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न्यूयार्क में तिलक से स्वागत: मैडिसन स्क्वायर गार्डन में संबोधन; मोहन भागवत के तीन देशों के दौरे पर टिकी नजरें

Wed, 26 Aug 2026 07:57 AM IST
प्रशांत तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: प्रशांत तिवारी Updated Wed, 26 Aug 2026 07:57 AM IST
सार

RSS प्रमुख मोहन भागवत 25 अगस्त 2026 से अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन के दौरे पर हैं। न्यूयॉर्क पहुंचने के बाद वह शनिवार को मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन्स’ को संबोधित करेंगे। इसी बीच USCIRF की RSS और भारत को लेकर टिप्पणियों पर विदेश मंत्रालय ने संस्था को पक्षपाती बताते हुए उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है।

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Welcomed with tilak in New York Madison Square Garden RSS Chief arrived US on first leg of three nation tour
अमेरिका पहुंचने पर आरएसएस प्रमुख का स्वागत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत मंगलवार को न्यूयॉर्क पहुंचे। यह उनके तीन देशों अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम के ग्लोबल आउटरीच दौरे का पहला चरण है। संघ के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत स्थानीय संगठनों के निमंत्रण पर हो रहे इस दौरे के दौरान भागवत भारतीय समुदाय के लोगों के साथ-साथ स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधियों से भी संवाद करेंगे। न्यूयॉर्क पहुंचने पर उनका पारंपरिक तरीके से तिलक लगाकर गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

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मैडिसन स्क्वायर गार्डन में होगा बड़ा आयोजन
मोहन भागवत शनिवार को न्यूयॉर्क शहर के प्रसिद्ध मैडिसन स्क्वायर गार्डन में ‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन्स’ यानी ‘सार्वभौमिक एकता समारोह’ को संबोधित करेंगे। यह एक बड़े और विविध समुदाय की भागीदारी वाला कार्यक्रम होगा, जिसका आयोजन ‘अमेरिकन हिंदूज़ फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग’ (AHEAD) फोरम की ओर से किया जा रहा है। भागवत के इस संबोधन को लेकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी दिलचस्पी देखी जा रही है। यह आयोजन एकता, नागरिक कर्तव्य और वैश्विक सद्भाव जैसे आधुनिक विचारों के साथ हिंदू त्योहार रक्षाबंधन की पारंपरिक भावना को जोड़ते हुए मनाया जाएगा।
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सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि भी होंगे शामिल
आयोजकों के मुताबिक, कार्यक्रम में दिन की थीम के अनुरूप विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा अलग-अलग धर्मों के प्रमुख वक्ता भी समारोह में शामिल होंगे और एकता तथा वैश्विक सद्भाव का संदेश देंगे।
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25 अगस्त से शुरू हुआ तीन देशों का दौरा
इससे पहले RSS के प्रचार प्रमुख सुनील अंबेडकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए बताया था कि मोहन भागवत 25 अगस्त 2026 से अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम के दौरे पर रहेंगे। यह यात्रा इन देशों में सक्रिय स्थानीय संघ इकाइयों और विभिन्न संगठनों के निमंत्रण पर आयोजित की जा रही है। उन्होंने पोस्ट में लिखा, 'राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 25 अगस्त 2026 से अमेरिका, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम का दौरा करेंगे। यह दौरा वहां के स्थानीय संघों और संगठनों के निमंत्रण पर हो रहा है। यह यात्रा RSS के चल रहे शताब्दी वर्ष के अवसर पर आयोजित की जा रही है।'

USCIRF की टिप्पणियों पर भारत का कड़ा पलटवार
भागवत के अमेरिका पहुंचने से पहले RSS को लेकर अमेरिकी संस्था ‘यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम’ (USCIRF) की हालिया टिप्पणियों पर भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। मंत्रालय ने USCIRF को पक्षपाती संस्था बताते हुए उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को मीडिया ब्रीफिंग के दौरान कहा कि USCIRF ने पिछले कई वर्षों में भारत के बारे में बार-बार गलत और भड़काऊ बयान दिए हैं। उन्होंने कहा कि ऐसी संस्थाओं के बयानों को नजरअंदाज किया जाना चाहिए, क्योंकि उनके अपने एजेंडे होते हैं और उनकी कोई विश्वसनीयता नहीं है। जायसवाल ने कहा, 'हम सभी जानते हैं कि यह एक पक्षपाती संस्था है। इसने कई वर्षों से भारत के बारे में गलत और भड़काऊ बयान दिए हैं। हमें ऐसी संस्थाओं को नजरअंदाज करना चाहिए, क्योंकि उनके अपने एजेंडे होते हैं और उनकी कोई विश्वसनीयता नहीं है।”

RSS पर प्रतिबंध और नेताओं से दूरी बनाने की USCIRF की मांग
विदेश मंत्रालय की यह प्रतिक्रिया USCIRF के अधिकारियों द्वारा RSS को लेकर की गई उन टिप्पणियों के बाद आई, जिनमें अमेरिकी सरकार से संगठन पर प्रतिबंध लगाने की मांग की गई थी। USCIRF ने अमेरिकी सरकार से यह भी आग्रह किया था कि वह RSS नेताओं को उच्च-स्तरीय राजनयिक सम्मान न दे और उनके साथ बैठकें करने से भी परहेज करे।


ये भी पढ़ें: आरएसएस प्रमुख का अमेरिका दौरा: न्यूयॉर्क में भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे भागवत; मेयर भड़के, क्या-क्या कहा?

मार्च की रिपोर्ट में भारत पर लगाए गए थे आरोप
USCIRF की ताजा टिप्पणियां मार्च में जारी उसकी वार्षिक रिपोर्ट में कथित धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन को लेकर भारत की आलोचना की गई थी। आयोग ने RSS और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (RAW) समेत कुछ व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ लक्षित प्रतिबंधों का समर्थन किया था। भारत ने USCIRF की इस रिपोर्ट को पहले ही सिरे से खारिज कर दिया था। सरकार ने रिपोर्ट को “संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक नैरेटिव” पर आधारित बताते हुए कहा था कि इसमें भारत की “विकृत और चुनिंदा” तस्वीर पेश की गई है।

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