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Mohali News: एम्स में नवजात बच्चों में सुनने की कमी का समय रहते चलेगा पता, ब्रेनस्टेम प्रतिक्रिया जांचने में मिलेगी मदद

Thu, 15 Oct 2026 02:26 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 15 Oct 2026 02:26 AM IST
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Hearing loss in newborns at AIIMS will be detected in time; testing brainstem response will aid the process.
मिलेगी 20 लाख की बेरा मशीन, पंजाब में पहली बार होगी यह सुविधा
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अंजिता मिश्रा
मोहाली। नवजात बच्चों में सुनने की क्षमता की कमी का पता लगाने और सुनने से जुड़ी नसों की जांच के लिए अब मरीजों को दूसरे चिकित्सा केंद्रों पर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। एम्स मोहाली में करीब 20 लाख रुपये की लागत से बेरा (बीएईआरए) मशीन उपलब्ध कराई जाएगी। इससे सुनने की नसों और दिमाग के ब्रेनस्टेम तक आवाज के संकेत पहुंचने की प्रक्रिया की जांच की जा सकेगी। संस्थान के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. मनीष गुप्ता के अनुसार, पंजाब में पहली बार मोहाली जिले में यह सुविधा उपलब्ध होगी। बेरा जांच उन नवजात बच्चों के लिए उपयोगी है, जो आवाज पर प्रतिक्रिया नहीं देते या जिनमें सुनने की क्षमता कम होने का संदेह होता है। इसके अलावा सुनने में परेशानी और सुनने की नसों की कार्यप्रणाली में गड़बड़ी की आशंका वाले मरीजों की जांच में भी इससे मदद मिलेगी। बच्चों में सुनने की समस्या का समय रहते पता लगाना जरूरी है, क्योंकि इसका असर उनके बोलने और भाषा सीखने की क्षमता पर पड़ सकता है।
ऐसे काम करती है बेरा मशीन

जांच के दौरान मरीज के सिर और कानों के पास छोटे इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं। इसके बाद हेडफोन के जरिये क्लिक जैसी आवाजें सुनाई जाती हैं। मशीन इन आवाजों के प्रति सुनने की नसों और दिमाग के ब्रेनस्टेम की विद्युत प्रतिक्रिया दर्ज करती है। इन संकेतों के आधार पर डॉक्टर सुनने से जुड़ी समस्या का आकलन कर सकते हैं और जरूरत के अनुसार आगे की जांच या इलाज की सलाह देते हैं।
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चक्कर आने के कारणों की जांच में भी मदद

चक्कर आने के कई कारण हो सकते हैं। कुछ मामलों में कान के अंदरूनी हिस्से या सुनने और संतुलन से जुड़ी समस्याएं इसकी वजह हो सकती हैं। ऐसे मरीजों में, जहां डॉक्टर को सुनने की नसों से संबंधित गड़बड़ी का संदेह हो, बेरा जांच उपयोगी साबित हो सकती है। हालांकि, चक्कर आने के सभी कारणों का पता इस मशीन से नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए मरीज के लक्षणों के अनुसार अन्य जांच भी जरूरी होती हैं।
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एम्स में ही हो सकेगी विशेष जांच

एम्स मोहाली के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. मनीष गुप्ता ने बताया कि संस्थान में करीब 20 लाख रुपये की लागत से बेरा मशीन उपलब्ध कराई जाएगी। इससे नवजात बच्चों में सुनने की क्षमता की जांच के साथ सुनने की नसों और ब्रेनस्टेम की प्रतिक्रिया का आकलन करने में मदद मिलेगी। पहले कुछ मरीजों को इस तरह की विशेष जांच के लिए दूसरे चिकित्सा केंद्रों पर भेजना पड़ता था। मशीन उपलब्ध होने से मरीजों को एम्स में ही यह सुविधा मिल सकेगी और बाहर जाने की परेशानी कम होगी। मशीन को जल्द ही मरीजों के लिए शुरू करने की योजना है।
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