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Mohali News: गुरुद्वारा अंब साहिब के पूर्व मैनेजर राजिंदर तोहरा की जमानत खारिज, आरोप गंभीर
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मोहाली। गुरुद्वारा अंब साहिब के पूर्व मैनेजर राजिंदर सिंह तोहरा की जमानत अर्जी खारिज कर दी गई है। यह मामला 44 मरला जमीन की कथित धोखाधड़ी से बिक्री से जुड़ा है। अदालत ने कहा कि आरोपी के खिलाफ आरोप गंभीर प्रकृति के हैं।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरदीप सिंह की अदालत ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि जमानत पर रिहा होने पर आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है। वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ भी कर सकता है। विवादित 44 मरला संपत्ति ‘गुरुद्वारा साहिब पातशाही-7’ के नाम पर दर्ज थी। जमाबंदी में भी गुरुद्वारा साहिब को ही जमीन का मालिक बताया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, जमीन की बिक्री के लिए 15 अक्तूबर 2025 की तारीख वाला एक जाली प्राधिकार पत्र इस्तेमाल किया गया। इस पर संबंधित प्राधिकरण के सचिव के जाली हस्ताक्षर थे। जांच में सामने आया कि एसजीपीसी की कार्यकारी समिति ने ऐसा कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया था।
धोखाधड़ी और रकम हस्तांतरण
अभियोजन पक्ष ने बताया कि जमीन की बिक्री से मिली रकम गुरुद्वारा साहिब के खाते में जमा नहीं की गई। इसके बजाय, यह रकम राजिंदर सिंह के नाम पर हस्तांतरित हुई। बिक्री विलेख के पंजीकरण के समय जारी चेक भी राजिंदर सिंह के नाम पर थे। अदालत ने यह भी कहा कि मामले में महत्वपूर्ण गवाहों के बयान अभी दर्ज होने बाकी हैं। आरोपी को जमानत देने से मुकदमे की कार्यवाही प्रभावित होने की संभावना है।
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अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश हरदीप सिंह की अदालत ने यह फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि जमानत पर रिहा होने पर आरोपी गवाहों को प्रभावित कर सकता है। वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ भी कर सकता है। विवादित 44 मरला संपत्ति ‘गुरुद्वारा साहिब पातशाही-7’ के नाम पर दर्ज थी। जमाबंदी में भी गुरुद्वारा साहिब को ही जमीन का मालिक बताया गया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, जमीन की बिक्री के लिए 15 अक्तूबर 2025 की तारीख वाला एक जाली प्राधिकार पत्र इस्तेमाल किया गया। इस पर संबंधित प्राधिकरण के सचिव के जाली हस्ताक्षर थे। जांच में सामने आया कि एसजीपीसी की कार्यकारी समिति ने ऐसा कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया था।
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धोखाधड़ी और रकम हस्तांतरण
अभियोजन पक्ष ने बताया कि जमीन की बिक्री से मिली रकम गुरुद्वारा साहिब के खाते में जमा नहीं की गई। इसके बजाय, यह रकम राजिंदर सिंह के नाम पर हस्तांतरित हुई। बिक्री विलेख के पंजीकरण के समय जारी चेक भी राजिंदर सिंह के नाम पर थे। अदालत ने यह भी कहा कि मामले में महत्वपूर्ण गवाहों के बयान अभी दर्ज होने बाकी हैं। आरोपी को जमानत देने से मुकदमे की कार्यवाही प्रभावित होने की संभावना है।
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