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अमेरिका का मुक्ति दिवस: गलत कारोबारी प्रथाएं होंगी खत्म; कैरोलिन बोलीं- कामगारों के हित में होगा जवाबी शुल्क

Wed, 02 Apr 2025 08:49 AM IST
अभिषेक दीक्षित वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन Published by: अभिषेक दीक्षित Updated Wed, 02 Apr 2025 08:49 AM IST
सार

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो अप्रैल से कई देशों के खिलाफ रेसिप्रोकल टैरिफ यानी जवाबी आयात शुल्क लगाने का एलान करने जा रहे हैं। ट्रंप ने इस दिन को खास नाम भी दिया है- लिबरेशन डे यानी आजादी दिवस। हालांकि, उनके इस एलान को आर्थिक मामलों के जानकार ने दुनिया के खिलाफ व्यापार युद्ध छेड़ने का दिन करार दिया है। 

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USA Liberation Day: Wrong business practices will end reciprocal tariffs will be in interest of workers
व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट - फोटो : एएनआई

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप बुधवार को अमेरिका के साथ कारोबार करने वाले देशों पर जवाबी शुल्क की घोषणा करने वाले हैं। ट्रंप ने इस दिन को अमेरिकी कारोबार के लिए मुक्ति दिवस का नाम दिया है। इस दौरान अमेरिकी संसद में सभी मंत्रियों व सदस्यों के मौजूद रहने की संभावना है।



व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा, बुधवार को अमेरिका में मुक्ति दिवस मनाया जाएगा, जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने गर्व से कहा है। राष्ट्रपति ट्रंप टैरिफ योजना की घोषणा करेंगे और यह नई व्यवस्था दशकों से हमारे देश को लूटने वाली अनुचित व्यापार प्रथाओं को खत्म करेगी। यह अमेरिकी कामगारों के सर्वोत्तम हित में होगा। 

यह भी पढ़ें- ट्रंप लागू करेंगे जवाबी टैरिफ: भारत के किन उद्योगों पर पड़ेगा असर और कौन से देश निशाने पर, क्या तैयारियां?

लेविट ने कहा, दुर्भाग्य से, ये देश बहुत लंबे समय से हमारे देश को लूट रहे हैं। आप इन पर गौर करें तो अमेरिकी डेयरी पर यूरोपीय संघ 50% (टैरिफ) और अमेरिकी चावल पर जापान 700% टैरिफ लगाता है। भारत भी पीछे नहीं है, वह अमेरिकी कृषि उत्पादों पर 100% टैरिफ लगाता है। कनाडा भी अमेरिकी मक्खन और पनीर पर लगभग 300% टैरिफ वसूलता है।  इससे इन बाजारों में अमेरिकी उत्पादों का आयात करना लगभग असंभव हो गया है और इसने पिछले कई दशकों में बहुत से अमेरिकियों को व्यवसाय और रोजगार से बाहर कर दिया है।

USA Liberation Day: Wrong business practices will end reciprocal tariffs will be in interest of workers
नरेंद्र मोदी, डोनाल्ड ट्रंप। - फोटो : एएनआई (फाइल)

अमेरिकी वस्तुओं पर भारत का उच्च आयात शुल्क, गैर-टैरिफ बाधाएं बरकरार : यूटीएसआर
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) की 2025 राष्ट्रीय व्यापार अनुमान (एनटीई) रिपोर्ट में दावा किया कि भारत कृषि वस्तुओं, दवा निर्माण और मादक पेय पदार्थों जैसी कई अमेरिकी वस्तुओं पर उच्च आयात शुल्क के साथ गैर-टैरिफ बाधाएं बरकरार रखी हुई हैं।

जवाबी शुल्कों की घोषणा से एक दिन पहले जारी रिपोर्ट में कहा गया कि भारत वनस्पति तेल (45 प्रतिशत तक), सेब, मक्का और मोटरसाइकिल (50 प्रतिशत), ऑटोमोबाइल और फूल (60 प्रतिशत), प्राकृतिक रबर (70 प्रतिशत), कॉफी, किशमिश और अखरोट (100 प्रतिशत) पर काफी ऊंचा शुल्क लगाता है। इसके अलावा, भारत ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की सूची में शामिल आवश्यक जीवन रक्षक दवाओं और दवा निर्माणों पर बहुत अधिक बुनियादी सीमा शुल्क लागू कर रखा है। रिपोर्ट के मुताबिक कृषि उत्पादों पर भारत की विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) बाध्य टैरिफ दरें दुनिया में सबसे अधिक हैं।

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पीएम मोदी और डोनाल्ड ट्रंप की साझा प्रेसवार्ता - फोटो : ANI

भारत अपनी प्राथमिकताओं के नजरिये से करे अमेरिकी मांग का आकलन: जीटीआरआई
यूएसटीआर की रिपोर्ट पर जवाब देते हुए ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव (जीटीआरआई) ने कहा कि अमेरिका के कारोबार नीति में संशोधन को लेकर लगातार दबाव के बीच भारत को अपनी राष्ट्रीय प्राथमिकता के नजरिये से अमेरिकी मांगों का आकलन करना चाहिए। इन्हें विकास, लक्ष्य और सांस्कृतिक मूल्यों की कसौटी पर कसना चाहिए।

यह भी पढ़ें- भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ पर रार क्यों, ट्रंप क्या चाहते हैं; भारत की क्या दुविधा? जानें सबकुछ

जीटीआरआई के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा, डिजिटल गवर्नेंस और सार्वजनिक स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में प्रस्तावित कई बदलाव भारत के लिए खतरनाक हो सकते हैं। ये भारत के लिए किसानों की रक्षा करने, खाद्य सुरक्षा बनाए रखने, गहरी जड़ें जमाए सामाजिक मानदंडों को कायम रखने और अपने डिजिटल भविष्य को सुरक्षित करने की क्षमता के लिए गंभीर खतरे पैदा करते हैं। उन्होंने कहा, इनमें अधिकांश मुद्दे पहले की रिपोर्टों के ही दोहराव हैं। कुछ का समाधान हो चुका है और वे अब प्रासंगिक नहीं हैं।

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राष्ट्रपति ट्रंप से मिलते पीएम मोदी - फोटो : पीटीआई

व्यापक स्तर पर भारत-अमेरिका के बीच संभावित टैरिफ अंतराल अलग-अलग
व्यापार विशेषज्ञों का कहना है कि व्यापक क्षेत्र स्तर पर, भारत और अमेरिका के बीच संभावित टैरिफ अंतराल विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग हैं। रसायन और फार्मास्यूटिकल्स के लिए यह अंतर 8.6 फीसदी, प्लास्टिक के लिए 5.6 फीसदी, कपड़ा और परिधान के लिए 1.4 फीसदी, हीरे, सोने और आभूषणों के लिए 13.3 फीसदी, लोहा, इस्पात और आधार धातुओं के लिए 2.5 फीसदी, मशीनरी और कंप्यूटर के लिए 5.3 फीसदी, इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए 7.2 फीसदी और ऑटोमोबाइल और ऑटो घटकों के लिए 23.1 फीसदी है।

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पीएम नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप - फोटो : PTI

गैर टैरिफ बाधाओं की सूचना देने के लिए सरकार तैयार कर रही खास पोर्टल
भारतीय कंपनियों ने कुछ गैर-टैरिफ बाधाओं को चिह्नित किया है, जिनका सामना उन्हें अमेरिका में करना पड़ता है। इसके लिए मंत्रालय पोर्टल विकसित कर रहा है।

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