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महंगाई के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन
ब्यूरो/अमर उजाला, फिरोजपुर
Updated Sun, 08 Nov 2015 07:57 PM IST
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कांग्रेस ने महंगाई के मुद्दे पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की शुरूआत रविवार को अबोहर की ईदगाह बस्ती में रोष प्रदर्शन करके की। महंगाई के लिए मोदी सरकार और पंजाब की अकाली-भाजपा सरकार को दोषी ठहराते हुए एनडीए सरकार का पुतला फूंका।
रोष प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि देशवासियों को अच्छे दिनों का इंतजार था लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। मोदी सरकार ने जो सपने मतदाताओं को दिखाए थे वे मात्र 18 माह में ही चकनाचूर हो गए है।
कांग्रेस सरकार के समय अरहर दाल का दाम 65 रुपये किलो था। आज अरहर की दाल 200 रुपये किलो में मिल रही है। टमाटर 60 और प्याज 50 रुपये किलो बिक रहा है। पंजाब में दालों की पैदावार बढ़ने के बावजूद जमाखोरी के कारण भाव आसमान को छू रहे है।
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पंजाब में कहीं भी छापामारी करके कालाबाजारी रोकने की कोशिश न करना यह दर्शाता है कि जमाखोरों को पंजाब सरकार का संरक्षण है। पंजाब में राशन डिपोे से पिछले बीस माह से सब्सिडी पर दाल का वितरण भी नहीं हुआ। बुढ़ापा और विधवा पेंशन नहीं दी जा रही है।
सफेद मक्खी के प्रकोप से पीड़ित किसान मुआवजे के लिए आंदोलन कर रहे हैं। धार्मिक भावनाएं आहत होने से माहौल बिगड़ता जा रहा है। लोग धार्मिक संगठनों के आपसी टकराव के कारण पशोपेश में है। अब संगत बादलों के दर्शन का इंतजार कर रही है। बादलों में कोटकपूरा ओर फरीदकोट के गांवों में जाने की हिम्मत नहीं रही।
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रोष प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुनील जाखड़ ने कहा कि देशवासियों को अच्छे दिनों का इंतजार था लेकिन उनकी उम्मीदों पर पानी फिर गया है। मोदी सरकार ने जो सपने मतदाताओं को दिखाए थे वे मात्र 18 माह में ही चकनाचूर हो गए है।
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कांग्रेस सरकार के समय अरहर दाल का दाम 65 रुपये किलो था। आज अरहर की दाल 200 रुपये किलो में मिल रही है। टमाटर 60 और प्याज 50 रुपये किलो बिक रहा है। पंजाब में दालों की पैदावार बढ़ने के बावजूद जमाखोरी के कारण भाव आसमान को छू रहे है।
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पंजाब में कहीं भी छापामारी करके कालाबाजारी रोकने की कोशिश न करना यह दर्शाता है कि जमाखोरों को पंजाब सरकार का संरक्षण है। पंजाब में राशन डिपोे से पिछले बीस माह से सब्सिडी पर दाल का वितरण भी नहीं हुआ। बुढ़ापा और विधवा पेंशन नहीं दी जा रही है।
सफेद मक्खी के प्रकोप से पीड़ित किसान मुआवजे के लिए आंदोलन कर रहे हैं। धार्मिक भावनाएं आहत होने से माहौल बिगड़ता जा रहा है। लोग धार्मिक संगठनों के आपसी टकराव के कारण पशोपेश में है। अब संगत बादलों के दर्शन का इंतजार कर रही है। बादलों में कोटकपूरा ओर फरीदकोट के गांवों में जाने की हिम्मत नहीं रही।