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Mohali News: गमाडा ने थमाया एलओआई, 11 साल बाद भी नहीं दिए प्लॉट
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मोहाली। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में 19 फरवरी, 2020 को गमाडा के हवाले से कहा गया था कि ईकोसिटी एक्सटेंशन-2 में याचिकाकर्ताओं को प्लॉटों की अलाटमेंट कर दी गई है। हालांकि अब तक स्टे फाइल करने वाले याचिकाकर्ताओं को प्लाॅट मिले ही नहीं। यह मामला है मुल्लांपुर के होशियारपुर गांव की ईकोसिटी एक्सटेंशन-20 का। इसके लिए वर्ष 2013 में किसानों की 96 एकड़ जमीन अधिग्रहीत की थी। अब उस समय के याचिकाकर्ता कुछ किसान गमाडा की ओर से दिए गए लेटर ऑफ इंटेंट (एलओआई) लेकर मारे-मारे फिर रहे हैं। बता दें कि कुछ किसानों ने वर्ष 2013 में पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट में ईकोसिटी एक्सटेंशन-2 के विकास को लेकर स्टे ले लिया था। उस दौरान गमाडा ईकोसिटी एक्सटेंशन-2 की प्लानिंग कर चुका था। गमाडा के इस बयान से केस खत्म हो गया था। किसानों को प्लाट आज तक नहीं मिले। जिसकी वजह से किसानों का गुजारा तक मुश्किल हो गया है। इन सभी किसानों ने सीएम से लेकर गमाडा तक में इस मामले को लेकर कई बार लेटर भेजे पर गमाडा की ओर से कोई भी जवाब नहीं आया।
वास्तव में किसानों ने ईकोसिटी-2 और ईकोसिटी-2 के विकास को देखकर और गमाडा पर विश्वास करके अपनी जमीनें गमाडा को दे दी थी। 11 साल बीतने के बाद भी अब तक गमाडा ने ईकोसिटी एक्सटेंशन-2 में कोई डेवलपमेंट का काम तक नहीं शुरू कर सका है। जिसमें गमाडा को करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। इसके साथ ही गमाडा की जमीन के साथ लगती जमीनों पर प्राइवेट बिल्डर इकोसिटी-1, इकोसिटी-2 और मेडिसिटी जैसे प्रोजेक्ट के डेवलप होने के बाद जबरदस्त मुनाफा कमा रहे हैं।
इन किसानों की अधिग्रहीत की थी जमीन
होशियारपुर के रहने वाले किसान सतबीर सिंह ने बताया कि उनकी पांच एकड़ जमीन गमाडा ने अधिग्रहीत की थी। जिसमें से आधी जमीन के पैसे ले लिए और बाकी के प्लाॅट लिए। इसी तरह मक्खन सिंह ने भी आठ एकड़ जमीन दी थी और उसमें से आधी के लिए एलओआई और आधी जमीन के पैसे लिए थे। चरणजीत सिंह ने कहा कि चार एकड़ जमीन थी, उन्होंने बताया कि आधी जमीन के पैसे लिए और आधी जमीन के लिए एलओआई ले लिया। लेकिन उनको विश्वास था कि गमाडा जल्द से जल्द यहां डेवलपमेंट कर देगा। अब तक डेवलपमेंट कहीं दिखाई नहीं दिया।
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एक महीने में प्लाॅट अलाॅट नहीं हुए तो करेंगे संघर्ष
अपनी जमीन गमाडा को देने वाले किसानों ने 12 सितंबर को होशियारपुर गांव में एक बैठक की और उसमें फैसला लिया गया कि एक महीने में अगर गमाडा उनको प्लाॅट अलाॅट नहीं करता है तो वह संघर्ष करेंगे, इस मामले में गमाडा के सामने धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इन किसानों का कहना है कि कोर्ट के स्टे ऑर्डर को रोकने के लिए गमाडा द्वारा गलत बयान कोर्ट में दिया गया था। जबकि उनको अब तक कोई प्लाट अलाट नहीं किया गया।
इकोसिटी एक्सटेंशन-2
वर्ष-2013 कुल जमीन अधिग्रहीत की-96 एकड़
रेडिडेंशियल प्लाॅट्स (एक कनाल और दो कनाल) 106
मिक्स लैंड यूज के लिए-3.5 एकड़ के दो बड़े प्लाॅट्स (रिजर्व)
कॉमर्शियल प्लाट्स (शो रूम साइट)-66
स्पोर्ट्स कांप्लेक्स/क्लब-साढ़े तीन एकड़ में
वाटर वर्क्स-साढ़े तीन एकड़ में
रेजिडेंट्स के लिए ग्रीन बेल्ट और छह पार्क
इनको भेजे गए हैं लेटर
1-मुख्यमंत्री कम चेयरमैन गमाडा
2-प्रिंसिपल सचिव हाउसिंग
3-चीफ एडमिनिस्ट्रेटर गमाडा
4-इस्टेट ऑफिसर इकोसिटी-2
5-सीनियर टाउन प्लानर गमाडा
