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किताब घोटाला : नौ साल बाद भी अधर में जांच, पीएसईबी की चेतावनी- बंद नहीं होने देंगे केस
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मोहाली। पंजाब स्कूल शिक्षा बोर्ड की किताबों में घटिया कागज का इस्तेमाल कर छपाई के एक बड़े घोटाले को सामने आए नौ साल हो चुके हैं, लेकिन आज तक इस मामले में न कोई सजा हुई और न ही कोई ठोस कार्रवाई। मामला 2016 में दर्ज हुआ था, लेकिन अब तक जांच धीमी चल रही है। यह घोटाला तब उजागर हुआ जब पीएसईबी को यह पता चला कि पंजाब के विद्यार्थी के लिए छपी कई किताबों में राजस्थान बोर्ड का वॉटरमार्क वाला कागज इस्तेमाल किया गया है, जबकि नियमों के अनुसार किताबों में सिर्फ पीएसईबी का चिन्हित कागज ही इस्तेमाल किया जाना था। इस खुलासे के बाद बोर्ड ने जालंधर की ‘चॉइस प्रिंटर्स’ नामक कंपनी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई, जिस पर अतिरिक्त कॉपियां छापकर गैरकानूनी मुनाफा कमाने का आरोप है। किताबें जब्त कर पुलिस की कस्टडी में सौंप दी गई थीं, जहां वे आज तक धूल फांक रहीं हैं।
गवाही न देने की दलील, हकीकत कुछ और
हाल ही में पुलिस ने पीएसईबी को पत्र भेजकर कहा है कि सात में से किसी भी स्कूल ने मामले में गवाही नहीं दी है, लेकिन बोर्ड ने तुरंत इसे खारिज कर कहा कि चार स्कूलों ने बयान दर्ज कराए थे, जबकि तीन स्कूलों की तरफ से जवाब नहीं आया था। पुलिस का कहना है कि यही गवाही की कमी जांच में रुकावट बना हुआ है। बोर्ड के सूत्रों की मानें तो पुलिस अब सबूतों की कमी और गवाहों की अनुपस्थिति का हवाला देकर मामला बंद करने की सोच रही है। बोर्ड इस रुख से सहमत नहीं है। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यह सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि व्यवस्था को धोखा देने का सीधा प्रयास था। हम किसी भी हालत में इस मामले को बिना कानूनी अंजाम के बंद नहीं होने देंगे।
यह है मामला?
जांच में सामने आया कि राजस्थान बोर्ड का वॉटरमार्क लगे कागज पर किताबें छापी गईं यानी अधिक संख्या में किताबें छापी गईं और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। बोर्ड ने राज्यभर से किताबों के नमूने इकट्ठा किए और गड़बड़ी की पुष्टि के बाद ही एफआईआर दर्ज की थी। 2016 से अब तक ना कोई गिरफ्तारी, ना कोई चार्जशीट और ना ही कोई अदालती कार्रवाई हुई है।
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मैं हाल ही में बोर्ड में आया हूं, लेकिन इस मामले को गंभीरता से लूंगा और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। -अमरपाल सिंह, चेयरमैन, पीएसईबी
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गवाही न देने की दलील, हकीकत कुछ और
हाल ही में पुलिस ने पीएसईबी को पत्र भेजकर कहा है कि सात में से किसी भी स्कूल ने मामले में गवाही नहीं दी है, लेकिन बोर्ड ने तुरंत इसे खारिज कर कहा कि चार स्कूलों ने बयान दर्ज कराए थे, जबकि तीन स्कूलों की तरफ से जवाब नहीं आया था। पुलिस का कहना है कि यही गवाही की कमी जांच में रुकावट बना हुआ है। बोर्ड के सूत्रों की मानें तो पुलिस अब सबूतों की कमी और गवाहों की अनुपस्थिति का हवाला देकर मामला बंद करने की सोच रही है। बोर्ड इस रुख से सहमत नहीं है। बोर्ड के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि यह सिर्फ नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि व्यवस्था को धोखा देने का सीधा प्रयास था। हम किसी भी हालत में इस मामले को बिना कानूनी अंजाम के बंद नहीं होने देंगे।
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यह है मामला?
जांच में सामने आया कि राजस्थान बोर्ड का वॉटरमार्क लगे कागज पर किताबें छापी गईं यानी अधिक संख्या में किताबें छापी गईं और सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया। बोर्ड ने राज्यभर से किताबों के नमूने इकट्ठा किए और गड़बड़ी की पुष्टि के बाद ही एफआईआर दर्ज की थी। 2016 से अब तक ना कोई गिरफ्तारी, ना कोई चार्जशीट और ना ही कोई अदालती कार्रवाई हुई है।
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मैं हाल ही में बोर्ड में आया हूं, लेकिन इस मामले को गंभीरता से लूंगा और संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। -अमरपाल सिंह, चेयरमैन, पीएसईबी