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डीजीपी पर छह मई को होंगे आरोप तय
अमर उजाला, रोपड़
Updated Mon, 21 Apr 2014 09:44 PM IST
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युवक को कथित तौर पर अगवा करके पुलिस मुकाबले में मारने के मामले में डीजीपी और अन्य पुलिस अधिकारियों पर चल रहे केस में सोमवार को जिले के एडिशनल जज केएस सुल्लर की अदालत ने अधिकारियों द्वारा केस खारिज करने के दिए आवेदन को रद करते हुए इस मामले में 6 मई को आरोप तय करने का आदेश दिए हैं।
मोरिंडा के गांव अमराली के अजैब सिंह ने डीजीपी एसके शर्मा, पूर्व डीआईजी एसपीएस बसरा, पूर्व इंस्पेक्टर बलकार सिंह और पूर्व एएसआई गुरचरण सिंह के खिलाफ उसके बेटे कुलदीप सिंह (20) को 1992 में मोरिंडा से कथित तौर पर अगवा कर उसे झूठे पुलिस मुकाबले में मारने के आरोप लगाए थे। 24 अक्तूबर 1998 को अदालत के आदेशों पर इन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
इस मामले में सोमवार को डीजीपी एसके शर्मा ने अदालत में उन पर चल रहे इस मामले को रद करने का आवेदन पत्र दिया था। अदालत ने इसे खारिज करते हुए मामले में 6 मई को आरोप तय करने के आदेश दिए हैं।
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कुलदीप सिंह पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से ग्रैजुएशन कर रहा था और पुलिस ने उसे कथित तौर पर अगवा कर लिया था। अगवा होने की सूचना मिलते ही उसके पिता अजैब सिंह उसे खोजने के लिए पुलिस के पास गए थे। पुलिस ने उस समय कुलदीप सिंह को पुलिस हिरासत में होने से इनकार कर दिया था।
15 मई, 1991 को उस समय के एसएसपी पटियाला द्वारा एक अखबार में छपी स्टेटमेंट में कहा था कि कुलदीप सिंह 1 मई को पुलिस मुकाबले में मारा गया। इसके बाद अजैब सिंह ने न्याय के लिए गुहार लगाई पर उस समय इस मामले में कुछ ना हो सका। 1998 में उक्त चारों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ धारा 364 तथा 34 आईपीसी के तहत मामला दर्ज हुआ था।
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मोरिंडा के गांव अमराली के अजैब सिंह ने डीजीपी एसके शर्मा, पूर्व डीआईजी एसपीएस बसरा, पूर्व इंस्पेक्टर बलकार सिंह और पूर्व एएसआई गुरचरण सिंह के खिलाफ उसके बेटे कुलदीप सिंह (20) को 1992 में मोरिंडा से कथित तौर पर अगवा कर उसे झूठे पुलिस मुकाबले में मारने के आरोप लगाए थे। 24 अक्तूबर 1998 को अदालत के आदेशों पर इन अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
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इस मामले में सोमवार को डीजीपी एसके शर्मा ने अदालत में उन पर चल रहे इस मामले को रद करने का आवेदन पत्र दिया था। अदालत ने इसे खारिज करते हुए मामले में 6 मई को आरोप तय करने के आदेश दिए हैं।
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कुलदीप सिंह पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला से ग्रैजुएशन कर रहा था और पुलिस ने उसे कथित तौर पर अगवा कर लिया था। अगवा होने की सूचना मिलते ही उसके पिता अजैब सिंह उसे खोजने के लिए पुलिस के पास गए थे। पुलिस ने उस समय कुलदीप सिंह को पुलिस हिरासत में होने से इनकार कर दिया था।
15 मई, 1991 को उस समय के एसएसपी पटियाला द्वारा एक अखबार में छपी स्टेटमेंट में कहा था कि कुलदीप सिंह 1 मई को पुलिस मुकाबले में मारा गया। इसके बाद अजैब सिंह ने न्याय के लिए गुहार लगाई पर उस समय इस मामले में कुछ ना हो सका। 1998 में उक्त चारों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ धारा 364 तथा 34 आईपीसी के तहत मामला दर्ज हुआ था।