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ग्यारह साल से बंद ट्रैफिक लाइटें
पठानकोट
Updated Sat, 09 Nov 2013 10:35 PM IST
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शहर के सबसे व्यस्त चौक लाइटों वाला चौक में ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारु ढंग से चलाने के लिए प्रशासन ने इस चौक पर लाखों रुपये खर्च कर सिग्नल लाइटें लगाई थीं लेकिन ये लाइटें कुछ समय बाद ही खराब हो गईं। प्रशासन ने अब तक इन लाइटों को ठीक नहीं करवाया है। चौक पर सिग्नल लाइटें खराब होने से हर समय जाम की स्थिति बनी रहती है। साथ ही हादसों का भी डर बना रहता है।
अब तो इन ट्रैफिक लाइटों के पोल भी उखड़ने शुरू हो गए हैं। पिछले दिनों ट्रैफिक लाइट का एक पोल उखड़ कर बीच सड़क में आ गिरा, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई थी। प्रशासन ने लगभग 12 वर्ष पहले इन लाइटोें को शहर के इस चौक पर लगवाया था, ताकि ट्रैफिक को नियंत्रित किया जा सके। प्रशासन ने इन लाइटों के रख रखाव की जिम्मेदारी नगर सुधार ट्रस्ट को सौंप थी लेकिन ये लाइटें साल भर नहीं चल पाईं।
चारों ओर से ट्रैफिक का जमावड़ा
शहर का लाइटों वाला चौक सबसे व्यस्त चौक हैं, ढांगू रोड, ढाकी रोड, डलहोजी रोड तथा रेलवे रोड चारों ओर से आने वाली ट्रैफिक यहीं से होकर गुजरती है, वहीं इस चौक के पास शहर का अति व्यस्त बाजार गांधी चौक भी स्थित है जिसके चलते इस इलाके में काफी भीड़ रहती है। हालांकि, इस चौक में पुलिस प्रशासन ने ट्रैफिक कर्मचारियों को तैनात किया है, लेकिन सिग्नल लाइटें हों तो इस चौक में ट्रैफिक व्यवस्था पर काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
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तो जाम से मिल सकती है राहत
शहर के लाइटों वाला चौक में चारों ओर से ट्रैफिक का जमावड़ा होने के चलते इस चौक में जरा सा जाम लगते ही शहर पूरी तरह से थम जाता है। शहर के मेन प्वाइंट पर स्थित इस चौक में जाम को दोबारा बहाल करने में भी ट्रैफिक कर्मचारियों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है। यही नहीं, इस चौक से करीब तीन सौ मीटर की दूरी पर ढांगू रोड पर नैरोगेज रेलवे फाटक भी है और इस फाटक से रोजाना 14 ट्रेनें अप डाउन करती हैं। यानी कि 14 बार यह फाटक बंद होता है। वहीं, रेलवे रोड और डलहोजी रोड से आने वाले वाहनों को यदि रेड सिग्नल के जरिये पीछे ही रोक दिया जाए और फाटक खुलने के बाद वाहनों को चलाया जाए तो इस तीन सौ मीटर में लगने वाले जाम से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है, लेकिन रेलवे रोड और डलहोजी रोड से आने वाले वाहन पीछे रुकने के बजाय फाटक के पास आकर फाटक खुलने का इंतजार करते है जिससे पीछे जाम लग जाता है।
ट्रस्ट ठीक करवाएगा लाइटें
इस संबंध में नगर सुधार ट्रस्ट के कार्यकारी अधिकारी परमिंदर सिंह ने कहा कि ट्रैफिक लाइटों से यदि ट्रैफिक समस्या में सुधार होता है तो वह इन लाइटों को दोबारा शुरू करवाएंगे। जल्द ही इन लाइटों को ठीक करवाने का एस्टिमेट बनाया जाएगा।
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अब तो इन ट्रैफिक लाइटों के पोल भी उखड़ने शुरू हो गए हैं। पिछले दिनों ट्रैफिक लाइट का एक पोल उखड़ कर बीच सड़क में आ गिरा, जिससे ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई थी। प्रशासन ने लगभग 12 वर्ष पहले इन लाइटोें को शहर के इस चौक पर लगवाया था, ताकि ट्रैफिक को नियंत्रित किया जा सके। प्रशासन ने इन लाइटों के रख रखाव की जिम्मेदारी नगर सुधार ट्रस्ट को सौंप थी लेकिन ये लाइटें साल भर नहीं चल पाईं।
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चारों ओर से ट्रैफिक का जमावड़ा
शहर का लाइटों वाला चौक सबसे व्यस्त चौक हैं, ढांगू रोड, ढाकी रोड, डलहोजी रोड तथा रेलवे रोड चारों ओर से आने वाली ट्रैफिक यहीं से होकर गुजरती है, वहीं इस चौक के पास शहर का अति व्यस्त बाजार गांधी चौक भी स्थित है जिसके चलते इस इलाके में काफी भीड़ रहती है। हालांकि, इस चौक में पुलिस प्रशासन ने ट्रैफिक कर्मचारियों को तैनात किया है, लेकिन सिग्नल लाइटें हों तो इस चौक में ट्रैफिक व्यवस्था पर काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।
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तो जाम से मिल सकती है राहत
शहर के लाइटों वाला चौक में चारों ओर से ट्रैफिक का जमावड़ा होने के चलते इस चौक में जरा सा जाम लगते ही शहर पूरी तरह से थम जाता है। शहर के मेन प्वाइंट पर स्थित इस चौक में जाम को दोबारा बहाल करने में भी ट्रैफिक कर्मचारियों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है। यही नहीं, इस चौक से करीब तीन सौ मीटर की दूरी पर ढांगू रोड पर नैरोगेज रेलवे फाटक भी है और इस फाटक से रोजाना 14 ट्रेनें अप डाउन करती हैं। यानी कि 14 बार यह फाटक बंद होता है। वहीं, रेलवे रोड और डलहोजी रोड से आने वाले वाहनों को यदि रेड सिग्नल के जरिये पीछे ही रोक दिया जाए और फाटक खुलने के बाद वाहनों को चलाया जाए तो इस तीन सौ मीटर में लगने वाले जाम से काफी हद तक छुटकारा पाया जा सकता है, लेकिन रेलवे रोड और डलहोजी रोड से आने वाले वाहन पीछे रुकने के बजाय फाटक के पास आकर फाटक खुलने का इंतजार करते है जिससे पीछे जाम लग जाता है।
ट्रस्ट ठीक करवाएगा लाइटें
इस संबंध में नगर सुधार ट्रस्ट के कार्यकारी अधिकारी परमिंदर सिंह ने कहा कि ट्रैफिक लाइटों से यदि ट्रैफिक समस्या में सुधार होता है तो वह इन लाइटों को दोबारा शुरू करवाएंगे। जल्द ही इन लाइटों को ठीक करवाने का एस्टिमेट बनाया जाएगा।