6-लैंड इक्यूजेशन कलेक्टर (एलएसी)
कोट्स
हमने दस एकड़ जमीन इस विश्वास पर दी थी कि हमको प्लाॅट जल्द मिलेंगे। जिससे हमारे बच्चों का भविष्य सुनहरा होगा। जिस तरह से उस समय गमाडा डेवलपमेंट कर रहा था, हमको गमाडा पर अटूट विश्वास हो गया था। लेकिन 11 साल बाद भी हमारे पास लेटर ऑफ इंटेंट ही है, बाकी कुछ भी नहीं। -अवतार सिंह, किसान, गांव होशियारपुर, जिला मोहाली, न्यू चंडीगढ़
कोट्स
मैने इस मामले में पिछले सप्ताह पूरा रिव्यू किया था, इस मामले में इस बुधवार तक रिपोर्ट देने को कहा गया है। -मुनीश कुमार, चीफ एडमिनिस्ट्रेटर, गमाडा
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वास्तव में किसानों ने ईकोसिटी-2 और ईकोसिटी-2 के विकास को देखकर और गमाडा पर विश्वास करके अपनी जमीनें गमाडा को दे दी थी। 11 साल बीतने के बाद भी अब तक गमाडा ने ईकोसिटी एक्सटेंशन-2 में कोई डेवलपमेंट का काम तक नहीं शुरू कर सका है। जिसमें गमाडा को करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है। इसके साथ ही गमाडा की जमीन के साथ लगती जमीनों पर प्राइवेट बिल्डर इकोसिटी-1, इकोसिटी-2 और मेडिसिटी जैसे प्रोजेक्ट के डेवलप होने के बाद जबरदस्त मुनाफा कमा रहे हैं।
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इन किसानों की अधिग्रहीत की थी जमीन
होशियारपुर के रहने वाले किसान सतबीर सिंह ने बताया कि उनकी पांच एकड़ जमीन गमाडा ने अधिग्रहीत की थी। जिसमें से आधी जमीन के पैसे ले लिए और बाकी के प्लाॅट लिए। इसी तरह मक्खन सिंह ने भी आठ एकड़ जमीन दी थी और उसमें से आधी के लिए एलओआई और आधी जमीन के पैसे लिए थे। चरणजीत सिंह ने कहा कि चार एकड़ जमीन थी, उन्होंने बताया कि आधी जमीन के पैसे लिए और आधी जमीन के लिए एलओआई ले लिया। लेकिन उनको विश्वास था कि गमाडा जल्द से जल्द यहां डेवलपमेंट कर देगा। अब तक डेवलपमेंट कहीं दिखाई नहीं दिया।
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एक महीने में प्लाॅट अलाॅट नहीं हुए तो करेंगे संघर्ष
अपनी जमीन गमाडा को देने वाले किसानों ने 12 सितंबर को होशियारपुर गांव में एक बैठक की और उसमें फैसला लिया गया कि एक महीने में अगर गमाडा उनको प्लाॅट अलाॅट नहीं करता है तो वह संघर्ष करेंगे, इस मामले में गमाडा के सामने धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इन किसानों का कहना है कि कोर्ट के स्टे ऑर्डर को रोकने के लिए गमाडा द्वारा गलत बयान कोर्ट में दिया गया था। जबकि उनको अब तक कोई प्लाट अलाट नहीं किया गया।
इकोसिटी एक्सटेंशन-2
वर्ष-2013 कुल जमीन अधिग्रहीत की-96 एकड़
रेडिडेंशियल प्लाॅट्स (एक कनाल और दो कनाल) 106
मिक्स लैंड यूज के लिए-3.5 एकड़ के दो बड़े प्लाॅट्स (रिजर्व)
कॉमर्शियल प्लाट्स (शो रूम साइट)-66
स्पोर्ट्स कांप्लेक्स/क्लब-साढ़े तीन एकड़ में
वाटर वर्क्स-साढ़े तीन एकड़ में
रेजिडेंट्स के लिए ग्रीन बेल्ट और छह पार्क
इनको भेजे गए हैं लेटर
1-मुख्यमंत्री कम चेयरमैन गमाडा
2-प्रिंसिपल सचिव हाउसिंग
3-चीफ एडमिनिस्ट्रेटर गमाडा
4-इस्टेट ऑफिसर इकोसिटी-2
5-सीनियर टाउन प्लानर गमाडा
6-लैंड इक्यूजेशन कलेक्टर (एलएसी)
कोट्स
हमने दस एकड़ जमीन इस विश्वास पर दी थी कि हमको प्लाॅट जल्द मिलेंगे। जिससे हमारे बच्चों का भविष्य सुनहरा होगा। जिस तरह से उस समय गमाडा डेवलपमेंट कर रहा था, हमको गमाडा पर अटूट विश्वास हो गया था। लेकिन 11 साल बाद भी हमारे पास लेटर ऑफ इंटेंट ही है, बाकी कुछ भी नहीं। -अवतार सिंह, किसान, गांव होशियारपुर, जिला मोहाली, न्यू चंडीगढ़
कोट्स
मैने इस मामले में पिछले सप्ताह पूरा रिव्यू किया था, इस मामले में इस बुधवार तक रिपोर्ट देने को कहा गया है। -मुनीश कुमार, चीफ एडमिनिस्ट्रेटर, गमाडा