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शरीर से पहले आत्मा की शुद्धि जरूरी

Sun, 27 Oct 2013 10:19 PM IST
पठानकोट
पठानकोट Updated Sun, 27 Oct 2013 10:19 PM IST
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Necessary purification of the soul before the body
दिव्य ज्योति जागृति संस्थान की ओर से रामलीला ग्राउंड में करवाए जा रहे सात दिवसीय राम कथामृत के आखिरी दिन शनिवार को साध्वी श्रेया भारती ने श्रद्धालुओं को भक्त हनुमान की गाथा सुनाई। साध्वी ने कहा कि इंसान का जीवन नदी की भांति है।
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नदी के मार्ग में चट्टानें आती हैं, पत्थर आते हैं और इसके साथ ओर भी अनेक बाधाएं आती हैं, लेकिन नदी उनकी परवाह न करती हुई आगे बढ़ती जाती है। इसी प्रकार ही अनेक बाधाओं को पार करते हुए माता सीता की खोज में हनुमान लंका के लिए प्रस्थान करते हैं, जो लंका बाहर से देखने पर सुंदर प्रतीत होती है, वहां भीतर पापाचार अनाचार हो रहा है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति बाहर से अपने शरीर को सजा संवार कर रखता है, लेकिन अपनी आत्मा का कल्याण नहीं करता, तो उसका शरीर भी लंका की भांति है।
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साध्वी ने बताया कि ईश्वरीय अनुभूति को दिव्य ज्योति जागृति संस्थान ब्रह्मज्ञान के द्वारा करवाता है। ब्रह्मज्ञान के आधार पर ही परम पूज्य आशुतोष महाराज युवा वर्ग को सही मार्ग दिखा रहे हैं। अंत में प्रभु की आरती के साथ कथा समागम को संपन्न किया गया। इस मौके पर एसके पुंज, अश्वनी शर्मा, विजय कुमार, पुष्कर राज, सतीश महिंदर, नरेश अरोड़ा मौजूद रहे।
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