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वर्षों पहले बसे सेक्टरों में अभी तक नहीं डिस्पेंसरी और स्कूल की सुविधा
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मोहाली। वीआईपी शहर के 12 सेक्टरों को वर्षों पहले बसाते समय सरकार ने कई सपने दिखाए थे, लेकिन अभी तक इन सेक्टरों में कोई सरकारी डिस्पेंसरी नहीं खुल पाई है और न ही कोई सरकारी स्कूल। हालात यह हैं कि कई सेक्टरों में तो घर तक पहुंचने के लिए सीधे रास्ते तक नहीं हैं। इस वजह से करीब एक लाख लोग प्रभावित हो रहे हैं। लोग उक्त मूलभूत सुविधाओं के लिए अपनी आवाज सरकार तक पहुंचाने के लिए सरकारी दफ्तरों के अधिकारियों से लेकर मुख्यमंत्री तक से गुहार लगा रहे हैं। लेकिन इनके सपने फाइलों से आगे नहीं बढ़ पा रहे हैं।
सेक्टर-66 से 69 और सेक्टर-76 से 80 को करीब 22 साल पहले बसाने की दिशा में काम शुरू हुआ था। अब यह इलाके पूरी तरह से बस चुके हैं और कई नामी निजी अस्पताल, शिक्षण और सरकारी संस्थान इन सेक्टरों की शान हैं। इन सेक्टरों को इलाके के सबसे महंगे सेक्टरों में शामिल किया जाता है। लेकिन यहां पर आम लोगों के लिए कोई उचित सुविधा नहीं है। ऐसे में अगर रात के समय किसी के दांत में दर्द भी हो जाए तो इलाज के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर फेज-6 स्थित सरकारी अस्पताल में जाना पड़ता है। इसके अलावा यहां पर कोई प्राइमरी स्कूल तक नहीं है। हालांकि इलाके के लोग कई बार इन मुद्दों को संबंधित विभाग के अधिकारियों के सामने उठा चुके हैं। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सेक्टर-69 में सरकारी डिस्पेंसरी बनाने की दिशा में काम शुरू हुआ था, लेकिन इसके निर्माण के बाद इसके चालू होने में अभी और समय लग सकता है। ऐसे में रोजाना दिक्कत आ रही है। इसी तरह की दिक्कतें अन्य इलाकों में भी है।
नाम एरोसिटी हालात गांव से भी बदतर
एयरपोर्ट के बिल्कुल साथ 2010 में एरोसिटी और आईटी सिटी बसाई गईं थी। अब यहां पर लोगों ने अपने मकान आदि बनाकर रहना भी शुरू कर दिया है। लेकिन अभी तक यहां भी लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। क्योंकि इलाके में अभी तक कोई मार्केट नहीं है, यहां तक कि दूध के लिए मिल्क बूथ तक नहीं खुल पाए हैं। इसके अलावा स्कूल, डिस्पेंसरी या एटीएम तक की कोई सुविधा भी नहीं है। यहां पर बिजली का पूरा सिस्टम अंडरग्राउंड बनाया हुआ है। लेकिन पावरकॉम की टीम को इस संबंधी अनुभव न होने के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है, कई जगह पर अस्थायी खंभे लगाकर इन पर तार में जोड़ लगाकर लटकाए हुए हैं। गंदे पानी और यहां की सड़कों पर घूमते लावारिस पशुओं की समस्या से भी लोग परेशान हैं। एरोसिटी को देखने से लगता है कि मानो किसी गांव में आ गए हों।
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स्कूल-कॉलेज के लिए मुख्यमंत्री से उम्मीदें
इलाके में एक बढ़िया सरकारी स्कूल और इंजीनियरिंग कॉलेज की मांग काफी समय से उठ रही है। इस मामले को लेकर लोग सीएम ऑफिस के संपर्क में हैं। कंज्यूमर प्रोटेक्शन फेडरेशन मोहाली इस चीज को लेकर लंबे समय से संघर्ष करती आ रही है। इस फेडरेशन के सदस्यों का कहना है कि अब तो मुुख्यमंत्री अपने शहर के हैं। ऐसे में उम्मीद है कि जल्द ही सुनवाई होगी।
ये है पार्षद और अधिकारियों का कहना
