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महुआ मोइत्रा पहुंचीं थाने: सीईसी ज्ञानेश कुमार पर लगाया आपराधिक आचरण का आरोप; एसआईआर को लेकर क्या विवाद?

Thu, 24 Sep 2026 04:31 PM IST
राकेश कुमार एएनआई, नई दिल्ली।
एएनआई, नई दिल्ली। Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 24 Sep 2026 04:31 PM IST
सार

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ पुलिस में शिकायत करते हुए मतदाता सूची और चुनाव आयोग के आईटी सिस्टम को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने फॉर्म-6 में एसआईआर से जुड़ा सवाल जोड़ने और मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने पर सवाल उठाया। उनका दावा है कि दो चुनाव आयुक्तों ने भी कई फैसलों पर आपत्ति दर्ज की थी। हालांकि, चुनाव आयोग ने सभी फैसलों को तीनों आयुक्तों की मंजूरी मिलने की बात कही है।
 

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Mahua Moitra complaint against CEC Gyanesh Kumar over voter list and SIR controversy
महुआ मोइत्रा, टीएमसी, सांसद - फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा गुरुवार को दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन पहुंचीं। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की बात कही। मोइत्रा ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार ने ऐसे काम किए हैं जिन्हें आपराधिक आचरण माना जाना चाहिए।
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तीन सदस्यीय आयोग में मतभेद का दावा
महुआ मोइत्रा ने कहा कि चुनाव आयोग तीन चुनाव आयुक्तों वाला संस्थान है, ताकि फैसलों में नियंत्रण और संतुलन बना रहे। उन्होंने कहा कि आम तौर पर बहुमत का फैसला लागू होता है। उनका आरोप है कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 मौकों पर ज्ञानेश कुमार से जुड़े फैसलों या आदेशों पर आपत्ति जताई। इतना ही नहीं, एक दिन में चार-चार बार भी आपत्ति दर्ज की गई।
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आईटी सिस्टम को लेकर भी उठाए सवाल
महुआ मोइत्रा ने चुनाव आयोग के आईटी सिस्टम के केंद्रीकरण पर भी सवाल उठाया। उनका आरोप है कि आईटी से जुड़े काम को इस तरह केंद्रीकृत किया गया कि स्थानीय स्तर पर काम करने वाले अधिकारियों की भूमिका और सिस्टम तक उनकी पहुंच प्रभावित हुई। उन्होंने विशेष रूप से डीजी आईटी सीमा खन्ना का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि सॉफ्टवेयर के जरिए स्थानीय अधिकारियों को दरकिनार किया गया।
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वोटर लिस्ट में स्थानीय अधिकारियों की क्या भूमिका?
टीएमसी सांसद ने कहा कि विधानसभा क्षेत्र और बूथ स्तर पर मतदाता सूची से जुड़े काम की जिम्मेदारी स्थानीय अधिकारियों की होती है। इनमें चुनाव पंजीकरण अधिकारी यानी ईआरओ और बूथ लेवल ऑफिसर यानी बीएलओ शामिल हैं। उनका आरोप है कि केंद्रीकृत सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल से इन अधिकारियों को सिस्टम से बाहर कर दिया गया और मतदाता सूची में बदलाव किए गए।

फॉर्म-6 में नए सवाल को लेकर विवाद
मोइत्रा ने फॉर्म-6 को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए। यह वह फॉर्म है जिसका इस्तेमाल कोई व्यक्ति पहली बार मतदाता के रूप में अपना नाम दर्ज कराने के लिए करता है। उनके मुताबिक, इसमें नया सवाल जोड़ा गया कि क्या आवेदक, उसके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर की मतदाता सूची में था।

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दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति का किया जिक्र
महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि चुनाव आयुक्त संधू और जोशी ने इस बदलाव पर आपत्ति जताई थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दोनों आयुक्तों ने फॉर्म-6 में एसआईआर से जुड़ा सवाल जोड़ने पर सवाल उठाए थे और कहा था कि निर्धारित नियमों में बदलाव किए बिना ऐसा नहीं किया जा सकता। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सवाल बाद में फॉर्म-6 में मौजूद रहा और 21 सितंबर तक इसे हटाया नहीं गया था।


पहली बार वोट देने वाले युवाओं को लेकर चिंता
महुआ मोइत्रा ने कहा कि इस बदलाव से ऐसे नए मतदाताओं के सामने परेशानी खड़ी हो सकती है, जिनके माता-पिता या दादा-दादी का नाम पिछली एसआईआर सूची में नहीं था। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी 18 साल के नए मतदाता के परिवार का नाम पुरानी सूची में नहीं है तो वह खुद को मतदाता सूची में कैसे दर्ज कराएगा।

13 करोड़ नाम हटने का भी दावा
टीएमसी सांसद ने  कहा कि देशभर में एसआईआर के दौरान करीब 13 करोड़ नाम ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से हटाए गए हैं और इसका असर आगे नई पीढ़ी पर भी पड़ सकता है। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एसआईआर के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटे हैं।
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