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अवैध कब्जे कैसे हटाएं, गनमैन मुलाजिमों पर असाल्टे तान देते हैं
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मोहाली। नगर निगम की मीटिंग में सोमवार को शहर के विभिन्न हिस्सों में हुए अतिक्रमण का मामला गरमाया रहा। कुछ पार्षदों की दलील थी कि नगर निगम वाले बड़े लोगों पर हाथ नहीं डालते, जबकि छोटे लोगों पर कार्रवाई की जाती है। वहीं, फेज-10 में कब्जे हटाने गई नगर निगम की टीम पर हुए हमले व मशीनरी जब्त करने का मुद्दा भी गरमाया रहा। निंदा प्रस्ताव डालने तक का भी सुझाव दिया गया। हालांकि कमिश्नर भूपिंदर सिंह ने कहा कि ऐसी बात नहीं है कि उनकी टीम अतिक्रमण हटाने के लिए कार्रवाई नहीं करती। उन्होंने कहा कि उनके पास अभी तक भी अपनी टीम के लिए सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं, जबकि लुधियाना और जालंधर जैसे शहरों में अतिक्रमण हटाने के लिए एक पूरा विंग है, जो डीएसपी की अगुवाई में काम करते हैं। जब भी उनकी टीम बड़े लोगों के कब्जे हटाने जाती है, तो बड़े लोगों के गनमैन अपनी असाल्ट तान देते हैं, जबकि उनकी टीमें डंडे से मुकाबला नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि उनकी टीम को सुरक्षा मुहैया करवाई जाए। इसके बाद उनकी वर्किंग देखी जाए। उन्होंने कि ऐसे में अगर काम नहीं होगा तो सबसे पहले मुझे चार्जशीट कर दिया जाए। वह इस चीज से पीछे नहीं हटेंगे।
पुलिस के सीनियर अधिकारियों ने किए हैं अवैध कब्जे
डिप्टी मेयर मनजीत सिंह सेठी ने कहा कि कमिश्नर के अपने वार्ड में एक कोठी मालिक ने पूरा पार्क दबा कर अंदर गजीबो तक बनाया हुआ है। जो सीधे तौर पर निगम कर्मचारियों को धमकियां देता है, परंतु कोई कार्रवाई नहीं होती। इसके अलावा उन्होंने दो सीनियर पुलिस अधिकारियों के नाम भी मीटिंग में खुलकर लिए, जिन्होंने अवैध कब्जे किए हुए हैं और उन पर कार्रवाई नहीं की जा रही।
पटवारी ने लगाया यह आरोप
अकाली पार्षद सुखदेव सिंह पटवारी ने तो सीधे निगम के सीनियर अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उनके वार्ड में सभी निवासी कब्जे हटाने के लिए तैयार हैं, लेकिन निगम के उच्च अधिकारियों ने खुद ही एक आईएएस अफसर के कब्जे हटाने के लिए अपने कर्मचारियों को भेजने से इंकार कर दिया। पटवारी ने आरोप लगाया कि आम लोगों के कब्जे हटाने के लिए तो निगम भाग कर काम करती है, लेकिन जहां प्रभाव वाले लोगों की बात हो तो अधिकारी कार्रवाई तो क्या करनी, ऐसे लोगों के घरों के नजदीक जाने से भी डरते हैं।
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स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का मुद्दा भी उठा
मीटिंग में स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का मुद्दा भी मुद्दा उठा। पार्षदों का कहना था कि जो प्राइवेट कंपनियों को स्पोर्ट्स कांप्लेक्स दिए गए हैं, उनमें बच्चों से अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं। दो हजार तक फीस ली जा रही है, जबकि सरकारी फीस ढाई सौ रुपये तक है। ऐसे में दो कांप्लेक्स जो अभी तक निगम के पास हैं, उन्हें निगम खुद चलाए या स्पोर्ट्स विभाग को दिए जाएं, जिससे लोगों से हो रही लूट को रोका जाए।
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पुलिस के सीनियर अधिकारियों ने किए हैं अवैध कब्जे
डिप्टी मेयर मनजीत सिंह सेठी ने कहा कि कमिश्नर के अपने वार्ड में एक कोठी मालिक ने पूरा पार्क दबा कर अंदर गजीबो तक बनाया हुआ है। जो सीधे तौर पर निगम कर्मचारियों को धमकियां देता है, परंतु कोई कार्रवाई नहीं होती। इसके अलावा उन्होंने दो सीनियर पुलिस अधिकारियों के नाम भी मीटिंग में खुलकर लिए, जिन्होंने अवैध कब्जे किए हुए हैं और उन पर कार्रवाई नहीं की जा रही।
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पटवारी ने लगाया यह आरोप
अकाली पार्षद सुखदेव सिंह पटवारी ने तो सीधे निगम के सीनियर अधिकारियों पर आरोप लगाया कि उनके वार्ड में सभी निवासी कब्जे हटाने के लिए तैयार हैं, लेकिन निगम के उच्च अधिकारियों ने खुद ही एक आईएएस अफसर के कब्जे हटाने के लिए अपने कर्मचारियों को भेजने से इंकार कर दिया। पटवारी ने आरोप लगाया कि आम लोगों के कब्जे हटाने के लिए तो निगम भाग कर काम करती है, लेकिन जहां प्रभाव वाले लोगों की बात हो तो अधिकारी कार्रवाई तो क्या करनी, ऐसे लोगों के घरों के नजदीक जाने से भी डरते हैं।
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स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का मुद्दा भी उठा
मीटिंग में स्पोर्ट्स कांप्लेक्स का मुद्दा भी मुद्दा उठा। पार्षदों का कहना था कि जो प्राइवेट कंपनियों को स्पोर्ट्स कांप्लेक्स दिए गए हैं, उनमें बच्चों से अधिक पैसे वसूले जा रहे हैं। दो हजार तक फीस ली जा रही है, जबकि सरकारी फीस ढाई सौ रुपये तक है। ऐसे में दो कांप्लेक्स जो अभी तक निगम के पास हैं, उन्हें निगम खुद चलाए या स्पोर्ट्स विभाग को दिए जाएं, जिससे लोगों से हो रही लूट को रोका जाए।