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मेधावी विद्यार्थियों को दस रुपये वजीफा
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदकोट
Updated Thu, 25 Feb 2016 02:44 PM IST
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राज्य के शिक्षा विभाग ने महंगाई के इस दौर में सिर्फ 10 रुपये प्रतिमाह की वजीफा योजना के माध्यम से पंजाब के आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी स्टूडेंट्स की खिल्ली उड़ाई है।
विभाग की योजना के अनुसार यह वजीफा भी ऐसे बच्चों को दिया जाएगा जिनके परिवार की वार्षिक आमदन महज छह हजार रुपये होगी। इस योजना का जनरल कैटेगरी वेलफेयर फेडरेशन ने कड़ा नोटिस लिया है।
फेडरेशन का आरोप है कि यह योजना मेधावी बच्चों को उत्साहित करने की जगह उनके जख्मों पर नमक छिड़कने के सामान है।
शिक्षा विभाग की वजीफा शाखा की तरफ से 17 फरवरी को राज्य के सभी डीईओ (स) को जारी पत्र के अनुसार मिडिल कक्षा (8वीं) की परीक्षा के आधार पर 9वीं और 10वीं कक्षा के लिए स्कालरशिप फार ब्रिलिएंट इक्नोमीकली बैकवर्ड स्टूडेंट्स नामक योजना शुरू की गई है।
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इसके तहत 6 हजार रुपये वार्षिक आय वाले जनरल वर्ग के परिवारों से संबंधित बच्चों को 10 रुपये प्रतिमाह वजीफा दिया जाना है। पत्र के माध्यम से बोर्ड से सभी डीईओ से ऐसे विद्यार्थियों की सूची उपलब्ध करवाने की मांग की है।
साथ ही यह भी खुलासा किया गया कि पिछले साल के दौरान मांगें जाने पर भी शिक्षा अधिकारियों ने सूची उपलब्ध नहीं करवाई गई।
फेडरेशन के चीफ आर्गनाइजर सुखबीर सिंह, प्रधान प्रभजीत सिंह, सीनियर उपाध्यक्ष जरनैल सिंह बराड़ व प्रेस सचिव जसवीर सिंह ने कहा कि पंजाब ऐसा प्रदेश है जिसमें प्रति व्यक्ति आय दूसरे प्रदेशों के मुकाबले ज्यादा है।
पंजाब आंकड़ा सार 2014 के अनुसार पंजाब में प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 92350 रुपये है जबकि पंजाब सरकार की तरफ से 24 अप्रैल, 2015 को जारी पत्र के मुताबिक एक मजदूर की कम से कम आमदन भी 82173 रुपये वार्षिक है।
ऐसे में बोर्ड की तरफ से महज 6 हजार रुपये वार्षिक आय की शर्त लगाना और सिर्फ 10 रुपये प्रतिमाह वजीफा देना जायज बात नहीं है। उन्होंने कहा कि महंगाई के चलते 10 रुपये में एक अच्छा पेन भी नहीं आता फिर शिक्षा विभाग कैसे मेधावी स्टूडेंट्स को उत्साहित करने के दावे कर रहा है।
फेडरेशन ने मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री से इस मामले में दखल देने की मांग की है। यदि सरकार सही मायनों में जनरल वर्ग के मेधावी बच्चों को उत्साहित करना चाहती है कि महंगाई के मुताबिक शर्तें रखी जाएं और उसी हिसाब से वजीफा की राशि तय होना चाहिए।
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विभाग की योजना के अनुसार यह वजीफा भी ऐसे बच्चों को दिया जाएगा जिनके परिवार की वार्षिक आमदन महज छह हजार रुपये होगी। इस योजना का जनरल कैटेगरी वेलफेयर फेडरेशन ने कड़ा नोटिस लिया है।
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फेडरेशन का आरोप है कि यह योजना मेधावी बच्चों को उत्साहित करने की जगह उनके जख्मों पर नमक छिड़कने के सामान है।
शिक्षा विभाग की वजीफा शाखा की तरफ से 17 फरवरी को राज्य के सभी डीईओ (स) को जारी पत्र के अनुसार मिडिल कक्षा (8वीं) की परीक्षा के आधार पर 9वीं और 10वीं कक्षा के लिए स्कालरशिप फार ब्रिलिएंट इक्नोमीकली बैकवर्ड स्टूडेंट्स नामक योजना शुरू की गई है।
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इसके तहत 6 हजार रुपये वार्षिक आय वाले जनरल वर्ग के परिवारों से संबंधित बच्चों को 10 रुपये प्रतिमाह वजीफा दिया जाना है। पत्र के माध्यम से बोर्ड से सभी डीईओ से ऐसे विद्यार्थियों की सूची उपलब्ध करवाने की मांग की है।
साथ ही यह भी खुलासा किया गया कि पिछले साल के दौरान मांगें जाने पर भी शिक्षा अधिकारियों ने सूची उपलब्ध नहीं करवाई गई।
फेडरेशन के चीफ आर्गनाइजर सुखबीर सिंह, प्रधान प्रभजीत सिंह, सीनियर उपाध्यक्ष जरनैल सिंह बराड़ व प्रेस सचिव जसवीर सिंह ने कहा कि पंजाब ऐसा प्रदेश है जिसमें प्रति व्यक्ति आय दूसरे प्रदेशों के मुकाबले ज्यादा है।
पंजाब आंकड़ा सार 2014 के अनुसार पंजाब में प्रति व्यक्ति वार्षिक आय 92350 रुपये है जबकि पंजाब सरकार की तरफ से 24 अप्रैल, 2015 को जारी पत्र के मुताबिक एक मजदूर की कम से कम आमदन भी 82173 रुपये वार्षिक है।
ऐसे में बोर्ड की तरफ से महज 6 हजार रुपये वार्षिक आय की शर्त लगाना और सिर्फ 10 रुपये प्रतिमाह वजीफा देना जायज बात नहीं है। उन्होंने कहा कि महंगाई के चलते 10 रुपये में एक अच्छा पेन भी नहीं आता फिर शिक्षा विभाग कैसे मेधावी स्टूडेंट्स को उत्साहित करने के दावे कर रहा है।
फेडरेशन ने मुख्यमंत्री व शिक्षा मंत्री से इस मामले में दखल देने की मांग की है। यदि सरकार सही मायनों में जनरल वर्ग के मेधावी बच्चों को उत्साहित करना चाहती है कि महंगाई के मुताबिक शर्तें रखी जाएं और उसी हिसाब से वजीफा की राशि तय होना चाहिए।