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Mohali News: 25 लाख का पत्थर, 4700 बोरी सीमेंट और पाैने आठ लाख के सरिये से बनाया डैम दो साल में टूटा

Thu, 21 Aug 2025 01:53 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 21 Aug 2025 01:53 AM IST
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The dam built with stones worth 25 lakhs, 4700 bags of cement and iron rods worth 8 lakhs broke down in two years
मोरनी। धचोई ठंडोग डैम की हकीकत अब पूरी तरह सामने आ रही है। 88 लाख रुपये की लागत से बने इस डैम का एक हिस्सा मंगलवार को फिर टूटकर ढह गया। इससे पहले भी करीब दस दिन पहले डैम का एक हिस्सा टूटा था, जिसे वन विभाग ने जल्दबाजी में मरम्मत करवा दिया था। ग्रामीणों का कहना है कि डैम का निर्माण शुरू से ही गोलमाल और लापरवाही का शिकार रहा है। आधा दर्जन से ज्यादा ग्रामीणों ने वन विभाग पर घोटाले का आरोप लगाते हुए गोलमाल करने के आरोप भी लगाए है। इस मामले में शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो, हरियाणा को भी दी गई है जिस पर जांच जारी है। लेकिन जांच सैंपल की रिपोर्ट में आने में होने वाली देरी ग्रामीणों को अखरने लगी है। कहना है कि एंटी करप्शन तो अपना काम कर रही है, वन विभाग के उच्च अधिकारियों की चुप्पी किसी और इशारा कर रही है।
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आरटीआई से खुला कच्चा चिट्ठा
आरटीआई में खुलासा हुआ कि डैम बनाने में 4700 बोरी सीमेंट, 25 लाख का पंजाब से खरीदा गया पत्थर, पाैने आठ लाख का सरिया और 12 लाख रुपये से अधिक की रेत दिखायी गई है। भारी-भरकम 88 लाख के खर्च के बावजूद डैम दो साल भी नहीं टिक पाया। साल 2023-24 में तैयार हुए इस डैम में 2024 के मानसून से ही पानी रिसने लगा था। वन विभाग ने उस समय मरम्मत और पैबंद लगाकर मामला दबाने की कोशिश की, लेकिन 2025 की बारिश ने सारा भ्रष्टाचार उजागर कर दिया।
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ग्रामीणों का आरोप-डैम नहीं, भ्रष्टाचार का स्मारक
गांव के शिकायतकर्ता खुशहाल सिंह, हरीश, भूपेंद्र सिंह समेत अन्य ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जब लाखों का सरिया, सीमेंट और पत्थर लगा तो फिर डैम इतनी जल्दी क्यों ढह गया? ग्रामीणों के अनुसार डैम बनने के बाद कभी पानी से भरा ही नहीं रहा। जड़ों से पानी रिसता रहा और इसका असली उद्देश्य अधूरा रह गया।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग विकास के नाम पर भ्रष्टाचार का खेल खेल रहा है। हर योजना में धांधली और सेटिंग से जनता का भरोसा टूटता जा रहा है।
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जीरो टॉलरेंस नीति पर उठे सवाल

वन विभाग की इस कार्यशैली पर अब गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग न तो खुद जांच करता है और न ही जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई होती है। मजबूरन लोगों को एंटी करप्शन विभाग का सहारा लेना पड़ा। लोगों का आरोप है कि वन विभाग हरियाणा सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को ठेंगा दिखा रहा है। भ्रष्टाचारियों पर न कार्रवाई हो रही है, न जवाबदेही तय की जा रही है।
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