{"_id":"65bf9ae32e8ba6954f004cf7","slug":"take-care-of-yourself-during-pregnancy-dr-nisha-mohali-news-c-71-1-mli1003-111176-2024-02-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"गर्भावस्था में रखें खुद का ख्याल : डॉ. निशा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गर्भावस्था में रखें खुद का ख्याल : डॉ. निशा
विज्ञापन
डॉक्टर बोले- कोताही बरती तो झेलने पड़ सकते हैं गंभीर परिणाम
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। मां बनना जिंदगी बदलने वाला अनुभव होता है। यह बहुत अच्छा भी हो सकता है और बहुत बुरा भी। निर्भर करता है कि आप अपना कितना ख्याल रखते हैं। अगर आप मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक तौर मजबूत होंगे तभी बच्चा स्वस्थ और खुशहाल होगा। अगर आप खुद का ठीक से ख्याल नहीं रखेंगे तो इसका असर आपके बच्चे पर पड़ता है। यह कहना है फेज-6 स्थित एम्स अस्पताल के जच्चा-बच्चा वॉर्ड की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निशा भगत का।
डॉ. निशा भगत ने बताया कि गर्भावस्था के पहले और बाद में मां के शरीर में कई बदलाव आते हैं। ये बदलाव स्वभाविक हैं। बाद के दिनों में पीठ दर्द, वजन बढ़ना और फ्लुइड के ज्यादा होने जैसे शारीरिक बदलाव महसूस होंगे। ऐसे लक्षण से परेशानी तो होती है, लेकिन ये आम हैं और बच्चे के जन्म के बाद या कुछ दिन बाद ठीक हो जाते हैं।
कोताही बरतना पड़ सकता है भारी
अगर मां पर्याप्त पोषण न ले तो बच्चे के साथ-साथ मां को कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं। बच्चा भी कमजोर या समय से पहले पैदा हो सकता है। गर्भपात हो सकता है। बीपी, मधुमेह जैसी बीमारियां हो सकती हैं। मां की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान शरीर के हर अंग में बदलाव आते हैं, जैसे सर्क्यूलेटिरी, रेस्पिरेटरी, ब्लड सर्कुलेशन, किडनी, लीवर आदि। क्योंकि शरीर नए अंग को ग्रहण करने के लिए तैयार हो रहा होता है। उस नए अंग को ब्लड, मांस आदि चाहिए होता है। उसे उपलब्ध करवाने के लिए शरीर अपने हर अंग के उत्पादन को बढ़ा देता है।
विज्ञापन
स्ट्रेच मार्क्स क्यों होते हैं?
डॉ. निशा भगत बतातीं है कि गर्भावस्था के दौरान शरीर की मांसपेशियां खिचतीं हैं, जिससे स्ट्रेच मार्क्स होते हैं। एक बार स्ट्रेच मार्क्स हो जाएं तो ठीक करना मुश्किल होता है। कुछ तेल बाजार में उपलब्ध है जैसे बायो ऑयल, जिससे गर्भावस्था के दौरान मसाज कर आप इन्हें काफी हद तक कम कर सकते हैं।
कैसे रखें अपना ख्याल
शारीरिक-
1. आहार में पर्याप्त पोषण लें जैसे विटामिन्स, माइक्रो न्यूट्रिएंट्स, आयरन बेहद जरूरी है। जरूरत के मुताबिक 300 कैलरी ज्यादा लें।
2. 10-15 ग्राम प्रोटीन अधिक लें
3. पर्याप्त नींद लें
4. रोज प्राणायाम करें
5. हल्का व्यायाम करें
मानसिक- 1. अपने आस-पास का माहौल ख़ुशनुमा रखें
2. किसी तरह का स्ट्रेस न लें
3. अच्छी किताबें पढ़ें
4. अपनी सभी इंद्रियों से सिर्फ़ साकारात्मक चीज़ें ही ग्रहण करें
भावनात्मक-
1. खुश रहें
2. मोटिवेटिड रहें
3. गुस्सा न करें
4. चिल्लाएं नहीं
5. मनपसंद काम करें
6. अच्छे वातावरण में समय बीताएं
समय के साथ बदला रहन-सहन
पहले महिलाएं ज़्यादातर शारीरिक गतिविधियां करती थी जिसकी वजह से वह काफ़ी मजबूत रहती थी। आजकल शारीरिक गतिविधियां महिलाएं बहुत कम करती है, क्योंकि बहुत सारे काम आसान हो गए है। इसके अलावा खानपान में भी बहुत से बदलाव हो गए हैं, पहले हमें शुद्ध खाने-पीने की चीज़ें मिलती थी लेकिन अब कई तरह की मिलावटी चीज़ें खाने को मिलती है। जिससे महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है और इसका असर आज की पीढ़ी में देखा जा सकता है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
