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Mohali News: ...आम आदमी क्लीनिकों में भी होने लगा रेबीज का मुफ्त इलाज
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मोहाली। अब जिले में रेबीज से जुड़े इलाज के लिए बड़े अस्पताल भागने की जरूरत नहीं है। सभी 40 आम आदमी क्लीनिकों में एंटी-रेबीज वैक्सीन (एआरवी) मुफ्त में मिल रही है। सिविल सर्जन डॉ. संगीता जैन ने बताया कि पंजाब सरकार के निर्देशों पर यह सुविधा शुरू की गई है ताकि हर व्यक्ति को नजदीक ही इलाज मिल सके और समय पर टीकाकरण हो सके।
डॉ. जैन ने बताया कि अब तक आम आदमी क्लीनिकों में सीमित सेवाएं मिल रही थीं, लेकिन अब रेबीज जैसे जानलेवा संक्रमण का इलाज भी यहीं शुरू हो गया है। जानवरों के काटने के बाद पहला, तीसरा, सातवां और 28वां दिन टीके के लिए बेहद अहम होता है। क्लीनिकों में इन सभी दिनों के लिए मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध है। यह भ्रम अब भी लोगों में फैला है कि रेबीज सिर्फ कुत्तों के काटने से होता है, जबकि यह संक्रमण बिल्ली, बंदर, बकरी, और चमगादड़ जैसे जानवरों के काटने से भी हो सकता है। संक्रमित जानवर की लार से वायरस शरीर में दाखिल होता है, इलाज न हो तो यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।
देसी नुस्खों का सहारा न लें
डॉ. जैन ने लोगों से अपील की है कि जानवर के काटने पर देसी नुस्खों का सहारा न लें। अभी भी कई लोग जख्म पर मिर्च या तेल लगाकर इलाज टालते हैं, यह बेहद खतरनाक है। रेबीज के शुरुआती लक्षणों में बुखार, सिर दर्द, कमजोरी, घबराहट और उल्टी शामिल हैं। संक्रमण बढ़ने पर मरीज को पानी और आवाज से डर लगने लगता है, लार गिरती है, भ्रम की स्थिति बन जाती है और अंत में मौत हो जाती है।
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जख्म को साबुन, साफ पानी से धोएं
सिविल सर्जन ने कहा कि आम आदमी क्लीनिकों में प्रशिक्षित स्टाॅफ और वैक्सीन का पूरा स्टॉक है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत इलाज मिल सके। उन्होंने अपील की है कि जिनके पास पालतू कुत्ते हैं वे समय पर उनका टीकाकरण जरूर करवाएं ताकि रेबीज को फैलने से रोका जा सके। डॉक्टरों की सलाह है कि यदि किसी जानवर ने काट लिया है, तो सबसे पहले जख्म को साबुन और साफ पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोएं और फिर नजदीकी आम आदमी क्लीनिक या सरकारी अस्पताल में जाकर तुरंत इलाज करवाएं।
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डॉ. जैन ने बताया कि अब तक आम आदमी क्लीनिकों में सीमित सेवाएं मिल रही थीं, लेकिन अब रेबीज जैसे जानलेवा संक्रमण का इलाज भी यहीं शुरू हो गया है। जानवरों के काटने के बाद पहला, तीसरा, सातवां और 28वां दिन टीके के लिए बेहद अहम होता है। क्लीनिकों में इन सभी दिनों के लिए मुफ्त वैक्सीन उपलब्ध है। यह भ्रम अब भी लोगों में फैला है कि रेबीज सिर्फ कुत्तों के काटने से होता है, जबकि यह संक्रमण बिल्ली, बंदर, बकरी, और चमगादड़ जैसे जानवरों के काटने से भी हो सकता है। संक्रमित जानवर की लार से वायरस शरीर में दाखिल होता है, इलाज न हो तो यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।
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देसी नुस्खों का सहारा न लें
डॉ. जैन ने लोगों से अपील की है कि जानवर के काटने पर देसी नुस्खों का सहारा न लें। अभी भी कई लोग जख्म पर मिर्च या तेल लगाकर इलाज टालते हैं, यह बेहद खतरनाक है। रेबीज के शुरुआती लक्षणों में बुखार, सिर दर्द, कमजोरी, घबराहट और उल्टी शामिल हैं। संक्रमण बढ़ने पर मरीज को पानी और आवाज से डर लगने लगता है, लार गिरती है, भ्रम की स्थिति बन जाती है और अंत में मौत हो जाती है।
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जख्म को साबुन, साफ पानी से धोएं
सिविल सर्जन ने कहा कि आम आदमी क्लीनिकों में प्रशिक्षित स्टाॅफ और वैक्सीन का पूरा स्टॉक है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत इलाज मिल सके। उन्होंने अपील की है कि जिनके पास पालतू कुत्ते हैं वे समय पर उनका टीकाकरण जरूर करवाएं ताकि रेबीज को फैलने से रोका जा सके। डॉक्टरों की सलाह है कि यदि किसी जानवर ने काट लिया है, तो सबसे पहले जख्म को साबुन और साफ पानी से कम से कम 15 मिनट तक धोएं और फिर नजदीकी आम आदमी क्लीनिक या सरकारी अस्पताल में जाकर तुरंत इलाज करवाएं।