने का गम है वहीं गर्व भी है कि उन्होंने अपना बलिदान दे कर एयरबेस में मौजूद हजारों लोगों के प्राणों को बचा लिया।
उसने पत्रकारों को बताया कि नववर्ष का पहला दिन आज भी उसे याद है, जब उसके पापा ने सुबह उसे नववर्ष की बधाई दी, लेकिन उस समय कदापि यह अहसास नहीं था कि नववर्ष की वह बधाई हमारे परिवार के लिए आखिरी होगी। उसने कहा कि उस रात दो बजे जब पापा ड्यूटी गए तो हम सब को जगाकर हमें अपार स्नेह की नजरों से देखते हुए कहने लगे कि कल छुट्टी लेकर मैं आपको मऊ (मध्य प्रदेश) छोड़ आऊंगा।
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वहां से कुछ दिन पहले मैं अपनी माता शोभा ठाकुर व भाई नीतिन के साथ छुट्टियां काटने आई थी। मगर पापा के ड्यूटी जाने के एक घंटे बाद ही गोलियों की आवाज से सारा एयरबेस दहल उठा। अचानक उस हमले से हम घबरा उठे तथा लाइट बंद करके बेड के नीचे छुप गए।
बम के धमाकों से हमारे क्वार्टर की खिड़कियों के शीशे भी टूट गए। 2 जनवरी शाम 6 बजे हमें पता चला कि पापा को गोली लगी है तथा वह मिलिट्री अस्पताल में उपचाराधीन हैं। हमें विश्वास नहीं हुआ, क्योंकि मेरे पापा राष्ट्र स्तर के शूटर थे और दुश्मन को पहली गोली में ही धराशायी करने का मादा रखते थे तथा उन्होंने ऐसा ही किया।
मधुराधा ने बताया जब एक आतंकी ने मेरे पापा के एक साथी को घायल कर दिया तो उन्होंने अपने उसी साथी की बंदूक लेकर एक आतंकी को मार गिराया। मगर दूसरे आतंकी ने छिपते हुए मेरे पापा पर हमला कर दिया, जिससे वे शहीद हो गए।
हम दो दिन क्वार्टर में ही भूखे प्यासे छिपे रहे। इसके बाद हमले के चलते ही हमारे पड़ोसी इंस्पेक्टर सुरिंदर सिंह हमें अपने क्वार्टर में ले गए तथा 3 तारीख को हमें गांव भेज दिया गया। उसी दिन शाम को हमें पता चला कि मेरे पापा देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए हैं।
‘पापा का सपना साकार जरूरी करूंगी’
मधु ने कहा कि उसके पापा उसको अफसर बनना देखना चाहते थे। मैं अवश्य उनका सपना साकार करूंगी। इस अवसर पर शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंद्र सिंह विक्की ने कहा कि मधु जैसी बेटी पर सारे देश को नाज है जिसने अपने शहीद पिता की अर्थी को कंधा देकर देश की बाकी बेटियों को भी अपनी बहादुरी का एहसास दिलाया है। इस अवसर पर शहीद कैप्टन फतेह सिंह के भाई सुरजीत सिंह भी उपस्थित थे।
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वह तारागढ़ के सरकारी स्कूल में 1996 में पुलवामा में शहीद हुए लेफ्टिनेंट गुरदीप सलारिया के श्रद्धांजलि समारोह में भाग लेने आई थीं। उस हमले को याद कर मधु आज भी सिहर उठती हैं। मधु ने नम आंखों से कहा कि जहां हमें पापा के जाने का गम है वहीं गर्व भी है कि उन्होंने अपना बलिदान दे कर एयरबेस में मौजूद हजारों लोगों के प्राणों को बचा लिया।
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उसने पत्रकारों को बताया कि नववर्ष का पहला दिन आज भी उसे याद है, जब उसके पापा ने सुबह उसे नववर्ष की बधाई दी, लेकिन उस समय कदापि यह अहसास नहीं था कि नववर्ष की वह बधाई हमारे परिवार के लिए आखिरी होगी। उसने कहा कि उस रात दो बजे जब पापा ड्यूटी गए तो हम सब को जगाकर हमें अपार स्नेह की नजरों से देखते हुए कहने लगे कि कल छुट्टी लेकर मैं आपको मऊ (मध्य प्रदेश) छोड़ आऊंगा।
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वहां से कुछ दिन पहले मैं अपनी माता शोभा ठाकुर व भाई नीतिन के साथ छुट्टियां काटने आई थी। मगर पापा के ड्यूटी जाने के एक घंटे बाद ही गोलियों की आवाज से सारा एयरबेस दहल उठा। अचानक उस हमले से हम घबरा उठे तथा लाइट बंद करके बेड के नीचे छुप गए।
बम के धमाकों से हमारे क्वार्टर की खिड़कियों के शीशे भी टूट गए। 2 जनवरी शाम 6 बजे हमें पता चला कि पापा को गोली लगी है तथा वह मिलिट्री अस्पताल में उपचाराधीन हैं। हमें विश्वास नहीं हुआ, क्योंकि मेरे पापा राष्ट्र स्तर के शूटर थे और दुश्मन को पहली गोली में ही धराशायी करने का मादा रखते थे तथा उन्होंने ऐसा ही किया।
मधुराधा ने बताया जब एक आतंकी ने मेरे पापा के एक साथी को घायल कर दिया तो उन्होंने अपने उसी साथी की बंदूक लेकर एक आतंकी को मार गिराया। मगर दूसरे आतंकी ने छिपते हुए मेरे पापा पर हमला कर दिया, जिससे वे शहीद हो गए।
हम दो दिन क्वार्टर में ही भूखे प्यासे छिपे रहे। इसके बाद हमले के चलते ही हमारे पड़ोसी इंस्पेक्टर सुरिंदर सिंह हमें अपने क्वार्टर में ले गए तथा 3 तारीख को हमें गांव भेज दिया गया। उसी दिन शाम को हमें पता चला कि मेरे पापा देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए हैं।
‘पापा का सपना साकार जरूरी करूंगी’
मधु ने कहा कि उसके पापा उसको अफसर बनना देखना चाहते थे। मैं अवश्य उनका सपना साकार करूंगी। इस अवसर पर शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंद्र सिंह विक्की ने कहा कि मधु जैसी बेटी पर सारे देश को नाज है जिसने अपने शहीद पिता की अर्थी को कंधा देकर देश की बाकी बेटियों को भी अपनी बहादुरी का एहसास दिलाया है। इस अवसर पर शहीद कैप्टन फतेह सिंह के भाई सुरजीत सिंह भी उपस्थित थे।