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एक्साइज ड्यूटी के विरोध में ज्वेलर्स ने चाय बेची
ब्यूरो/अमर उजाला, लुधियाना
Updated Sun, 13 Mar 2016 08:46 PM IST
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लुधियाना में प्रदर्शन करते ज्वेलर।
- फोटो : अमर उजाला
एक्साइज ड्यूटी और सीमा उत्पाद शुल्क के खिलाफ चल रहा ज्वेलर्स और स्वर्णकार संघ का आक्रोश दिन पर दिन बढ़ता जा रहा है। दो सप्ताह से हड़ताल पर उतरे आभूषण विक्रेता, स्वर्णकार व ज्वेलर्स ने रविवार को अपने शोरूमों के बाहर टी-स्टाल लगाकर ग्राहकों को चाय बेचने का काम शुरू कर दिया।
उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह वह भी अब चाय का व्यापार करेंगे। रोष प्रदर्शन पर उतरे ज्वेलर्स व स्वर्णकारों ने अपनी ज्वेलरी दुकानों को भी टी स्टाल का स्वरूप देकर आनंद टी स्टाल, विशाल टी स्टाल, खन्ना टी स्टाल, प्रेम टी स्टाल, निक्कामल टी स्टाल, पैलेस टी स्टाल, धीर टी स्टाल, जयपुर टी स्टाल का नाम दिया। उन्होंने राहगीरों को अपनी रोजी-रोटी की दुहाई देते हुए पांच रुपये कप चाय बेची।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ऑल इंडिया संघ के प्रधान आनंद सीकरी ने बताया कि सरकार ने आभूषण व्यापार को एक प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी थोपकर बर्बाद कर दिया है। एक्साइज ड्यूटी जैसे काले कानून के अंतर्गत अफसरशाही, रिश्वतखोरी एवं विभागीय अधिकारियों की जलालत सहने से बेहतर वे चाय बेचकर अपना गुजारा करना ज्यादा सुरक्षित समझेंगे।
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इस व्यापार में कम से कम उन्हें जलालत नहीं सहनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि चाय बेचते हुए सभी आभूषण विक्रेता खुद को गौरवान्वित महसूस करेंगे क्योंकि प्रधानमंत्री भी चाय बेचने वाले परिवार से संबंध रखते हैं। वहीं दूसरी ओर टी स्टाल पर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री द्वारा किसी प्रकार का कोई टैक्स भी नहीं लगाया गया।
ऑल इंडिया ज्वेलर्स ट्रेड फोरम के प्रवक्ता मनोज ढांडा, मीनू खन्ना, विनीत ढांडा ने कहा कि आभूषण विक्रेता और स्वर्णकार संघ टैक्स देने के खिलाफ नहीं हैं, वे केवल एक्साइज ड्यूटी के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को टैक्स चाहिए तो सरकार एक प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी की जगह दो प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ावा कर सकती है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि आभूषण व्यापार व ज्वेलरी व्यापार को एक्साइज ड्यूटी से परे रखते हुए कस्टम ड्यूटी जैसी सिंगल टैक्स प्रणाली में ही रखते हुए अतिरिक्त टैक्स लेकर सरकार और व्यापार दोनों के हित में नीतियों का गठन किया जाए। रविवार को रोष रैली में विभिन्न औद्योगिक, व्यापारिक और ट्रेड संस्थाओं के प्रतिनिधियों के अलावा पंकज गुप्ता, प्रदीप मित्तल, अजय बजाज, अमन धीर, गौरव जैन और गौतम जैन शामिल हुए।
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उनका कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह वह भी अब चाय का व्यापार करेंगे। रोष प्रदर्शन पर उतरे ज्वेलर्स व स्वर्णकारों ने अपनी ज्वेलरी दुकानों को भी टी स्टाल का स्वरूप देकर आनंद टी स्टाल, विशाल टी स्टाल, खन्ना टी स्टाल, प्रेम टी स्टाल, निक्कामल टी स्टाल, पैलेस टी स्टाल, धीर टी स्टाल, जयपुर टी स्टाल का नाम दिया। उन्होंने राहगीरों को अपनी रोजी-रोटी की दुहाई देते हुए पांच रुपये कप चाय बेची।
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प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे ऑल इंडिया संघ के प्रधान आनंद सीकरी ने बताया कि सरकार ने आभूषण व्यापार को एक प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी थोपकर बर्बाद कर दिया है। एक्साइज ड्यूटी जैसे काले कानून के अंतर्गत अफसरशाही, रिश्वतखोरी एवं विभागीय अधिकारियों की जलालत सहने से बेहतर वे चाय बेचकर अपना गुजारा करना ज्यादा सुरक्षित समझेंगे।
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इस व्यापार में कम से कम उन्हें जलालत नहीं सहनी पड़ेगी। उन्होंने कहा कि चाय बेचते हुए सभी आभूषण विक्रेता खुद को गौरवान्वित महसूस करेंगे क्योंकि प्रधानमंत्री भी चाय बेचने वाले परिवार से संबंध रखते हैं। वहीं दूसरी ओर टी स्टाल पर प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री द्वारा किसी प्रकार का कोई टैक्स भी नहीं लगाया गया।
ऑल इंडिया ज्वेलर्स ट्रेड फोरम के प्रवक्ता मनोज ढांडा, मीनू खन्ना, विनीत ढांडा ने कहा कि आभूषण विक्रेता और स्वर्णकार संघ टैक्स देने के खिलाफ नहीं हैं, वे केवल एक्साइज ड्यूटी के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि यदि सरकार को टैक्स चाहिए तो सरकार एक प्रतिशत एक्साइज ड्यूटी की जगह दो प्रतिशत इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ावा कर सकती है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि आभूषण व्यापार व ज्वेलरी व्यापार को एक्साइज ड्यूटी से परे रखते हुए कस्टम ड्यूटी जैसी सिंगल टैक्स प्रणाली में ही रखते हुए अतिरिक्त टैक्स लेकर सरकार और व्यापार दोनों के हित में नीतियों का गठन किया जाए। रविवार को रोष रैली में विभिन्न औद्योगिक, व्यापारिक और ट्रेड संस्थाओं के प्रतिनिधियों के अलावा पंकज गुप्ता, प्रदीप मित्तल, अजय बजाज, अमन धीर, गौरव जैन और गौतम जैन शामिल हुए।