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भैंस की मौत पर इंश्योरेंस कंपनी को चुकाने होंगे 50 हजार
अमर उजाला ब्यूरो, मोहाली
Updated Tue, 22 Mar 2016 09:40 PM IST
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कोर्ट
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स्थायी लोक अदालत ने आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी को सर्विस में कोताही का दोषी करार दिया है। साथ ही उपभोक्ता को भैंस की इंश्योरेंस के रूप में 50 हजार देने के आदेश दिए है। साथ ही 10 हजार रुपये कानूनी खर्च के रूप कंपनी को चुकाने होंगे। इस संबंध में अदालत में जिला रूपनगर के गांव गढ़बागा के प्रेम चंद ने केस दायर किया था।
यह था मामला
लोक अदालत को दी शिकायत में शिकायतकर्ता ने बताया था कि उन्होंने भैंसें खरीदने के लिए आईसीआईसीआई बैंक से लोन लिया था। साथ ही प्रत्येक भैंस की इंश्योरेंस 50 हजार रुपये करवाई थी। इसी बीच एक भैंस बीमार पड़ गई। भैंस का उन्होंने बढ़िया डॉक्टर से इलाज करवाया। लेकिन, 27 मार्च 2015 को भैंस की मौत हो गई। इसके बाद उसने भैंस का पोस्टमार्टम करवाया। साथ ही पूरे दस्तावेजों के साथ इंश्योरेंस कंपनी के पास इंश्योरेंस क्लेम के लिए आवेदन किया। लेकिन, इंश्योरेंस कंपनी ने उसका भुगतान नहीं किया। इसके बाद अदालत की तरफ से कंपनी को नोटिस जारी किया गया।
अदालत में कंपनी ने दिया था यह तर्क
कंपनी ने अदालत में माना कि कंपनी ने उपभोक्ता की दो भैंसों की इंश्योरेंस की थी। साथ ही भैंस मरने की सूचना भी उन तक पहुंची थी। उपभोक्ता ने इंश्योरेंस के लिए क्लेम कर दिया। साथ ही कंपनी की तरफ सर्वे करने के लिए सर्वेयर नियुक्त कर दिया गया। साथ ही उनकी तरफ उपभोक्ता से भैंस की बीमारी के संबंध में जो दस्तावेज मांगे गए। वह दस्तावेज उपभोक्ता पेश नहीं कर पाया। इस कारण कंपनी ने उनका केस बंद कर दिया। अदालत ने मेरिट के आधार पर मामले को निपटाने की कोशिश की। लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
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जज के आगे तर्क पड़ गया कमजोर
अदालत ने पाया कि उपभोक्ता ने कंपनी से भैंसों की इंश्योरेंस करवाई थी। वहीं, शिकायतकर्ता ने जरूरी दस्तावेज व पोस्टमार्टम की रिपोर्ट को इंश्योरेंस कंपनी को भेजी थी। वहीं, अदालत ने कंपनी के इस तर्क को भी नहीं माना। इसमें कंपनी ने कहा था कि भैंस का इलाज सही तरीके से नहीं हुआ था।
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यह था मामला
लोक अदालत को दी शिकायत में शिकायतकर्ता ने बताया था कि उन्होंने भैंसें खरीदने के लिए आईसीआईसीआई बैंक से लोन लिया था। साथ ही प्रत्येक भैंस की इंश्योरेंस 50 हजार रुपये करवाई थी। इसी बीच एक भैंस बीमार पड़ गई। भैंस का उन्होंने बढ़िया डॉक्टर से इलाज करवाया। लेकिन, 27 मार्च 2015 को भैंस की मौत हो गई। इसके बाद उसने भैंस का पोस्टमार्टम करवाया। साथ ही पूरे दस्तावेजों के साथ इंश्योरेंस कंपनी के पास इंश्योरेंस क्लेम के लिए आवेदन किया। लेकिन, इंश्योरेंस कंपनी ने उसका भुगतान नहीं किया। इसके बाद अदालत की तरफ से कंपनी को नोटिस जारी किया गया।
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अदालत में कंपनी ने दिया था यह तर्क
कंपनी ने अदालत में माना कि कंपनी ने उपभोक्ता की दो भैंसों की इंश्योरेंस की थी। साथ ही भैंस मरने की सूचना भी उन तक पहुंची थी। उपभोक्ता ने इंश्योरेंस के लिए क्लेम कर दिया। साथ ही कंपनी की तरफ सर्वे करने के लिए सर्वेयर नियुक्त कर दिया गया। साथ ही उनकी तरफ उपभोक्ता से भैंस की बीमारी के संबंध में जो दस्तावेज मांगे गए। वह दस्तावेज उपभोक्ता पेश नहीं कर पाया। इस कारण कंपनी ने उनका केस बंद कर दिया। अदालत ने मेरिट के आधार पर मामले को निपटाने की कोशिश की। लेकिन कोई सफलता नहीं मिली।
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जज के आगे तर्क पड़ गया कमजोर
अदालत ने पाया कि उपभोक्ता ने कंपनी से भैंसों की इंश्योरेंस करवाई थी। वहीं, शिकायतकर्ता ने जरूरी दस्तावेज व पोस्टमार्टम की रिपोर्ट को इंश्योरेंस कंपनी को भेजी थी। वहीं, अदालत ने कंपनी के इस तर्क को भी नहीं माना। इसमें कंपनी ने कहा था कि भैंस का इलाज सही तरीके से नहीं हुआ था।