मोहाली। मां बनना जिंदगी बदलने वाला अनुभव होता है। यह बहुत अच्छा भी हो सकता है और बहुत बुरा भी। निर्भर करता है कि आप अपना कितना ख्याल रखते हैं। अगर आप मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक तौर मजबूत होंगे तभी बच्चा स्वस्थ और खुशहाल होगा। अगर आप खुद का ठीक से ख्याल नहीं रखेंगे तो इसका असर आपके बच्चे पर पड़ता है। यह कहना है फेज-6 स्थित एम्स अस्पताल के जच्चा-बच्चा वॉर्ड की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निशा भगत का।
डॉ. निशा भगत ने बताया कि गर्भावस्था के पहले और बाद में मां के शरीर में कई बदलाव आते हैं। ये बदलाव स्वभाविक हैं। बाद के दिनों में पीठ दर्द, वजन बढ़ना और फ्लुइड के ज्यादा होने जैसे शारीरिक बदलाव महसूस होंगे। ऐसे लक्षण से परेशानी तो होती है, लेकिन ये आम हैं और बच्चे के जन्म के बाद या कुछ दिन बाद ठीक हो जाते हैं।
विज्ञापन
कोताही बरतना पड़ सकता है भारी
अगर मां पर्याप्त पोषण न ले तो बच्चे के साथ-साथ मां को कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं। बच्चा भी कमजोर या समय से पहले पैदा हो सकता है। गर्भपात हो सकता है। बीपी, मधुमेह जैसी बीमारियां हो सकती हैं। मां की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। गर्भावस्था के दौरान शरीर के हर अंग में बदलाव आते हैं, जैसे सर्क्यूलेटिरी, रेस्पिरेटरी, ब्लड सर्कुलेशन, किडनी, लीवर आदि। क्योंकि शरीर नए अंग को ग्रहण करने के लिए तैयार हो रहा होता है। उस नए अंग को ब्लड, मांस आदि चाहिए होता है। उसे उपलब्ध करवाने के लिए शरीर अपने हर अंग के उत्पादन को बढ़ा देता है।
विज्ञापन
स्ट्रेच मार्क्स क्यों होते हैं?
डॉ. निशा भगत बतातीं है कि गर्भावस्था के दौरान शरीर की मांसपेशियां खिचतीं हैं, जिससे स्ट्रेच मार्क्स होते हैं। एक बार स्ट्रेच मार्क्स हो जाएं तो ठीक करना मुश्किल होता है। कुछ तेल बाजार में उपलब्ध है जैसे बायो ऑयल, जिससे गर्भावस्था के दौरान मसाज कर आप इन्हें काफी हद तक कम कर सकते हैं।
कैसे रखें अपना ख्याल
शारीरिक-
1. आहार में पर्याप्त पोषण लें जैसे विटामिन्स, माइक्रो न्यूट्रिएंट्स, आयरन बेहद जरूरी है। जरूरत के मुताबिक 300 कैलरी ज्यादा लें।
2. 10-15 ग्राम प्रोटीन अधिक लें
3. पर्याप्त नींद लें
4. रोज प्राणायाम करें
5. हल्का व्यायाम करें
मानसिक- 1. अपने आस-पास का माहौल ख़ुशनुमा रखें
2. किसी तरह का स्ट्रेस न लें
3. अच्छी किताबें पढ़ें
4. अपनी सभी इंद्रियों से सिर्फ़ साकारात्मक चीज़ें ही ग्रहण करें
भावनात्मक-
1. खुश रहें
2. मोटिवेटिड रहें
3. गुस्सा न करें
4. चिल्लाएं नहीं
5. मनपसंद काम करें
6. अच्छे वातावरण में समय बीताएं
समय के साथ बदला रहन-सहन
पहले महिलाएं ज़्यादातर शारीरिक गतिविधियां करती थी जिसकी वजह से वह काफ़ी मजबूत रहती थी। आजकल शारीरिक गतिविधियां महिलाएं बहुत कम करती है, क्योंकि बहुत सारे काम आसान हो गए है। इसके अलावा खानपान में भी बहुत से बदलाव हो गए हैं, पहले हमें शुद्ध खाने-पीने की चीज़ें मिलती थी लेकिन अब कई तरह की मिलावटी चीज़ें खाने को मिलती है। जिससे महिलाओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित हो रही है और इसका असर आज की पीढ़ी में देखा जा सकता है।