बिगड़ते हालात: तेजी से गिर रहा जीरकपुर का भूजल स्तर, हर साल करीब दस फुट जा रहा नीचे
जीरकपुर से घग्गर नदी सहित कई बरसाती नाले बहते थे जिसमें हर समय साफ पानी बहता था। इसका इस्तेमाल पीने के लिए भी कर सकते थे। काफी साल पहले घग्गर नदी के साथ लगते ढकौली, गाजीपुर, सनौली सहित अन्य नजदीकी क्षेत्र में पानी खुद जमीन से बाहर निकल जाता था।
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चंडीगढ़ के पास स्थित जीरकपुर की पिछले कुछ सालों में आबादी 50 हजार से बढ़कर करीब 5 लाख पहुंच गई है। आबादी बढ़ने के साथ ही शहर में भूजल स्तर तेजी से गिरता जा रहा है। इसके पीछे शहर में निर्माण कार्यों की भरमार है। शहर में हर साल पानी का स्तर आठ से दस फुट तक नीचे गिर रहा है। साल 2003 में जहां 200 फुट पर पानी निकल जाता था, लेकिन अब 800 फुट पर साफ पानी निकलता है।
कभी जीरकपुर में चलती थी पन चक्कियां
जीरकपुर से घग्गर नदी सहित कई बरसाती नाले बहते थे जिसमें हर समय साफ पानी बहता था। इसका इस्तेमाल पीने के लिए भी कर सकते थे। काफी साल पहले घग्गर नदी के साथ लगते ढकौली, गाजीपुर, सनौली सहित अन्य नजदीकी क्षेत्र में पानी खुद जमीन से बाहर निकल जाता था। उस समय जीरकपुर में गेहूं पीसने के लिए चार पन चक्कियां चलती थी। जो समय के साथ बंद हो गईं। पिछले समय से पानी का स्तर जहां लगातार गिरता जा रहा है। वहीं यहां लगने वाली इंडस्ट्री के कारण पानी पूरी तरह से प्रदूषित हो चुका है। अब हालात यह हो गए हैं कि शहर में 250 फुट पर पानी मिलता है। जो पीने योग्य नहीं है। पीने योग्य पानी के लिए कम से 800 फुट से गहरे बोर करने पड़ते हैं।
शहरीकरण के कारण पानी की आ रही कमी
जीरकपुर तेजी से उभरता शहर है और तेजी से ही इसका शहरीकरण हो रहा है। चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली के मुकाबले जीरकपुर में जमीन सस्ती होने के कारण ट्राइसिटी निवासियों के लिए यह पंसदीदा स्थान है। जहां सैकड़ों की तादाद में रिहायशी कालोनियां और सोसाइटी विकसित हो चुकी हैं और लगातार विकसित हो रही हैं। यहां लोगों की पानी की कमी के लिए जहां सोसाइटियों में बिल्डरों की ओर से अपने स्तर पर ट्यूबवेल लगाए गए हैं। वहीं ज्यादातर जगह सरकारी ट्यूबवेलों से पानी की सप्लाई की जा रही है। शहर में ज्यादातर लोगों की ओर से अपने सबमर्सिबल भी लगाए जा रहे हैं। जिसके लिए कोई मंजूरी नहीं ली जाती।
घग्गर नदी का पानी हुआ प्रदूषित
पहाड़ों से निकलती घग्गर नदी किसी समय यहां के लोगों के वरदान साबित होती थी। इसमें हर समय साफ पानी बहने के कारण लोग इस पानी का प्रयोग पीने और खेती के लिए करते थे। इसके अलावा आसपास के क्षेत्र के पानी का स्तर भी काफी ऊपर था। लेकिन समय के साथ ही यहां पर पानी का स्तर नीचे गिरने के अलावा यहां उद्योगों के कारण पानी पूरी तरह से प्रदूषित हो चुका है। जो लोगों को बीमारियां बांट रहा है। इसी पानी का प्रयोग लोग खेती में करते हैं, जिससे प्रदूषित फसल पैदा हो रही है।
सरकारी ट्यूबवेलों का गिरा भूजल स्तर
हलका विधायक और लंबे समय नगर काउंसिल के प्रधान रहे विधायक एनके शर्मा ने कहा कि साल 2003 में शहर में सरकारी ट्यूबवेल 200 से 250 फुट पर साफ पानी निकल आता था। लेकिन हरेक साल आठ से दस फुट पानी का स्तर गिर रहा है। 18 साल में पानी का स्तर काफी गिर गया है। जिस कारण अब सरकारी ट्यूबवेल 800 फुट या इससे गहरा लग रहा है।
कजौली वाटर वर्क्स से पानी लाने और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की जरूरत
जीरकपुर में पानी के गिरते जल स्तर को रोकने के लिए जहां यहां पर कजौली वाटर वर्क्स से पानी लाने की योजना पर जल्द अमल करना होगा। वहीं बरसात के पानी को संभालने के लिए यहां पर हार्वेस्टिंग सिस्टम घर-घर में अनिवार्य करना होगा। इसके अलावा घग्गर नदी, अन्य बरसाती नालों व धरती के नीचे के पानी का प्रदूषित होने से बचाने के लिए उद्योगों से निकलने वाले प्रदूषण पर काबू करना होगा।
इस बारे में नगर काउंसिल के प्रधान उदयवीर सिंह ढिल्लों ने कहा कि कजौली वाटर वर्क्स से पानी लाने के लिए प्रस्ताव पारित कर स्थानीय निकाय विभाग को भेजा गया है। इसकी मंजूरी मिलने के बाद जल्द ही इस पर काम किया जाएगा। इसके अलावा नगर काउंसिल की ओर से पहले हार्वेस्टिंग सिस्टम लागू किए गए थे, लेकिन उनकी देखभाल न होने के कारण वह बंद हो गए हैं। जिनको नए सिरे से स्थापित करते हुए दोबारा चालू किया जाएगा।