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Mohali News: रेहड़ी-फड़ी का जाम होता नहीं आसान

Mon, 02 Jun 2025 01:43 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Mon, 02 Jun 2025 01:43 AM IST
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Street vendors' jam is not easy
जीरकपुर। शहर की सड़कों के किनारे रेहड़ी-फड़ी लगाने का चलन बढ़ता ही जा रहा है। इस कारण सड़कों पर ट्रैफिक जाम की समस्या भी बढ़ रही है। नगर परिषद के अधिकारियों को शिकायतें करने के बावजूद भी इन रेहड़ी-फड़ी वालों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही। पटियाला चौक से अंबाला की तरफ जाने वाले रोड पर प्रीत कॉलोनी के आगे रेहड़ी फड़ी वाले अक्सर देखे जा सकते हैं। ये लोग अवैध कब्जा करके सड़क के किनारे बैठकर अपना काम करते हैं। इस कारण वहां से गुजरने वाले वाहन चालक भी अपनी गाड़ियां और दोपहिया वाहनों को सड़क किनारे ही खड़ा करके खरीदारी करते हैं। इससे शाम के समय जाम लग जाता है। नगर परिषद की इंफोर्समेंट टीम ने इस क्षेत्र में पांच बार मंजे और रेहडि़यां उठवाईं लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
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जानकारी के अनुसार पटियाला चौक से लेकर पूरी प्रीत कॉलोनी के आगे बहुत से दुकानदारों द्वारा अपनी दुकानों के आगे मंजे रखकर स्टॉल लगाने का किराया भी वसूल किया जाता है। और वह स्टॉल वाले अपना मंजा तथा समान रात के समय इस दुकान में रखकर चले जाते हैं। इसके अलावा कुछ दुकानों में ज्यादा मंजे रखे हुए हैं ताकि अगर नगर परिषद की टीम बाहर रखा हुआ मंजा उठाकर लेख भी गई तो टीम के जाने के बाद अंदर से नया मंजा बाहर रखकर फिर से स्टाल लगा दिया जाता है।
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ईमानदारी से रेहड़ी-फड़ी वालों से नहीं होती वसूली
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इंफोर्समेंट टीम जो सामान जब्त करती है, उसे गोदाम में रखा जाता है। उस गोदाम की चाबी नगर परिषद के कच्चे कर्मियों के हाथ में ही रहती है। सरकारी गाड़ी को शहर में घुमाते हुए कच्चे कर्मचारी शाम तक कितना सामान इस गोदाम में रखते हैं, और कितना सामान वापस करते हैं, इसकी जानकारी अधिकारियों के पास नहीं होती। लोगों का कहना है कि अगर इंफोर्समेंट टीम ईमानदारी से रेहड़ी और फड़ी वालों से जुर्माना वसूल करके रसीद काटती तो आज नगर परिषद के पास अलग से लाखों रुपये जमा होते। इसलिए इनकी कार्य प्रणाली की गहनता से जांच की जानी चाहिए। लोगों ने तो यहां तक भी आरोप लगाया है कि इंफोर्समेंट टीम यहां पर लगने वाली सभी रेहड़ी, फड़ी और मंजे वाले से 2000 से लेकर 3000 रुपया प्रति माह लेती है। लोगों का कहना है कि रेहड़ी और मंज़े के साथ-साथ सारा सामान भी उठाया जाना चाहिए ताकि उस मंजे वाले को वित्तीय नुकसान होने के बाद ही वह दोबारा कब्जा करने के बारे में नहीं सोचेगा।
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रेहड़ी फड़ी छोड़ने के लिए हम रेहड़ी मालिक से जुर्माना वसूल करते हैं। कुछ लोग अपना सामान लेने ही नहीं आते जो हमारे गोदाम में पड़ा रहता है। गोदाम की चाबी कच्चे कर्मचारियों के पास नहीं हो सकती। मंजे पर कोई चिप नहीं लगी होती कि हम उसे पहचान सके कि किसका पहले उठाया है या नहीं। -प्रोमिला, सुपरिंटेंडेंट, नगर परिषद जीरकपुर।



हम सिर्फ मंजे और रेहड़ी ही उठाते हैं उनका सामान नहीं उठाते। सामान खराब हो सकता है। गोदाम की चाबी संबंधी नहीं बता सकता कि किसके पास है। अगर दोबारा से उसी जगह पर रेहड़ी फड़ी लग चुकी है, तो कल उसे चेक कर लिया जाएगा। - परविंदरजीत सिंह, इंस्पेक्टर एनफोर्समेंट विंग, नगर परिषद जीरकपुर।


हम सिर्फ मंजे और रेहड़ी ही उठाते हैं उनका सामान नहीं उठाते। सामान खराब हो सकता है। गोदाम की चाबी संबंधी नहीं बता सकता कि किसके पास है। अगर दोबारा से उसी जगह पर रेहड़ी फड़ी लग चुकी है, तो कल उसे चेक कर लिया जाएगा। - परविंदरजीत सिंह, इंस्पेक्टर एनफोर्समेंट विंग, नगर परिषद जीरकपुर।
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