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पश्चिमी यूपी में 32 लोगों की मौत, 3128 मिले नए मरीज, अस्पतालों में न बेड न
कोरोना संक्रमण के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। छह जिलों में 32 लोगों की मौत हो गई, जबकि 3128 नए संक्रमित मिले हैं। मेरठ में शुक्रवार को 9141 सैंपलों की जांच की गई, जिसमें 1288 मरीज मिले, जबकि 12 की मौत हो गई। संक्रमण की दर 14 प्रतिशत से ऊपर रही। ज्यादातर नए मामले गंगानगर, करनावल, मुल्हेड़ा, भगवानपुर, पबरसा, वेदव्यासपुरी, ब्रह्मपुरी, जयभीमनगर, मेडिकल कॉलेज, शास्त्री नगर, जागृति विहार, कंकरखेड़ा, खरखौदा, लखीपुरा और राजेंद्र नगर आदि के हैं।
लखनऊ के बाद मेरठ में रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी का भंडाफोड़, दो आरोपी दबोचे
उत्तर प्रदेश में लखनऊ के बाद मेरठ में भी कोरोना संक्रमण के गंभीर मरीजों को जीवनदान देने वाले रेमडेसिविर इंजेक्शनों की कालाबाजारी का भंडाफोड़ हुआ है। शुक्रवार को मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद लालकुर्ती क्षेत्र के कई मेडिकल स्टोर पर छापा भी मारा। जिसमें एक इंजेक्शन बरामद किया गया है। वहीं इस मामले में एक निजी अस्पताल के डायरेक्टर व दो कर्मचारी के खिलाफ जानी थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों की निशानदेही पर एक इंजेक्शन भी बरामद कर लिया है। यह मामला लखनऊ तक पहुंचा तो मेरठ के कई मेडिकल स्टोर पर छापेमारी शुरू हो गई। पुलिस और प्रशासन अस्पताल के खिलाफ बड़ी कार्रवाई कर सकता है। एसएसपी अजय साहनी ने पुलिस और प्रशासन की एक संयुक्त टीम बना दी है। यह टीम ब्लैक में बेचे जा रहे इंजेक्शन को बरामद करने के लिए लगी हुई है।
मेरठ में अस्पतालों का हाल: भर्ती होना है तो अपनी ऑक्सीजन लेकर आओ...
मेरठ में कोरोना से जनता के बचाव के प्रशासन के सारे दावे हवा हवाई साबित हो रहे हैं। अस्पतालों में मरीजों के लिए न बेड है न ही ऑक्सीजन। कोरोना उपचार के लिए बनाए गए अस्पतालों में प्रभारियों के नंबर या तो बंद हैं या उठाए नहीं जाते। अस्पतालों में हालात बदतर हैं। अस्पतालों ने मरीजों से कहना शुरू कर दिया है कि अपना सिलिंडर लाओ और भर्ती हो जाओ।
हाथ जोड़े, मिन्नतें कीं... फिर भी नहीं किया भर्ती
कोरोना तो छोड़िए, अन्य रोगियों को भी अब आसानी से इलाज नहीं मिल रहा है। जरूरतमंद रोगी को किसी भी अस्पताल में ऑक्सीजन वाला बेड नहीं मिल रहा है। परिजन अस्पतालों के बाहर मिन्नतें कर रहे हैं। अस्पताल कर्मचारियों के सामने हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा रहे हैं कि उनके अपनों को बचा लें, लेकिन किसी की नहीं सुनी जा रही है। मेडिकल अफसर ऑक्सीजन पर्याप्त होने का दावा कर रहे हैं, वहीं गंभीर मरीजों को ऑक्सीजन की कमी बताकर लौटाया जा रहा है।
ऑक्सीजन देख बेकाबू हुए तीमारदार
मेरठ में इस वक्त जिनके अपने अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जद्दोजहद कर रहे हैं, उनका दर्द सिर्फ वे ही बयां कर सकते हैं। तीमारदार कई दिन से अस्पतालों के बाहर पड़े हैं। हर किसी की संवेदना उनके साथ जुड़ी हुई है। गुरुवार रात को मेडिकल कॉलेज में जो हुआ वो संवेदनाओं को तार-तार करने वाला था। ऑक्सीजन से भरी एक गाड़ी के पहुंचते ही बहुत से तीमारदारों की भीड़ जुट गई। चंद मिनटों में गाड़ी से सारे सिलिंडर निकाल कर ले गए। कई के बीच हाथापाई भी हो गई। हर कोई अपने मरीज के लिए ऑक्सीजन का सिलिंडर बचाकर रखना चाहता था।
अस्पताल में तोड़फोड़, डॉक्टरों-कर्मचारियों से मारपीट, महिला की मौत के बाद दूसरे अस्पताल में जमकर हंगामा
मेरठ के एक अस्पताल में शनिवार सुबह तोड़फोड़ कर दी गई। इस दौरान डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों के साथ मारपीट भी की गई। भाजपा नेताओं का आरोप है कि पुलिस ने साठगांठ कर आरोपियों को छोड़ दिया है। भाजपा नेता सुनील भराला ने एसपी सिटी से मिलकर शिकायत की है। एक दूसरे अस्पताल में महिला की मौत के बाद जमकर हंगामा हुआ।
राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल की रिपोर्ट आई कोरोना पॉजिटिव, घर पर हुए आइसोलेट
मुजफ्फरनगर में बीजेपी विधायक और प्रदेश के कौशल विकास राज्य मंत्री कपिल देव अग्रवाल भी कोरोना संक्रमित हो गए हैं। उनकी जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। राज्य मंत्री कपिल देव की बेटी और बेटा पहले से ही संक्रमित हैं जो घर पर ही आइसोलेट हैं। बताया गया कि मंत्री के स्टाफ के तीन कर्मचारी भी पॉजिटिव पाए गए थे। जांच रिपोर्ट आने पर राज्य मंत्री घर पर ही आइसोलेट हो गए हैं। उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर इसकी जानकारी देकर संपर्क में आए लोगों से अपनी कोरोना जांच कराने का आग्रह किया है।
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