100 साल पहले प्रथम विश्वयुद्ध के दौरान करीब दो करोड़ लोग मारे गए थे, लेकिन युद्ध के बाद दुनिया को एक और भयानक संकट ने घेर लिया था। ये संकट था स्पैनिश फ्लू। स्पैनिश फ्लू महामारी पश्चिमी मोर्चे पर स्थित छोटे और भीड़ वाले सैन्य प्रशिक्षण शिविरों में से आई। इन शिविरों में गंदगी की वजह से ये बीमारी पनपी और तेजी से फैली।
100 साल पहले कोविड-19 जैसी महामारी से हुई थी अनगिनत मौतें, क्या वक्त फिर खुद को दोहरा रहा है
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उस समय भी महामारी से बचाव के लिए इस तरह के पोस्टर बनाए गए, जिससे लोगों के बीच जागरूकता फैलाई जा सके। भारत में इस फ्लू से उस समय की कुल जनसंख्या के छह फीसदी लोग मारे गए थे। जैसे अभी कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए हिदायत दी जा रही है, ठीक वैसे ही तब स्पैनिश फ्लू को रोकने के लिए कदम उठाए जा रहे थे।
साल 1918 में फिलाडेल्फिया की सड़कों पर थूकने के विरोध में यह पोस्टर लगाया गया था। इस पोस्टर में लिखा - स्पिट स्प्रेड डेथ यानी कि थूकने से मौतों का आंकड़ा बढ़ेगा। फिलाडेल्फिया शहर में फ्लू के शुरुआती छह महीनों में ही 17,500 से भी ज्यादा मारे गए थे। एक हफ्ते में यहां 4,500 लोग और हर दिन 837 लोगों की मौत हो रही थी।
1918 में पूरी दुनिया को अपनी जकड़ में लेने वाले इंफ्लूएंजा ने ऐसे लोगों को अपना ज्यादा शिकार बनाया था जो कि 20-30 साल की उम्र के और मजबूत इम्यून सिस्टम वाले थे। 1918 के पतझड़ के वक्त पर इस बीमारी की दूसरी लहर पहली के मुकाबले ज्यादा घातक साबित हुई थी।
यह तस्वीर भी स्पैनिश फ्लू के समय की है, जब लोगों ने अपने पालतू जानवरों को भी फ्लू से बचाने के लिए मास्क पहनाना जरूरी कर दिया था। तस्वीर में दिखने वाला परिवार कैलिफोर्निया के डबलिन का रहने वाला था। पूरे परिवार में छह लोग थे। परिवार के सभी लोगों ने उस समय के मास्क पहन रखे हैं।
कैथरीन एरनोल्ड में अपनी किताब पैनडेमिक 1918 में लिखा कि आधुनिक इतिहास में प्रत्यक्षदर्शियों ने मेडिकल सुुविधाओं का प्रलय देखा था। तस्वीर में सिर पर हैट लगाई महिला ने हाथों में फूलों का गुलदस्ता लिया हुआ है और परिवार के मुख्य सदस्य ने मुंह पर मास्क लगाए एक बिल्ली को अपने हाथ में पकड़ा हुआ है। इस फोटो ने पूरी दुनिया को आश्चर्य में डाल दिया था कि कोई बिल्ली में अपने मुंह पर मास्क लगा सकती है।
ये तस्वीर भी स्पैनिश फ्लू के समय की है, जब दो महिलाएं फ्लू के संक्रमण को रोकने के लिए अपने चेहरे पर मास्क लगाए हुई थी। स्पैनिश फ्लू से अकेले यूनाइटेड किंगडम में 2,28,000 लोग मारे गए थे। मई 1918 में जब फ्लू से पहली मौत दर्ज हुई, उस वक्त इंग्लैंड युद्ध के दौर में था।
दूसरी कई सरकारों की तरह ही यूके सरकार भी इससे निबटने के लिए तैयार नहीं थी। माना जाता है कि सरकार ने फैसला किया कि फ्लू से लोगों को बचाने की बजाय युद्ध पर फोकस करना ज्यादा जरूरी है। स्पैनिश फ्लू के दूसरे और तीसरे दौर को और भी ज्यादा खतरनाक बताया जाता है।