फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Mohali News ›   The truth about ESI: Despite paying premiums for 10 years, he hasn't received 40,000 rupees for his operation

ईएसआई का सच : 10 साल प्रीमियम जमा करने के बावजूद ऑपरेशन के लिए नहीं मिले 40 हजार

Sun, 28 Sep 2025 03:09 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 28 Sep 2025 03:09 AM IST
विज्ञापन
The truth about ESI: Despite paying premiums for 10 years, he hasn't received 40,000 rupees for his operation
मोहाली। दस साल तक मेरे वेतन से ईएसआई का पैसा कटता रहा, लेकिन आज जब मुझे इलाज की जरूरत है, तो मुझे अस्पताल के चक्कर लगवाकर और 40 हजार रुपये मांगकर बाहर निकाल दिया गया। यह कहना है बलौंगी निवासी 44 वर्षीय निनकू का। वह इन दिनों ईएसआई स्वास्थ्य योजना की कार्यप्रणाली से आहत होकर बीमारी से तड़प रहा है। वह एक फैक्टरी में ऑपरेटर है। लगभग एक महीने पहले उन्हें फिस्टुला इन एनो (भगंदर) की समस्या हुई। 28 अगस्त को उन्हें ईएसआई अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें सिविल अस्पताल फेज-6 भेज दिया गया। सिविल अस्पताल में कुछ दिन इलाज चला और डॉक्टरों ने सर्जरी की। घाव में पस पड़ने की वजह से उनको इंडस अस्पताल भेजा गया।
विज्ञापन



सर्जरी के बाद शुरू हुआ दर्द का नया दौर
निनकू की पत्नी संगीता बताती हैं कि जब पट्टियां खोली गईं तो पता चला कि अंदर ही अंदर पस जमा हो गया है। पस तेजी से बह रहा था। डॉक्टर ने कहा कि जख्म सूख जाएगा, लेकिन पस आना बंद ही नहीं हुआ। हर समय कपड़े खराब होते हैं, बदबू आती है और दर्द बना रहता है। इसके बाद उन्हें इंडस अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां आठ दिन इलाज चला। संगीता बताती हैं कि अस्पताल वालों ने कहा कि दोबारा ऑपरेशन जरूरी है। इसके लिए उन्होंने 40 हजार रुपये मांगे या फिर ईएसआई की लिखित मंजूरी। दो दिन तक ईएसआई दफ्तर के चक्कर लगाते रहे, लेकिन मंजूरी नहीं मिली। आखिरकार 27 सितंबर को निनकू को बिना ऑपरेशन के ही डिस्चार्ज कर दिया गया। अब वह घर पर हैं और उनकी हालत लगातार बिगड़ रही है।
विज्ञापन



मोहाली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने उठाए सवाल
मोहाली इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के श्रम कानून समिति के चेयरमैन जसबीर सिंह ने इस मामले पर गंभीर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि मोहाली की इंडस्ट्रीज हर महीने ईएसआई को लगभग 10 करोड़ रुपये का योगदान देती हैं, लेकिन जब कर्मचारियों को जरूरत पड़ती है, तो उन्हें ऐसी घटिया सुविधाएं मिलती हैं। निनकू का मामला सिस्टम की विफलता को उजागर करता है। हम उन्हें तुरंत उचित इलाज दिलवाने के लिए प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन



निनकू का परिवार अब न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। उनकी पत्नी का सवाल है कि अगर ईएसआई से इलाज नहीं मिलेगा, तो इतना पैसा काटने का क्या मतलब है? क्या गरीब मजदूरों के स्वास्थ्य के साथ इस तरह का खिलवाड़ जायज है? यह मामला सवाल उठाता है कि क्या ईएसआई योजना वास्तव में कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षा कवच है या फिर केवल कागजी दिखावा?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed