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पद संभालते ही एमई ने रद्द कर दिए 71 टेंडर, सीएम को दी शिकायत
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जीरकपुर। पंजाब की सबसे अमीर माने जाने वाली नगर काउंसिल जीरकपुर में नवनियुक्त म्यूनिसिपल इंजीनियर (एम ई) ने पद संभालते ही 71 टेंडर रद्द कर दिए। हैरानी की बात यह है कि इन टेंडरों को रद्द करने के लिए न तो नगर काउंसिल के प्रधान और न ही ईओ बल्कि उनके अधिकारों को भी सीधे तौर पर नजरअंदाज किया गया। वहीं, मामले को लेकर ठेकेदार ईश्वर दास ने इसकी शिकायत सीएम चन्नी को दी है।
कानून अनुसार, जब कभी भी पास किए टेंडरों को रद्द किया जाता है तो उसको रद्द करने का अधिकार या तो कमेटी प्रधान या फिर अधिकारियों के पास होता है। जिस तरह से नवनियुक्त म्यूनिसिपल इंजीनियर द्वारा इन टेंडरों को खुद ही रद्द किया गया है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि यह टेंडर अपने ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए किसी मंत्री की सिफारिश से रद्द करवाए गए हैं। टेंडर रद्द करने के लिए केवल म्यूनिसिपल इंजीनियर के ही हस्ताक्षर लिए गए हैं।
शिकायतकर्ता ईश्वर दास ने कहा कि यह टेंडर नियमों के उलट जाकर धक्केशाही करते हुए रद्द किए गए हैं। किसी भी टेंडर को रद्द करने की प्रक्रिया में टेक्निकल बीड खुलने से पहले ही टेंडर को रद्द किया जा सकता है। जबकि यहां 11 कामों की टेक्निकल बिड के साथ साथ फाइनेंशियल बिड भी खोल दी गई थी। उन्होंने कहा कि मेरे जैसे करीब 20 ठेकेदारों के करीब 50 लाख रुपये लगे हैं जोकि टेंडर रद्द होने के साथ ही खत्म हो जाएंगे। उन्होंने 8 करोड़ के टेंडर भरे हुए थे। कुल 71 टेंडर रद्द किए गए हैं जबकि 11 टेंडर तो शुरू कर दिए गए थे जोकि नियमों का उल्लंघन है।
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कोट्स
मैं रिकॉर्ड देखकर कल जवाब दूंगा। इस समय मैं कोई जवाब नहीं दे सकता बैठक में व्यस्त हूं।
-नरिंदर कुमार, एमई, नगर काउंसिल जीरकपुर
कोट्स...
मुझे इसके बारे में पता चला है। एमई द्वारा किसी तकनीकी खामी के चलते रद्द किए गए हैं। इनकी जांच करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
उदयवीर ढिल्लों, प्रधान, नगर काउंसिल जीरकपुर
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कानून अनुसार, जब कभी भी पास किए टेंडरों को रद्द किया जाता है तो उसको रद्द करने का अधिकार या तो कमेटी प्रधान या फिर अधिकारियों के पास होता है। जिस तरह से नवनियुक्त म्यूनिसिपल इंजीनियर द्वारा इन टेंडरों को खुद ही रद्द किया गया है। इससे साफ जाहिर हो रहा है कि यह टेंडर अपने ठेकेदारों को फायदा पहुंचाने के लिए किसी मंत्री की सिफारिश से रद्द करवाए गए हैं। टेंडर रद्द करने के लिए केवल म्यूनिसिपल इंजीनियर के ही हस्ताक्षर लिए गए हैं।
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शिकायतकर्ता ईश्वर दास ने कहा कि यह टेंडर नियमों के उलट जाकर धक्केशाही करते हुए रद्द किए गए हैं। किसी भी टेंडर को रद्द करने की प्रक्रिया में टेक्निकल बीड खुलने से पहले ही टेंडर को रद्द किया जा सकता है। जबकि यहां 11 कामों की टेक्निकल बिड के साथ साथ फाइनेंशियल बिड भी खोल दी गई थी। उन्होंने कहा कि मेरे जैसे करीब 20 ठेकेदारों के करीब 50 लाख रुपये लगे हैं जोकि टेंडर रद्द होने के साथ ही खत्म हो जाएंगे। उन्होंने 8 करोड़ के टेंडर भरे हुए थे। कुल 71 टेंडर रद्द किए गए हैं जबकि 11 टेंडर तो शुरू कर दिए गए थे जोकि नियमों का उल्लंघन है।
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मैं रिकॉर्ड देखकर कल जवाब दूंगा। इस समय मैं कोई जवाब नहीं दे सकता बैठक में व्यस्त हूं।
-नरिंदर कुमार, एमई, नगर काउंसिल जीरकपुर
कोट्स...
मुझे इसके बारे में पता चला है। एमई द्वारा किसी तकनीकी खामी के चलते रद्द किए गए हैं। इनकी जांच करने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।
उदयवीर ढिल्लों, प्रधान, नगर काउंसिल जीरकपुर