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एतिहासिक औघड़नाथ मंदिर के पुजारी ने सैनिकों के दिल में जलाई थी क्रांति की ज्वाला
10 मई 1857 को मेरठ छावनी में क्रांति की ज्वाला यूं ही नहीं भड़की थी। मंदिर के पुजारी ने भारतीय सैनिकों के आत्मसम्मान को ललकारा था। हिंदू-मुस्लिम सैनिकों की आत्मा को झकझोरा था, तब जाकर क्रांति की ज्वाला प्रज्ज्वलित हुई थी। जिस ऐतिहासिक कुएं पर सैनिकों ने अंग्रेजों को मार गिराने की कसम खाई थी, उसी कुएं पर बने शहीद स्मारक पर सोमवार को शहीद क्रांतिकारियों को नमन किया जाएगा। लोगों को ऑनलाइन कार्यक्रम आयोजित करने के लिए कहा गया है।
17 मई तक कोरोना कर्फ्यू का सख्ती से होगा पालन
प्रदेश सरकार ने कोरोना के बढ़ते मामलों को रोकने के लिए कोरोना कर्फ्यू की अवधि बढ़ाकर 17 मई सुबह सात बजे तक कर दी है। मेरठ में नियम तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। सड़कों पर बेवजह घूमने वालों के चालान काटे जाएंगे। खाद्यान्न की दुकानें पहले की तरह सुबह आठ से 11 बजे तक खुलेंगी। वहीं सोमवार को शहर की सभी बैंक शाखाएं बंद रहेंगी।
रिपोर्ट निगेटिव... फिर भी जा रही जान, बढ़ रहे पोस्ट कोविड मरीज
मेरठ में कोरोना को हराने के बाद भी मरीजों को जिंदगी से जूझना पड़ रहा है। अस्पतालों में बेड के लिए मारामारी है। इसलिए कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आते ही कोविड अस्पतालों से बीमार हालत में ही मरीजों को छुट्टी दे दी जाती है। बाद में तबियत बिगड़ने के बाद मरीज इलाज के लिए भटकते फिर रहे हैं। कई मामले ऐसे भी सामने आए हैं जिसमें निगेटिव रिपोर्ट आने के बाद भी मरीज की मौत हो गई। यही कारण है कि कई नॉन कोविड अस्पताल बड़ी संख्या में पोस्ट कोविड मरीजों से भरे हैं। मरीजों को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ रही है।
मेरठ में एक दिन में 1365 मरीज संक्रमित मिले, 15 की मौत
मेरठ में कोरोना की रफ्तार रुक नहीं रही है। रविवार को 1365 मरीज मिले, जबकि 15 लोगों की मौत हो गई है। 9 मौत मेडिकल और 6 निजी अस्पतालों में हुईं। 6927 सैंपलों की जांच हुई। इस लिहाज से 19.7 प्रतिशत मरीज संक्रमित निकले हैं। 16238 एक्टिव केस हैं। इनमें से 1791 अस्पतालों में भर्ती हैं, जबकि 6020 होम आइसोलेशन में हैं। अब तक 53024 लोगों को कोरोना की पुष्टि हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग कोरोना संक्रमण से 532 लोगों की मौत दिखा रहा है। 732 मरीजों की छुट्टी हुई है। अब तक 36253 की छुट्टी हो चुकी है। एंटीजन के मुकाबले आरटीपीसीआर जांच में ज्यादा संक्रमित निकल रहे हैं।
मालवाहक में चारपाई पर मरीज... ड्रिप लगी हुई
