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Mohali News: तीन महीने में 72 सड़क हादसों में 75 ने गंवाई जान

Wed, 02 Apr 2025 01:54 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Wed, 02 Apr 2025 01:54 AM IST
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75 people lost their lives in 72 road accidents in three months
इस मार्ग पर होते हैं हादसे। संवाद 
मोहाली। हादसों को रोकने के लिए पंजाब पुलिस हाउसिंग कारपोरेशन की ओर से बेशक शहर में ट्रैफिक नियम लागू करने के लिए हाई रेजुलेशन कैमरे लगाए जा चुके हैं, लेकिन इसके बाद भी हादसे रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। जिले में अब भी 92 ब्लैक स्पॉट हैं। इन ब्लैक स्पॉट को प्रशासन की ऑफिशियल वेबसाइट पर देखा जा सकता है। जिले में सड़क हादसे घटने की जगह बढ़ रहे हैं। मोहाली में हर माह 22 से 26 लोग हादसों में अपनी जान गवां रहे हैं।
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अगर इस साल के पहले तीन महीनों पर नजर डालें तो 72 सड़क हादसों में 75 लोगों की मौत हुई है। जनवरी माह में 20 सड़क हादसों में 22 लोगों की मौत हुई। फरवरी में 26 सड़क हादसों में 25 लोगों की जान गई और मार्च में 26 हादसों में 28 लोगों ने अपनी जान गंवाई। इसमें ज्यादातर दोपहिया वाहन सवार और पैदल चलने वाले लोगों की जानें जा रही हैं। गत वर्ष की बात करें तो 11 माह में कुल 465 हादसों में 259 लोगों की जानें जा चुकी हैं। कुल 247 हादसे जानलेवा साबित हुए थे।
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वहीं 207 हादसों में लोग गंभीर चोटों के शिकार हुए। 2023 के शुरुआती 11 माह में करीब 50 प्रतिशत हादसों में दोपहिया वाहन सवार शामिल थे। इससे पहले 2022 में 494 हादसों में 296 लोगों की जान गई। 2021 में कुल 255 हादसे हुए, जिनमें 151 लोगों की जान गई थी। इसी तरह वर्ष 2020 में 257 हादसों में 158 जानलेवा साबित हुए।
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लापरवाही से टक्कर मारने पर अधिक हो रहीं दुर्घटनाएं
आंकड़ों के मुताबिक ज्यादातर हादसों में लापरवाही से वाहन चलाना है। इसमें आढ़े, तिरछे और पीछे से टक्कर मारना है। यह आंकड़ा कुल हादसों का 30 प्रतिशत था। इसके बाद 26 प्रतिशत हादसों में पैदल लोगों के साथ हादसे हुए। वहीं ज्यादातर सड़क हादसे शाम को 6 बजे से 9 बजे या फिर 11 बजे के बीच हुए हैं। 11 बजे के बाद रेड लाइट ब्लिंक करने लगती है।

ये हैं संवेदनशील क्षेत्र
जिले में सबसे अधिक हादसे एयरपोर्ट रोड, सोहाना, खरड़, जीरकपुर, लालड़ू और डेराबस्सी हो रहे हैं। 2024 में जिले में हुए हादसों में 62 प्रतिशत हादसे इन्हीं जगहों पर हुए हैं। हादसों का कारण गलत लेन पर ड्राइविंग और तेज रफ्तार है। पहले ई-चालान की कमी मानी जाती थी लेकिन अब वह भी शुरु हो गए हैं, लेकिन लोगों में आज भी चालान का भय नहीं है। यातायात पुलिसकर्मियों का बेहद कम मौजूदगी भी यातायात नियमों का उल्लंघन की बड़ी वजह बन रही है। कई लोग लाल बत्ती का उल्लंघन कर रहे हैं और लेन बदलते हैं। वहीं जिले में बिना हेलमेट के दोपहिया वाहन चलाने की भी कई घटनाएं सामने आती हैं। यह नहीं ई-चालान नहीं हो रहे। चालान काटे भी जा रहे हैं और लोग जुर्माना भी भर रहे हैं लेकिन नियम टूटने में कमी नहीं आ रही है। प्रशासन को इन्हें रोकने के लिए और कड़ा रुख अपनाने की जरूरत है।


जानें बचानी है तो नियमों का सख्ती से पालन करवाएं : एनजीओ
इस मुद्दे पर पुकार एनजीओ की फाउंडर शिवानी रैना और उनकी टीम समय-समय पर शहर की आवाज उठाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि जिले में स्मार्ट कैमरे लगाना ही काफी नहीं होगा, यातायात के नियमों का सख्ती से पालना करवाया जाना भी जरूरी है। चंडीगढ़ की तर्ज पर मोहाली में लाल बत्ती और जेबरा क्रॉसिंग का उल्लंघन रोकना होगा। पैदल लोगों के लिए सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना होगा। साइकिल सवारों की जान बचाने के लिए साइकिल ट्रैक भी बनाए जाने की जरूरत है।



ब्लैक स्पॉट के लिए ट्रैफिक एडवाइजरी टीम ट्रैफिक पुलिस से डेटा लेती है। वह टीम उसे स्टडी करती है। इसके बाद ब्लैक स्पॉट को सही करने का सुझाव संबंधित अधिकारियों जैसे कि अगर नेशनल हाइवे अथॉरिटी का है या गमाडा का है, उसे ठीक करने के लिए भेजा जाता है। इसमें ट्रैफिक पुलिस का कोई रोल नहीं रहता। वहीं, रात के समय 11 बजे के बाद जो लाइट ब्लिंक होती है उसके लिए पहले ही गमाडा और कार्पोरेशन को लिखकर भेजा जा चुका है कि यह ट्रैफिक लाइटें 1 बजे से पहले उनका टाइमर बंद ना हो। कई जगह पर यह शुरु हो गया है कई जगह पर रहता है। - हरिंदर सिंह मान, एसपी ट्रैफिक
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