सरकार अपना अधिवेशन याद करे
1968 में जब मोहाली को बसाने का काम शुरू हुआ था तो उस समय सरकार ने एक अधिवेशन जारी किया था। इसमें साफ लिखा था कि इलाके के प्रत्येक सेक्टर मेें डिस्पेंसरी, स्कूल और सामुदायिक केंद्र का निर्माण किया जाएगा। लेकिन अभी तक यह सुविधाएं लोगों को नहीं दी गई हैं। सेक्टर-69 में रिहायशी इलाके के लिए सीधी सड़क तक नहीं है।
-कुलदीप कौर धनोआ, पार्षद- सेक्टर-69
इलाज कहां करवाएं और बच्चे पढ़ने कहां जाएं
सेक्टर-76 से 80 तक में अभी तक कोई सरकारी डिस्पेंसरी नहीं है। हालात यह हैं कि इलाके के लोग मजबूरी में सोहाना के निजी अस्पताल में जाते हैं। सरकारी डिस्पेंसरी निर्माणाधीन है। सरकारी स्कूल भी अभी तक नहीं खुल पाया है। साइट की निशानदेही से प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया है। हालांकि वह इस मामले को गंभीरता से उठा रहे हैं।
- सुच्चा सिंह कलोड़, पार्षद वार्ड नंबर-40
डाकघर के लिए मिले अधिकारियों से
सेक्टर-76 से 80 में डाकघर की सुविधा नहीं है। इलाके के लोगों को गांव सोहाना में जाना पड़ता है। बुुजुर्गों को बड़ी दिक्कत आती है। इसके लिए सरकार को पत्र लिखा है कि इलाके में एक डाकघर खोला जाए। इसके अलावा वह इस मामले में चंडीगढ़ के सेक्टर-17 स्थित मुख्य डाकघर विभाग के उच्च अधिकारियों से मिलकर आए हैं।
-हरदियाल चंद बडवर, प्रधान रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन सेक्टर-89
प्रोजेक्ट पर काम कर रह स्वास्थ्य विभाग
सरकार की ओर से नए इलाके बसाए गए हैं इनमें डिस्पेंसरियां आदि स्थापित करने के लिए प्रक्रिया चल रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इमारतें बनाने के लिए साइटों की निशानदेही से लेकर अन्य बिंदुओं पर भी काम किया जा रहा है। इसके साथ ही पुरानी डिस्पेंसरियों को भी सुधारा जा रहा है। इनमें फर्नीचर से लेकर अन्य जरूरी सामान आना शुरू हो गया है। उम्मीद है कि लोगों को दिक्कत नहीं आएगी। -डॉ. आदर्श पाल कौर, सिविल सर्जन, मोहाली
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सेक्टर-66 से 69 और सेक्टर-76 से 80 को करीब 22 साल पहले बसाने की दिशा में काम शुरू हुआ था। अब यह इलाके पूरी तरह से बस चुके हैं और कई नामी निजी अस्पताल, शिक्षण और सरकारी संस्थान इन सेक्टरों की शान हैं। इन सेक्टरों को इलाके के सबसे महंगे सेक्टरों में शामिल किया जाता है। लेकिन यहां पर आम लोगों के लिए कोई उचित सुविधा नहीं है। ऐसे में अगर रात के समय किसी के दांत में दर्द भी हो जाए तो इलाज के लिए करीब 10 किलोमीटर दूर फेज-6 स्थित सरकारी अस्पताल में जाना पड़ता है। इसके अलावा यहां पर कोई प्राइमरी स्कूल तक नहीं है। हालांकि इलाके के लोग कई बार इन मुद्दों को संबंधित विभाग के अधिकारियों के सामने उठा चुके हैं। विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सेक्टर-69 में सरकारी डिस्पेंसरी बनाने की दिशा में काम शुरू हुआ था, लेकिन इसके निर्माण के बाद इसके चालू होने में अभी और समय लग सकता है। ऐसे में रोजाना दिक्कत आ रही है। इसी तरह की दिक्कतें अन्य इलाकों में भी है।
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नाम एरोसिटी हालात गांव से भी बदतर
