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बठिंडा में 12 एमएम बारिश, खेत में बिछी फसल
ब्यूरो/अमर उजाला, बठिंडा
Updated Sat, 12 Mar 2016 09:46 PM IST
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बठिंडा में बरसात के बाद भ्ारा पानी।
- फोटो : अमर उजाला
मौसम विभाग के अनुसार तेज बारिश और हवा से किसानों की सैकड़ों एकड़ फसल बर्बाद हो गई है।
मौसम विभाग के अधिकारी सुरिंदर सिंह ने बताया कि शनिवार सुबह सात बजे तक 11.4 एमएम बारिश हुई थी। सुबह सात बजे के बाद शनिवार को बारिश हुई है वह 12 एमएम के करीब है। उनका कहना है कि बिना मौसम जो बारिश होती है वह इतनी ही होती है। रविवार को भी इसी तरह बारिश हो सकती है। सोमवार को थोड़ा बहुत मौसम साफ होने की संभावना है।
वहीं तेज बारिश के साथ ओले पड़ने से जनजीवन तो प्रभावित हुआ ही है खेतों में पक कर तैयार हो चुकी गेहूं की सैकड़ों एकड़ फसल भी गिर चुकी है।
बारिश के कारण जिले के किसान बलवंत सिंह की 6 एकड़, अमरजीत सिंह की 7 एकड़, गुरमीत सिंह की 30 एकड़, करनैल सिंह की 15 एकड़, मिंटू की पांच एकड़, गुरदयाल सिंह की 40 एकड़ और गुरुदेव सिंह व जगदेव सिंह की 50 एकड़ फसल जमीन पर बिछ गई।
भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष शिंगारा सिंह मान ने प्रदेश सरकार से मांग की कि पीड़ित किसानों को तुरंत फसल बर्बाद होने का मुआवजा दिया जाए। अगली फसल खेतों में लगाने के लिए अलग से आर्थिक तौर पर सहायता दी जाए। उन्हाेंने कहा कि कुदरत इस कहर के चलते छोटे व बडे़ कर्जदार किसान अपना कर्ज चुकाने में असमर्थ होंगे। प्रदेश सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए ।
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मौसम विभाग के अधिकारी सुरिंदर सिंह ने बताया कि शनिवार सुबह सात बजे तक 11.4 एमएम बारिश हुई थी। सुबह सात बजे के बाद शनिवार को बारिश हुई है वह 12 एमएम के करीब है। उनका कहना है कि बिना मौसम जो बारिश होती है वह इतनी ही होती है। रविवार को भी इसी तरह बारिश हो सकती है। सोमवार को थोड़ा बहुत मौसम साफ होने की संभावना है।
वहीं तेज बारिश के साथ ओले पड़ने से जनजीवन तो प्रभावित हुआ ही है खेतों में पक कर तैयार हो चुकी गेहूं की सैकड़ों एकड़ फसल भी गिर चुकी है।
बारिश के कारण जिले के किसान बलवंत सिंह की 6 एकड़, अमरजीत सिंह की 7 एकड़, गुरमीत सिंह की 30 एकड़, करनैल सिंह की 15 एकड़, मिंटू की पांच एकड़, गुरदयाल सिंह की 40 एकड़ और गुरुदेव सिंह व जगदेव सिंह की 50 एकड़ फसल जमीन पर बिछ गई।
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भारतीय किसान यूनियन के अध्यक्ष शिंगारा सिंह मान ने प्रदेश सरकार से मांग की कि पीड़ित किसानों को तुरंत फसल बर्बाद होने का मुआवजा दिया जाए। अगली फसल खेतों में लगाने के लिए अलग से आर्थिक तौर पर सहायता दी जाए। उन्हाेंने कहा कि कुदरत इस कहर के चलते छोटे व बडे़ कर्जदार किसान अपना कर्ज चुकाने में असमर्थ होंगे। प्रदेश सरकार को इसे गंभीरता से लेना चाहिए ।
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