बीमारी... परेशानी और बेबसी। मेरठ मेडिकल कॉलेज हो या निजी अस्पताल। यह किस्सा और दिल को झकझोर देने वाली यह तस्वीरें हर रोज की हैं। किसी को बेड नहीं मिल रहा है तो कोई इमरजेंसी के फर्श पर लेटने को मजबूर है। कोई भर्ती होने के लिए फोन करता है तो उससे कहा जाता है कि ऑक्सीजन सिलिंडर साथ लेकर आएं। निजी अस्पतालों में तो बिल भी मोटा बनाया जा रहा है। अपनों का हाल जानने के लिए मेडिकल के कोविड अस्पताल पहुंचे तीमारदार परेशान हैं। उनको पता नहीं चल पा रहा कि उनका मरीज किस हालत में है। मरीज तड़प रहे हैं और कोई सुनने वाला नहीं। इसी तरह ऑक्सीजन को लेकर मारामारी है। कोई मदद करना भी चाहे तो कर नहीं पा रहा है। कोविड अस्पताल में जिन मरीजों की मृत्यु हुई है उनमें से किसी का मोबाइल नहीं मिला है तो किसी की चाबी। किसी का पर्स गायब है तो किसी के हाथ का सोने का कड़ा। तमाम कोशिशों के बावजूद कोई सुन नहीं रहा है। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार का कहना है कि कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को बेहतर इलाज दे सकें।
अजित सिंह की अस्थियां विसर्जित
रालोद अध्यक्ष चौधरी अजित सिंह की अस्थियों का विर्सजन रविवार को ब्रजघाट पर किया गया। अस्थि विसर्जन की रस्म जयंत चौधरी ने पूरी की। इस दौरान परिवार के लोग ही शमिल रहे।
छह मई को चौधरी अजित सिंह का निधन हो गया था। रविवार सुबह उनकी अस्थियों को ब्रजघाट लाया गया और यहां में विधिविधान के साथ गंगा में प्रवाहित किया गया। रालोद के प्रदेश प्रवक्ता सुनील रोहटा ने बताया कि अस्थि विसर्जन के समय जयंत चौधरी के साथ उनकी पत्नी चारु चौधरी, चौधरी अजित सिंह के दामाद विक्रमादित्य सिंह और उनकी भांजी के पति शैलेंद्र अग्रवाल मौजूद रहे। कोविड गाइड लाइन के चलते अस्थि विसर्जन की जानकारी किसी कार्यकर्ता को पहले से नहीं दी गई थी। जयंत चौधरी ने सभी को घर से ही प्रार्थना करने की अपील की थी। वहीं, चौधरी अजित सिंह की किसी भी अंतिम क्रिया में शामिल न हो पाने का मलाल कार्यकर्ताओं में रहा। इसे लेकर सोशल मीडिया पर उनकी प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल रही हैं।
मेरठ में एक जून से शुरू हो जाएगा पीएनजी शवदाह गृह
मेरठ में कोरोना महामारी की शुरुआत से ही सूरजकुंड श्मशान में पीएनजी शवदाह गृह की मांग की जा रही है। पार्किंग में प्लेटफार्म बनने के बाद भी शवों का सही ढंग से अंतिम संस्कार नहीं हो पा रहा है। ऐसे में आर्य समाज और गंगा मोटर कमेटी संयुक्त रूप से कार्य कर एक जून से पीएनजी शवदाह गृह शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए फरीदाबाद की कंपनी को टोकन मनी भेज दी गई है।
कूड़ा उठाने वाले वाहन से श्मशान ले जाया गया शव
शामली के कस्बा जलालाबाद के मोहल्ला मोहम्मदीगंज में बीमार चल रही 50 वर्षीय महिला की मौत हो गई। कोरोना महामारी के डर से महिला के शव को कंधा देने के लिए कोई नहीं आया। हद तो तब हो गई जब नगर पंचायत के कूड़ा उठाने वाले वाहन से शव को श्मशान घाट ले जाया गया, जहां पर मृतका के भाई ने अंतिम संस्कार किया। वहीं इस मामले के बारे में सीएमओ ने अनभिज्ञता जताई है। उधर, मेरठ में भी एक इसी तरह का मामला सामने आया है।
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