एयरपोर्ट के बिल्कुल साथ 2010 में एरोसिटी और आईटी सिटी बसाई गईं थी। अब यहां पर लोगों ने अपने मकान आदि बनाकर रहना भी शुरू कर दिया है। लेकिन अभी तक यहां भी लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। क्योंकि इलाके में अभी तक कोई मार्केट नहीं है, यहां तक कि दूध के लिए मिल्क बूथ तक नहीं खुल पाए हैं। इसके अलावा स्कूल, डिस्पेंसरी या एटीएम तक की कोई सुविधा भी नहीं है। यहां पर बिजली का पूरा सिस्टम अंडरग्राउंड बनाया हुआ है। लेकिन पावरकॉम की टीम को इस संबंधी अनुभव न होने के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है, कई जगह पर अस्थायी खंभे लगाकर इन पर तार में जोड़ लगाकर लटकाए हुए हैं। गंदे पानी और यहां की सड़कों पर घूमते लावारिस पशुओं की समस्या से भी लोग परेशान हैं। एरोसिटी को देखने से लगता है कि मानो किसी गांव में आ गए हों।
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स्कूल-कॉलेज के लिए मुख्यमंत्री से उम्मीदें
इलाके में एक बढ़िया सरकारी स्कूल और इंजीनियरिंग कॉलेज की मांग काफी समय से उठ रही है। इस मामले को लेकर लोग सीएम ऑफिस के संपर्क में हैं। कंज्यूमर प्रोटेक्शन फेडरेशन मोहाली इस चीज को लेकर लंबे समय से संघर्ष करती आ रही है। इस फेडरेशन के सदस्यों का कहना है कि अब तो मुुख्यमंत्री अपने शहर के हैं। ऐसे में उम्मीद है कि जल्द ही सुनवाई होगी।
ये है पार्षद और अधिकारियों का कहना
सरकार अपना अधिवेशन याद करे
1968 में जब मोहाली को बसाने का काम शुरू हुआ था तो उस समय सरकार ने एक अधिवेशन जारी किया था। इसमें साफ लिखा था कि इलाके के प्रत्येक सेक्टर मेें डिस्पेंसरी, स्कूल और सामुदायिक केंद्र का निर्माण किया जाएगा। लेकिन अभी तक यह सुविधाएं लोगों को नहीं दी गई हैं। सेक्टर-69 में रिहायशी इलाके के लिए सीधी सड़क तक नहीं है।
-कुलदीप कौर धनोआ, पार्षद- सेक्टर-69
इलाज कहां करवाएं और बच्चे पढ़ने कहां जाएं
सेक्टर-76 से 80 तक में अभी तक कोई सरकारी डिस्पेंसरी नहीं है। हालात यह हैं कि इलाके के लोग मजबूरी में सोहाना के निजी अस्पताल में जाते हैं। सरकारी डिस्पेंसरी निर्माणाधीन है। सरकारी स्कूल भी अभी तक नहीं खुल पाया है। साइट की निशानदेही से प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पाया है। हालांकि वह इस मामले को गंभीरता से उठा रहे हैं।
- सुच्चा सिंह कलोड़, पार्षद वार्ड नंबर-40
डाकघर के लिए मिले अधिकारियों से
सेक्टर-76 से 80 में डाकघर की सुविधा नहीं है। इलाके के लोगों को गांव सोहाना में जाना पड़ता है। बुुजुर्गों को बड़ी दिक्कत आती है। इसके लिए सरकार को पत्र लिखा है कि इलाके में एक डाकघर खोला जाए। इसके अलावा वह इस मामले में चंडीगढ़ के सेक्टर-17 स्थित मुख्य डाकघर विभाग के उच्च अधिकारियों से मिलकर आए हैं।
-हरदियाल चंद बडवर, प्रधान रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन सेक्टर-89
प्रोजेक्ट पर काम कर रह स्वास्थ्य विभाग
सरकार की ओर से नए इलाके बसाए गए हैं इनमें डिस्पेंसरियां आदि स्थापित करने के लिए प्रक्रिया चल रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इमारतें बनाने के लिए साइटों की निशानदेही से लेकर अन्य बिंदुओं पर भी काम किया जा रहा है। इसके साथ ही पुरानी डिस्पेंसरियों को भी सुधारा जा रहा है। इनमें फर्नीचर से लेकर अन्य जरूरी सामान आना शुरू हो गया है। उम्मीद है कि लोगों को दिक्कत नहीं आएगी। -डॉ. आदर्श पाल कौर, सिविल सर्जन, मोहाली