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रूस से तेल खरीदना पड़ेगा महंगा?: भारत समेत 10 देशों पर 100% टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका, संशोधन बिल पेश

Tue, 15 Sep 2026 07:51 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Tue, 15 Sep 2026 07:51 AM IST
सार

अमेरिका में रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले विधेयक को लेकर सांसदों ने कई संशोधन पेश किए हैं। इनमें भारत समेत रूस के 10 प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के नाम स्पष्ट रूप से शामिल करने और इन देशों पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने का प्रस्ताव है।

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Will buying oil from Russia become costlier US prepares impose 100% tariffs on 10 countries including India
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति पुतिन। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

रूस पर प्रतिबंध लगाने वाले अमेरिकी विधेयक को प्रतिनिधि सभा से पारित कराने की समयसीमा नजदीक आने के बीच अमेरिकी सांसदों ने इसमें कई संशोधन पेश किए हैं। इनमें से एक संशोधन में रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों के नाम स्पष्ट रूप से शामिल करने का प्रस्ताव है, जिसमें भारत भी शामिल है। वहीं, एक अन्य संशोधन में रूस के व्यापारिक साझेदारों पर टैरिफ लगाने का प्रावधान पूरी तरह हटाने की मांग की गई है।

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भारत समेत 10 देशों के नाम शामिल करने का प्रस्ताव
डेमोक्रेटिक सांसद स्टेनी होयर द्वारा पेश संशोधन में चीन, भारत, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाक रिपब्लिक, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), सिंगापुर, कजाखस्तान और किर्गिज रिपब्लिक को उन देशों की सूची में शामिल करने का प्रस्ताव है, जिन पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाया जा सकता है। यह संशोधन ऐसे समय आया है जब रूस पर प्रतिबंध से जुड़े विधेयक को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में पारित कराने के लिए सांसदों के पास बेहद कम समय बचा है।
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सीनेट से 86-11 मतों से पारित हो चुका है विधेयक
‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट’ को अमेरिकी सीनेट ने पिछले महीने 86-11 के भारी बहुमत से पारित किया था। विधेयक में रूस के शीर्ष नेतृत्व और ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ उन जहाजों पर भी कार्रवाई का प्रावधान है, जिन्हें रूस के खिलाफ लगे प्रतिबंधों से बचते हुए तेल की आपूर्ति करने वाले ‘शैडो फ्लीट’ के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिका का मानना है कि रूस के कच्चे तेल का व्यापार यूक्रेन के खिलाफ जारी युद्ध के लिए वित्तीय मदद मुहैया करा रहा है।
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भारत और चीन जैसे देशों पर 100 फीसदी टैरिफ का प्रावधान
सीनेट से 7 अगस्त को पारित विधेयक में रूस के व्यापारिक साझेदार देशों के नाम सीधे तौर पर नहीं दिए गए हैं। इसमें तेल और गैस का सबसे अधिक मात्रा में आयात करने वाले पांच प्रमुख देशों का उल्लेख किया गया है। विधेयक राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को रूस के प्रमुख तेल व्यापारिक साझेदारों, जिनमें चीन और भारत भी शामिल हैं, पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव करता है। अब इस विधेयक को राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजे जाने से पहले प्रतिनिधि सभा से पारित होना जरूरी है। प्रतिनिधि सभा के पास मध्यावधि चुनाव से पहले शुरुआती अवकाश पर जाने से पहले केवल चार कार्यदिवस बचे हैं। अमेरिकी मध्यावधि चुनाव 3 नवंबर को होने हैं।

ग्रेगरी मीक्स ने टैरिफ वाला पूरा प्रावधान हटाने की मांग की
डेमोक्रेटिक सांसद ग्रेगरी मीक्स, जो ट्रंप को अतिरिक्त टैरिफ लगाने के अधिकार दिए जाने के मुखर विरोधी हैं, ने एक संशोधन पेश कर विधेयक की पूरी धारा 113 को हटाने का प्रस्ताव दिया है। इसी धारा में राष्ट्रपति को रूस के व्यापारिक साझेदार देशों पर व्यापक द्वितीयक टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात कही गई है। मीक्स के इस संशोधन को तीन अन्य सांसदों का समर्थन भी मिला है। रूस प्रतिबंध विधेयक में किए गए ये संशोधन सोमवार को प्रतिनिधि सभा की रूल्स कमेटी ने सार्वजनिक किए।


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राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर छूट और यूक्रेन के लिए 15 अरब डॉलर का प्रस्ताव
मीक्स ने एक अन्य संशोधन के जरिए राष्ट्रपति को किसी विदेशी व्यक्ति पर लागू प्रतिबंधों से 90 दिनों की अवधि के लिए छूट देने का अधिकार देने का प्रस्ताव रखा है। इस अवधि को अतिरिक्त 90-90 दिनों के लिए बढ़ाया जा सकेगा, यदि ऐसा करना अमेरिका की ‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बेहद महत्वपूर्ण’ हो। इसके अलावा मीक्स ने यूक्रेन को 15 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष ऋण उपलब्ध कराने का प्रस्ताव भी रखा है। इस राशि का इस्तेमाल यूक्रेन को रक्षा संबंधी उपकरण और सेवाओं की खरीद के लिए वित्तपोषण उपलब्ध कराने में किया जा सकेगा।
 

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