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सैदपुरा में सीईटीपी का निर्माण शुरू, 60 करोड़ की आएगी लागत
अमर उजाला ब्यूरो, मोहाली
Updated Sat, 16 Apr 2016 10:40 AM IST
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सैदपुरा में सीईटीपी का निर्माण शुरू
- फोटो : अमर उजाला
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पंजाब में फार्मा यूनिट्स के पहले कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) का बरवाला रोड पर सैदपुरा में निर्माण कार्य शुरू हो गया। 60 करोड़ की लागत से बनने वाले इस प्रोजेक्ट का नींव पत्थर पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के चेयरमैन मनप्रीत सिंह ने शुक्रवार को रखा।
उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लगने से किसी भी फार्मा यूनिट से एफ्लुएंट्स डिस्चार्ज की शिकायतें खत्म हो जाएंगी। जितनी मात्रा में फार्मा फैक्ट्रियों का गंदा पानी विशेष वाहनों व अंडरग्राउंड पाइप लाइनों से सीईटीपी पहुंचेगा, उसी अनुपात में उनसे शुल्क वसूला जाएगा। प्रोजेक्ट को इलाके के 17 बड़े फार्मा यूनिट द्वारा बनाई गई मोहाली ग्रीन एनवायरमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने टेकओवर किया है। काम 18 महीने में पूरा किया जाएगा। पहले फेज में दो एमएलडी के सीईटीपी और एक एमलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तैयार किया जाएगा। इसके लिए 33 साल के लिए सैदपुरा की 15500 वर्ग गज जमीन 7.62 लाख रुपये प्रति वर्ष की दर पर लीज पर ली गई है। प्रदूषण बोर्ड की निगरानी में इसे ब्रिटिश मूल की ईटीआई डायनामिक्स कंपनी तैयार करेगी। मोहाली ग्रींस कंपनी के डायरेक्टर, बोर्ड के एनवायरमेंट इंजीनियर करुणेश गर्ग, एसएस मठारू और टेक्निकल हेड सुनीत सचदेवा मौजूद थे।
लोगों ने कर रखा है केस
चेयरमैन मनप्रीत सिंह ने कहा कि इलाके को प्रदूषण से राहत देने वाली यह कार्रवाई नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी), नई दिल्ली के आदेश पर की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में ईस्सापुर वासियों ने एनजीटी में केस दायर कर रखा है। उन्होंने कहा कि घातक प्रदूषण 17 प्रकार के हैं। इनमें से फार्मा भी एक है। प्रदूषण बोर्ड ने हलके की 17 फार्मा यूनिट्स को सीईटीपी में करोड़ों रुपये निवेश करने के लिए राजी किया है।
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नदारद रहे स्थानीय नेता
नॉर्थ इंडिया समेत पंजाब के पहले इस प्रोजेक्ट का डेराबस्सी नगर परिषद के तहत सैदपुरा में शुभारंभ शुक्रवार को किया गया। लेकिन, स्थानीय नेताओं ने इस प्रोजेक्ट में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। विरोधी नेताओं के पास बहाना रहा कि उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया, लेकिन आमंत्रण के बावजूद नगर प्रधान, उपप्रधान सहित वार्ड के पार्षद तक इसमें शामिल होने नहीं पहुंचे। हालांकि, इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन दिलाने में हलका विधायक एनके शर्मा की अहम भूमिका रही, लेकिन वह भी इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचे।
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उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट के लगने से किसी भी फार्मा यूनिट से एफ्लुएंट्स डिस्चार्ज की शिकायतें खत्म हो जाएंगी। जितनी मात्रा में फार्मा फैक्ट्रियों का गंदा पानी विशेष वाहनों व अंडरग्राउंड पाइप लाइनों से सीईटीपी पहुंचेगा, उसी अनुपात में उनसे शुल्क वसूला जाएगा। प्रोजेक्ट को इलाके के 17 बड़े फार्मा यूनिट द्वारा बनाई गई मोहाली ग्रीन एनवायरमेंट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने टेकओवर किया है। काम 18 महीने में पूरा किया जाएगा। पहले फेज में दो एमएलडी के सीईटीपी और एक एमलडी का सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) तैयार किया जाएगा। इसके लिए 33 साल के लिए सैदपुरा की 15500 वर्ग गज जमीन 7.62 लाख रुपये प्रति वर्ष की दर पर लीज पर ली गई है। प्रदूषण बोर्ड की निगरानी में इसे ब्रिटिश मूल की ईटीआई डायनामिक्स कंपनी तैयार करेगी। मोहाली ग्रींस कंपनी के डायरेक्टर, बोर्ड के एनवायरमेंट इंजीनियर करुणेश गर्ग, एसएस मठारू और टेक्निकल हेड सुनीत सचदेवा मौजूद थे।
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लोगों ने कर रखा है केस
चेयरमैन मनप्रीत सिंह ने कहा कि इलाके को प्रदूषण से राहत देने वाली यह कार्रवाई नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी), नई दिल्ली के आदेश पर की जा रही है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में ईस्सापुर वासियों ने एनजीटी में केस दायर कर रखा है। उन्होंने कहा कि घातक प्रदूषण 17 प्रकार के हैं। इनमें से फार्मा भी एक है। प्रदूषण बोर्ड ने हलके की 17 फार्मा यूनिट्स को सीईटीपी में करोड़ों रुपये निवेश करने के लिए राजी किया है।
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नदारद रहे स्थानीय नेता
नॉर्थ इंडिया समेत पंजाब के पहले इस प्रोजेक्ट का डेराबस्सी नगर परिषद के तहत सैदपुरा में शुभारंभ शुक्रवार को किया गया। लेकिन, स्थानीय नेताओं ने इस प्रोजेक्ट में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। विरोधी नेताओं के पास बहाना रहा कि उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया, लेकिन आमंत्रण के बावजूद नगर प्रधान, उपप्रधान सहित वार्ड के पार्षद तक इसमें शामिल होने नहीं पहुंचे। हालांकि, इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन दिलाने में हलका विधायक एनके शर्मा की अहम भूमिका रही, लेकिन वह भी इस कार्यक्रम में नहीं पहुंचे।