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अब मोहाली में आईवीआर सिस्टम से घरों में क्वारंटीन कोरोना संक्रमितों पर रखी जाएगी नजर, फोन कॉल कर सकेंगे
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मोहाली। जिले भर में कोरोना संकम्रण के मरीज लगातार बढ़ रहे हैं। कोरोना पॉजिटिव आने के बाद बहुत से लोग घर में ही क्वारंटीन या होम आइसोलेशन पर चले जाते हैं। ऐसे मरीजों पर निगरानी रखने के लिए जिला प्रशासन ने मैनुअल सिस्टम के साथ ही आईवीआर (इंट्रेेक्टिव वॉयस रिस्पांस) कॉलिंग सिस्टम भी शुरू किया है। इसके माध्यम से जहां प्रशासन रोज घरों में क्वारंटीन चल रहे मरीजों का हालचाल जानेगा, वहीं, डॉक्टरी सहायता भी उपलब्ध कवाई जाएगी।
डीसी गिरीश दियालन ने बताया कि यह प्रक्रिया एक समाजसेवी संस्था के सहयोग से शुरू की जा रही है। इसके माध्यम से आने वाली फोन कॉल में लोग अपनी पसंदीदा भाषा चुन पाएंगे। हालांकि उन्होंने बताया कि यह भी देखने में आया है कि अधिक लोग ऑटोमेटिक कॉल जवाब देना उचित नहीं समझते हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि वह इन कॉल्स का जवाब जरूर दें।
जिला प्रशासन की तरफ से नियुक्त कोविड पेेशेंट ट्रैकिंग अफसर की अगुवाई में एक टेली कॉलिंग टीम मरीजों से बातचीत कर उनसे रोजाना हाल चाल जानती थी। इसी बीच कोविड के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो गई। मरीजों की संख्या अब नौ हजार के पार है। इससे मैनुअल तरीके से उन पर निगरानी रखना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में समाजसेवी संस्था स्टैपवन से सहयोग लिया गया है।
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ऐसे काम करेगा यह सिस्टम
यह सिस्टम घर में ही क्वारंटीन कोविड पॉजिटिव मरीजों का डाटा एकत्रित करेगा। मरीजों को फोन पर पूछे गए सवालों के जवाब देने होंगे। साथ ही खुद अपनी स्थिति के मूल्यांकन किए गए अनुसार अपडेट देना होगा। मरीज के जवाब के आधार पर यह सिस्टम जिन्हें तुरंत डॉक्टरी सहायता की जरूरत होगी, उनके लिए रेड फ्लैग दर्शाएगा। इसके अलावा उचित इलाज के लिए डॉक्टरों से संपर्क किया जाएगा।
मरीजों को होगा फायदा
कोविड पेशेंट ट्रैकिंग अधिकारी की सीपीटीओ एसपी (देहात) रवजोत कौर ग्रेवाल ने कहा कि होम क्वारंटीन में पॉजिटिव मरीजों की निगरानी करना जरूरी है, ताकि उनके बारे में सही जानकारी मिल सके। आईवीआर से मरीजों को काफी मिलेगा। मरीजों को आईवीआर कॉल्स का जवाब देना चाहिए।
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डीसी गिरीश दियालन ने बताया कि यह प्रक्रिया एक समाजसेवी संस्था के सहयोग से शुरू की जा रही है। इसके माध्यम से आने वाली फोन कॉल में लोग अपनी पसंदीदा भाषा चुन पाएंगे। हालांकि उन्होंने बताया कि यह भी देखने में आया है कि अधिक लोग ऑटोमेटिक कॉल जवाब देना उचित नहीं समझते हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि वह इन कॉल्स का जवाब जरूर दें।
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जिला प्रशासन की तरफ से नियुक्त कोविड पेेशेंट ट्रैकिंग अफसर की अगुवाई में एक टेली कॉलिंग टीम मरीजों से बातचीत कर उनसे रोजाना हाल चाल जानती थी। इसी बीच कोविड के मरीजों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो गई। मरीजों की संख्या अब नौ हजार के पार है। इससे मैनुअल तरीके से उन पर निगरानी रखना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में समाजसेवी संस्था स्टैपवन से सहयोग लिया गया है।
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ऐसे काम करेगा यह सिस्टम
यह सिस्टम घर में ही क्वारंटीन कोविड पॉजिटिव मरीजों का डाटा एकत्रित करेगा। मरीजों को फोन पर पूछे गए सवालों के जवाब देने होंगे। साथ ही खुद अपनी स्थिति के मूल्यांकन किए गए अनुसार अपडेट देना होगा। मरीज के जवाब के आधार पर यह सिस्टम जिन्हें तुरंत डॉक्टरी सहायता की जरूरत होगी, उनके लिए रेड फ्लैग दर्शाएगा। इसके अलावा उचित इलाज के लिए डॉक्टरों से संपर्क किया जाएगा।
मरीजों को होगा फायदा
कोविड पेशेंट ट्रैकिंग अधिकारी की सीपीटीओ एसपी (देहात) रवजोत कौर ग्रेवाल ने कहा कि होम क्वारंटीन में पॉजिटिव मरीजों की निगरानी करना जरूरी है, ताकि उनके बारे में सही जानकारी मिल सके। आईवीआर से मरीजों को काफी मिलेगा। मरीजों को आईवीआर कॉल्स का जवाब देना चाहिए।