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Mohali News: डिसॉल्यूशन साइंस में प्रगति और इसके दवा विकास में अनुप्रयोगों पर की चर्चा

Wed, 05 Mar 2025 01:57 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 05 Mar 2025 01:57 AM IST
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Discusses advances in dissolution science and its applications in drug development
मोहाली। राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (नाईपर) में मंगलवार को डिसॉल्यूशन साइंस और ड्रग डेवलपमेंट पर एक दिवसीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इसका आयोजन ऑल इंडिया फार्मास्युटिकल एसोसिएशन कंसोर्टियम (एआईपीएसी) की ओर से सोसाइटी फॉर फार्मास्युटिकल डिसॉल्यूशन साइंस (एसपीडीएस), फेडरेशन ऑफ फार्मा एंटरप्रेन्योर्स (एफओपीई), इंडियन ड्रग मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईडीएमए) और नाईपर के सहयोग से किया गया था। इसका उद्देश्य डिसॉल्यूशन साइंस में प्रगति, दवा विकास में इसके अनुप्रयोगों और क्षेत्र को आकार देने वाली उभरती प्रौद्योगिकियों पर चर्चा करने के लिए उद्योग के पेशेवरों, अकादमिक शोधकर्ताओं और नियामक विशेषज्ञों को एक साथ लाना है।
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इस मौके पर सुहास येवले, एसोसिएट डायरेक्टर, टेक्नो कमर्शियल, सोटेक्स इंडिया, प्रोफेसर डॉ. संयोग जैन, फार्मास्यूटिक्स विभाग, नाईपर, डॉ. आशुतोष शर्मा, एवीपी, विश्लेषणात्मक विकास, सन फार्मास्यूटिकल्स, प्रो. सरनजीत सिंह पूर्व प्रोफेसर और प्रमुख फार्मास्युटिकल विश्लेषण, नाईपर, सुदीप ओझा, महाप्रबंधक, विश्लेषणात्मक विकास, जाइडस लाइफसाइंसेज डॉ. हरगोविंद सेठ, प्रमुख-क्यूसी, विंडलास बायोटेक सहित शिक्षा और उद्योग जगत के प्रख्यात वक्ता शामिल हुए।
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संजीव कुमार, पंजाब राज्य औषधि नियंत्रक, मनमोहन तनेजा, हरियाणा के राज्य औषधि नियंत्रक और मनीष कपूर, राज्य औषधि नियंत्रक, हिमाचल प्रदेश कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे। डॉ. अरविंद कुमार बंसल, प्रोफेसर, फार्मास्यूटिक्स विभाग कार्यक्रम के अध्यक्ष और डॉ. सुखेंदु नंदी, सहायक प्रोफेसर, फार्मास्युटिकल विश्लेषण विभाग आयोजन के समन्वयक थे।
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उद्घाटन के दौरान अपने स्वागत भाषण में प्रो. एके बंसल ने उल्लेख किया कि डिसॉल्यूशन फार्मास्युटिकल विज्ञान की रीढ़ है और उत्पाद विकास के लिए एक महत्वपूर्ण बुनियादी उपकरण है। उन्होंने आगे उल्लेख किया कि डिसॉल्यूशन जैवउपलब्धता और जैवसमतुल्यता परीक्षण के लिए एक विकल्प है। उन्होंने कहा कि सीडीएससीओ साइट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 800 फॉर्मूलेशन में से 200 एनएसक्यू (मानक गुणवत्ता के नहीं) थे, जो उचित डिसॉल्यूशन परीक्षण के महत्व को समझाता है।

डॉ एल. रामास्वामी, एआईपीएसी के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक ने अपने संबोधन में कहा कि 2047 में फार्मा उद्योग के लिए लक्ष्य करीब 400-450 बिलियन डॉलर है और 50,000 करोड़ और 100 करोड़ की कंपनियों के लिए, दवा फॉर्मूलेशन की गुणवत्ता हमें प्रदान किए गए सभी उत्पादों की गुणवत्ता के समान होनी चाहिए।
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