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पति को दिया जिंदगी का तोहफा
अमर उजाला, मोहाली
Updated Wed, 23 Oct 2013 01:43 AM IST
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करवाचौथ के दिन महिलाएं पति की लंबी आयु की कामना करते हुए कठिन व्रत रखती हैं। पर, हिमाचल प्रदेश की एक महिला ने पति को इस पवित्र दिन उसकी जिंदगी तोहफे में दी। किडनी खराब होने के बाद जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे पति को किडनी देकर महिला ने मिसाल कायम की। आईवी अस्पताल में करवाचौथ के दिन ही मरीज का सफल किडनी ट्रांसप्लांट हुआ। पति-पत्नी दोनों स्वस्थ हैं।
ऊना, हिमाचल प्रदेश के रहने वाले जगदीश राम की दोनों किडनी खराब हो चुकी थीं। पिछले दो महीनों से वह डायलेसिस पर चल रहे थे। डायलेसिस पर जिंदगी का सफर बहुत लंबा नहीं हो सकता था, यह बात उनके परिजनों को भी पता थी। जगदीश राम की जिंदगी बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प था।
ऐसे में जगदीश राम की मदद के लिए आगे आईं उनकी अर्धांगिनी ऊषा देवी। आईवी अस्पताल की किडनी विशेषज्ञ डॉ. राका कौशल और रीनल ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. अविनाश श्रीवास्तव ने ऊषा देवी को मरीज की सारी स्थिति के बारे में बताया। उन्हें यह भी बताया गया कि किडनी ट्रांसप्लांट से ही जगदीश राम की जान बचाई जा सकती है। इतना सुनते ही ऊषा देवी ने कहा कि उनके पति की जान बचाने के लिए डॉक्टर उनकी किडनी ले सकते हैं।
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इसके बाद डॉक्टरों ने किडनी मैचिंग के टेस्ट किए। जिनसे इस बात की पुष्टि हो गई कि जगदीश राम को ऊषा देवी की किडनी लगाई जा सकती है। उन्होंने यह अच्छी खबर जब ऊषा देवी को सुनाई तो उन्होंने एक इच्छा जताई, जिसे सुन कर डॉक्टर भी हैरान रह गए।
ऊषा देवी ने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी करवाचौथ के दिन होनी चाहिए। भावुक होते हुए ऊषा देवी ने कहा कि वह पिछले बीस साल से करवाचौथ का व्रत रख कर पति की लंबी आयु की कामना करती आ रही हैं। इस पवित्र दिन ही यह जटिल ऑपरेशन होना चाहिए।
डॉक्टरों ने इस पर सहमति जता दी और अस्पताल के इतिहास में करवाचौथ के दिन यह पहला किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन हुआ, जो सफल रहा। डॉ. कौशल ने बताया कि उनके कैरिअर का यह अनोखा केस था। करवाचौथ पर पति को जीवन दान देने से बड़ा उपहार कोई नहीं हो सकता।
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ऊना, हिमाचल प्रदेश के रहने वाले जगदीश राम की दोनों किडनी खराब हो चुकी थीं। पिछले दो महीनों से वह डायलेसिस पर चल रहे थे। डायलेसिस पर जिंदगी का सफर बहुत लंबा नहीं हो सकता था, यह बात उनके परिजनों को भी पता थी। जगदीश राम की जिंदगी बचाने के लिए किडनी ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प था।
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ऐसे में जगदीश राम की मदद के लिए आगे आईं उनकी अर्धांगिनी ऊषा देवी। आईवी अस्पताल की किडनी विशेषज्ञ डॉ. राका कौशल और रीनल ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. अविनाश श्रीवास्तव ने ऊषा देवी को मरीज की सारी स्थिति के बारे में बताया। उन्हें यह भी बताया गया कि किडनी ट्रांसप्लांट से ही जगदीश राम की जान बचाई जा सकती है। इतना सुनते ही ऊषा देवी ने कहा कि उनके पति की जान बचाने के लिए डॉक्टर उनकी किडनी ले सकते हैं।
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इसके बाद डॉक्टरों ने किडनी मैचिंग के टेस्ट किए। जिनसे इस बात की पुष्टि हो गई कि जगदीश राम को ऊषा देवी की किडनी लगाई जा सकती है। उन्होंने यह अच्छी खबर जब ऊषा देवी को सुनाई तो उन्होंने एक इच्छा जताई, जिसे सुन कर डॉक्टर भी हैरान रह गए।
ऊषा देवी ने कहा कि किडनी ट्रांसप्लांट सर्जरी करवाचौथ के दिन होनी चाहिए। भावुक होते हुए ऊषा देवी ने कहा कि वह पिछले बीस साल से करवाचौथ का व्रत रख कर पति की लंबी आयु की कामना करती आ रही हैं। इस पवित्र दिन ही यह जटिल ऑपरेशन होना चाहिए।
डॉक्टरों ने इस पर सहमति जता दी और अस्पताल के इतिहास में करवाचौथ के दिन यह पहला किडनी ट्रांसप्लांट ऑपरेशन हुआ, जो सफल रहा। डॉ. कौशल ने बताया कि उनके कैरिअर का यह अनोखा केस था। करवाचौथ पर पति को जीवन दान देने से बड़ा उपहार कोई नहीं हो सकता।